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इस अध्ययन में, लोगों ने लगभग 75% समय ध्वनियों को समझा और दोहराया।

विचारों का शब्दों में अनुवाद करने के लिए एक नया उपकरण

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विचारों का शब्दों में अनुवाद करने के लिए एक नया उपकरण
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कोलंबिया के न्यूरेंजाइनर्स ने एक ऐसी प्रणाली की खोज की है जो विचारों को समझने के योग्य शब्दों में बदल देती है। यह तकनीक उन शब्दों को फिर से संगठित कर सकती है जो एक व्यक्ति असाधारण स्पष्टता के साथ सुनता है।

यह रिपोर्ट 29 जनवरी 2019 को साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित हुई।

शोधकर्ताओं ने दावा किया कि यह प्रणाली उन लोगों के लिए संवाद करने की क्षमता हासिल करने में सहायक होगी जो बोलने में असमर्थ हैं या एम्योट्रॉफ़िक लेटरल स्क्लरोसिस से पीड़ित हैं।

शोध के अनुसार जब लोग बोलते हैं या बोलने के बारे में सोचते हैं, तो उनके मस्तिष्क में गतिविधियों के पैटर्न बनजाते है। इसी तरह, जब हम किसी को सुनते हैं या सुनने की कल्पना करते हैं, तो एक अलग पैटर्न बनता है। विशेषज्ञ इस पैटर्न का अभिलेख और व्याख्या करने की कोशिश कर रहे हैं।

डॉ. मेसगरानी और उनकी टीम ने प्रथम-लेखक हसन अकबरी के पेपर की मदद से, एक वोकोडर विकसित किया जो एक कंप्यूटर एल्गोरिदम है जो लोगों द्वारा बोले गए शब्दों की रिकॉर्डिंग के ऊपर प्रशिक्षित होने बाद के उन शब्दों को संश्लेषित करेगा।

यह वोकोडर न केवल यह सुनिश्चित करेगा कि हमारे विचार मस्तिष्क के अंदर छिपे नहीं हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा की यह व्यक्ति की इच्छा से मौखिक रूप से अनुवादित किए गए हैं।

यह प्रयोग मिर्गी के रोगियों पर किया गया था, और उन लोगों को 0 से 9 के बीच के अंकों को सुनाने के लिए कहा गया था। यह वोकोडर उन संकेतों के जवाब में ध्वनि उत्पन्न करता है जिनका विश्लेषण और सफाई तंत्रिका संबंधी नेटवर्क द्वारा की जाती है।

डॉ. निमा मेसगारानी के अनुसार , उन्होंने अमेजन इको और ऐप्पल सिरी द्वारा इस्तेमाल की गई उसी तकनीक का इस्तेमाल किया है जिससे सवालों का मौखिक जवाब दिया जाता है।

डॉ. मेसगरानी ने कहा, "हमने पाया कि लोग लगभग 75% समय के लिए ध्वनियों को समझ और दोहरा सकते हैं, जो कि पिछले प्रयासों से ऊपर और परे है। संवेदनशील स्वर और शक्तिशाली तंत्रिका नेटवर्क उन ध्वनियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो रोगियों ने मूल रूप से आश्चर्यजनक सटीकता के साथ सुनी थीं ”।

डॉ. मेसगरानी का दावा है कि यदि कोई व्यक्ति चोट या किसी बीमारी के कारण बोलने की क्षमता खो चुका है, तो वोकोडर उनके लिए संवाद करने का एक नया मौका है।

मस्तिष्क की गतिविधि की व्याख्या करने के लिए वोकोडर को प्रशिक्षित करने के लिए, डॉ. मेसगरानी ने आशीष दिनेश मेहता के साथ मिलकर काम किया, जो नॉर्थवेल हेल्थ फिजिशियन पार्टनर्स न्यूरोसर्जन इंस्टीट्यूट में एक न्यूरोसर्जन हैं। टीम अधिक जटिल शब्दों और वाक्य संरचनाओं पर काम करने की योजना बना रही है।

वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के अनुसार, यह उपकरण नए बदलाव लाएगा। जैसे कि यह कंप्यूटर एल्गोरिदम पर आधारित है जो मस्तिष्क के संकेतों को ऑडियो रिकॉर्डिंग में प्रसारित करता है, इससे लाखों लोगों को मदद मिल सकती है जो जन्म से या बीमारी से बोलने में असमर्थ हैं।

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