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जो बच्चे 34 और 36 सप्ताह के गर्भ में जन्म लेते हैं, उनमें फेफड़ों की बीमारियों का खतरा होता है।

नवजात शिशुओं में फेफड़े के रोगों को रोकने वाली दवा से इलाज के खर्च में कमी

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नवजात शिशुओं में फेफड़े के रोगों को रोकने वाली दवा से इलाज के खर्च में कमी
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कोलंबिया विश्वविद्यालय वैगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियन के शोधकर्ताओं और शल्य-चिकित्सकों द्वारा किए गए एक शोध के अनुसार अपरिपक्व नवजात शिशुओं में श्वसन संबंधी बीमारियों को रोकने के लिए दी जाने वाली दवा से स्वास्थ्य देखभाल में होने वाली लागत भी कम होती है।

यह नया अध्ययन जामा नेटवर्क जर्नल नामक पत्रिका में द्वारा 11 मार्च, 2019 को प्रकाशित किया गया था।

इस अध्ययन में, शोधकर्ताओं द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं की लागत की गणना की गयी थी। इस शोध को करने के लिए शोधकर्ताओं ने पिछले नैदानिक परीक्षण में दर्ज किये गए मां और शिशु के 1,426 जोड़ों के आंकड़ों का मिलान किया। इन जोड़ो को बीटामेथासोन दवा का एक टिका दिया गया था। वहीं, अध्ययन के दौरान 1,395 मां और शिशु के जोड़ों को यह दवा नहीं दी गई थी।

इस नैदानिक परीक्षण के दौरान, नवजात शिशुओं को दी गई श्वसन उपचार और दवाओं की लागतों का अनुमान लगाया गया था। इसमें बच्चे को जन्म देने के पहले 72 घंटों के भीतर मातृ देखभाल, अस्पताल में भर्ती करना और अन्य खर्च भी शामिल थे।

इस विश्लेषण की मदद से यह पता चलाता है कि माँ और शिशु के जोड़ों को बेटामेथासोन दवा दिए जाने पर औसत लागत $4,681 (INR 3.2 लाख) होती है। यह $5,379 (INR 3.7 लाख) की लागत की तुलना में काफी कम पाई गई जो उन रोगियों को होती है जिन्हें यह उपचार नहीं दिया जाता है।

इस नैदानिक परीक्षण का नेतृत्व करने वाले सिंथिया गैम्फी-बैनरमैन ने कहा, “डॉक्टरों ने समय से पहले जन्म देने के खतरे में माताओं के लिए व्यापक रूप से इस निवारक रणनीति को अपनाया है। लेकिन हम वास्तव में यह नहीं जानते थे कि यह प्रणाली लागत प्रभावी है।"

2016 में न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन में प्रकाशित इस दवा पर किये गए एक पिछले अध्ययन ने इस दवा की नवजात शिशुओं में फेफड़ों की बीमारियों को कम करने में प्रभावशीलता दिखाई है। पिछले अध्ययन के अनुसार, अमेरिका में लगभग 7 प्रतिशत बच्चे समय से पहले पैदा होते हैं।

पिछले अध्ययन के आंकड़ों के अनुसार, जो बच्चे 34 और 36 सप्ताह के गर्भ में जन्म लेते हैं, उनमें फेफड़ों की बीमारियों का खतरा होता है। यह बताया गया है कि समय से पहले जन्में बच्चे समय पर पैदा हुए शिशुओं की तुलना में अधिक श्वसन समस्याओं का अनुभव करते हैं।

इस नैदानिक परीक्षण के परिणामों के अनुसार, जिन महिलाओं को समय से पहले बच्चा होने का खतरा होता है, उन्हें कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा दी जाती है। इस दवा के उपयोग से शिशु के फेफड़ों में गंभीर श्वसन समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है। हालाँकि इस रणनीति की लागत-प्रभावशीलता को निर्धारित करने के लिए किये गए पिछले अध्ययन ने विविध परिणाम दिखाए थे।

इस नैदानिक परीक्षण के शोधकर्ताओं में से एक ने कहा है कि नवजात शिशुओं में श्वसन संबंधी समस्याओं को रोकने के लिए अन्य और भी अत्यधिक प्रभावी विकल्प हैं, लेकिन अंत में यह विकल्प महंगे हो सकते हैं। शोधकर्ताओं के विश्लेषण के अनुसार, जिन गर्भवती महिलाओं में समय से पहले बच्चा होने की संभावना होती है उनके लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा अत्यधिक प्रभावी और लागत के अनुकूल पाई जाती है।

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