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काई को ईंधन में बदलने की यह नई विधि सफलतापूर्वक काम करने में सक्षम और सस्ती है।

काई को ईंधन में बदलने का एक नया तरीका

लेखक सोनम  •  
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काई को ईंधन में बदलने का एक नया तरीका
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यूटाह विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने जहाजों, वाहनों और जेट को चलाने के लिए काई को जैविक-कच्चे तेल में बदलने का एक नया तरीका ढूंढ निकाला है। यह अध्ययन केमिकल इंजीनियरिंग साइंस एक्स नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

काई एक प्रकार के सूक्ष्मजीव होते हैं जो तालाबों, नदियों और झीलों में मौजूद होते हैं। इन सूक्ष्मजीवों के अंदर लिपिड होते हैं। लिपिड वसायुक्त एसिड अणु होते हैं जिनमें तेल होता है जो इंजनों को चलाने के लिए निकाला जा सकता है। जब ये लिपिड निकाले जाते हैं, तो उन्हें जैविक-कच्चा तेल कहा जाता है।

जैव ईंधन के लिए काई का उपयोग करने के साथ मुख्य समस्या यह है कि पौधों से लिपिड निकालने के लिए बहुत ऊर्जा की आवश्यकता होती है। वर्तमान विधियों का उपयोग करते समय, वास्तविक ऊर्जा की तुलना में परिणाम बहुत कम होता है।

वर्तमान विधि में, काई को पानी से बाहर निकाला जाता है जो जैव ईंधन को सूखे चूर्ण की अवस्था में छोड़ देता है। प्रक्रिया का यह हिस्सा बड़ी मात्रा में ऊर्जा का उपयोग करता है। फिर इस जमाव को एक द्रावक के साथ मिलाया जाता है जहां लिपिड को जैव ईंधन से अलग किया जाता है।

इस प्रक्रिया के अंत में, जैविक-कच्चे तेल का उत्पादन किया जाता है जिसका उपयोग काई आधारित जैव ईंधन के लिए किया जाता है। इस ईंधन को डीजल ईंधन के साथ मिश्रित किया जाता है ताकि डीजल से चलने वाली बड़ी मशीनें चल सके।

काई को जैव ईंधन में बदलना एक व्यावहारिक प्रक्रिया नहीं मानी जाती क्योंकि यह एक कुशल या किफायती प्रक्रिया नहीं है।

वर्तमान अध्ययन में जैव-कच्चा तेल बनाने के लिए काई का इस्तेमाल किया गया है। जैव कच्चे तेल को पायरोलिसिस तेल भी कहा जाता है। यह एक ईंधन है जो पेट्रोलियम की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।

वर्तमान तरीके द्वारा चुनौती को दूर करने के लिए, वैज्ञानिकों ने एक नए तरह के जेट मिक्सर का विकास किया, जो लिपिड को निकाल सकता है और साथ ही साथ इसमें अधिक ऊर्जा की ज़रूरत भी नहीं होती है।

इस अध्ययन के दौरान, केमिकल इंजीनियरों ने एक नया मिक्सिंग एक्सट्रैक्टर विकसित किया, जो काई के जेट्स पर द्रावक के जेट्स को हटाता है। इसके कारण संतुलन बिगड़ जाता है जिससे लिपिड द्रावक में "कूद" जाता है। यह द्रावक फिर निकाल लिया जाता है और इस प्रक्रिया में फिर से उपयोग किया जा सकता है।

डॉ. लियोनार्ड पीज़, शोध के सह-लेखकों में से एक ने कहा, “हमने काई से जैव ईंधन के उत्पादन को अधिक कुशल और प्रभावी बनाने के विकास में एक महत्वपूर्ण अवरोध को हटा दिया है। हमारी यह विधि हमें पहले की तुलना में जैव ईंधन ऊर्जा को बनाने के बहुत करीब ले आई है।"

स्वोमित्रा मोहंती, शोध के सह-लेखकों में से एक ने कहा, "हमारे डिजाइन यह सुनिश्चित करते हैं कि आपको काई को सुखाने में उस सारी ऊर्जा को खर्च नहीं करना पड़ेगा और यह प्रौद्योगिकी बाकि प्रौद्योगिकियों की तुलना में बहुत अधिक तेज़ हैं।"

यह नई विधि सफलतापूर्वक काम करने में सक्षम और सस्ती है। नया जेट मिक्सर तेज़ है और लिपिड को निकालने में बहुत कम समय लगाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक का उपयोग अन्य सूक्ष्मजीवों जैसे फफूंदी या जीवाणु के लिए भी किया जा सकता है।

वैज्ञानिक यह भी कहते हैं कि यह नया विकास एक गेम-चेंजिंग सफलता हो सकता है और काई और अन्य सेल-व्युत्पन्न जैव ईंधन के विकास में क्रांति ला सकता है।

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