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प्रत्येक वर्ष 47000 से अधिक ब्रिटिश पुरुषों में पौरुष ग्रंथि का कैंसर पाया जाता है।

पौरुष ग्रंथि के कैंसर के उपचार में एक आगे का कदम

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पौरुष ग्रंथि के कैंसर के उपचार में एक आगे का कदम
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कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी विधि विकसित की है जिसकी मदद से लोग पौरुष ग्रंथि के कैंसर का इलाज अपने आप चुन सकेंगे।

यह शोध कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर 12 मार्च, 2019 को प्रकाशित हुआ था।

इस नई तकनीक से उस समय अवधि का पता लगाया जा सकता है जितने समय के लिए रोगी जीवित रहने वाला है। इस पद्धति का उपयोग सर्वोत्तम उपचार को चुनने के लिए भी किया जा सकता है जिससे मरीज़ में सुधार की संभावना बढ़ सके।

शोधकर्ताओं द्वारा यह बताया गया है कि पौरुष ग्रंथि के कैंसर के सिर्फ एक तिहाई मरीजों का ही मृत्यु दर कम होता है। ये मरीज़ शल्यचिकित्सा या क्ष-रश्मि-चिकित्सा का चयन कर सकते हैं लेकिन इस तरह के उपचार उनके जीवित रहने की संभावना को कुछ हद तक प्रभावित करते हैं।

यह नई तकनीक एक कंप्यूटर प्रश्नावली पर आधारित है। इस पद्धति की प्रक्रिया के दौरान, रोगी को चिकित्सक की देखरेख में प्रश्नावली को कुछ ही मिनटों में पूरा करना होता है। इस प्रश्नावली से आने वाले 10 से 15 वर्षों में कैंसर के चरण या अन्य बीमारियों जैसे मृत्यु के कारणों की अनुमानित जानकारी मिल सकती है।

इस अध्ययन के लेखक, डॉ विंसेंट ज्ञानप्रकाशम ने कहा, "यह उपचारों में तर्क करने के लिए नहीं है, यह रोगियों और उनके चिकित्सकों को बेहतर सबूत के आधार पर निर्णय लेने के लिए सशक्त बनाने के बारे में है।"

डॉ ज्ञानप्रकाशम ने यह भी कहा, "कुछ मामलों में, उपचार सही विकल्प होगा, लेकिन कई अन्य मामलों में, रोगी उपचार के लाभों की तुलना में इसके दुष्प्रभावों के खतरों को मापना चाहेंगे।"

डॉ डेविड थर्टल, इस अध्ययन के मुख्य लेखक ने कहा, “जहां तक हम जानते हैं, यह पौरुष ग्रंथि के कैंसर के निदान के बाद पुरुषों के लिए समग्र अस्तित्व का अनुमान देने वाला पहला व्यक्तिगत उपकरण है। हमें उम्मीद है कि यह पुरुषों को उनके सलाहकार के साथ चर्चा करते हुए बेहतर निर्णय तक पहुंचने में अधिक सटीक और उद्देश्यपूर्ण अनुमान प्रदान करेगा।"

प्रत्येक वर्ष 47000 से अधिक ब्रिटिश पुरुषों में पौरुष ग्रंथि का कैंसर पाया जाता है। यह आंकड़ा और भी बढ़ रहा है और वर्ष 2030 तक यह 69 प्रतिशत बढ़ सकता है। पौरुष ग्रंथि के कैंसर के मरीजों को निम्न, मध्यवर्ती या उच्च खतरों जैसे तीन समूहों में विभाजित किया जाता है।

प्रश्नावली के विश्लेषण के उपचार के बाद रोगी के बचने की संभावनाओं को समझा जा सकता है। इस उपचार की पद्धति के तहत प्रश्नावली को प्रेडिक्ट प्रोस्टेट नाम दिया गया है। इस अध्ययन के परिणाम और इसके डिजाइन 12 मार्च, 2019 को पीएलओएस मेडिसिन जर्नल पर प्रकाशित हुए हैं।

इस पद्धति के लिए तैयार प्रश्नावली में 10 प्रश्न हैं। यह विधि व्यक्तियों की आयु, कैंसर के चरण और अन्य चिकित्सा परीक्षणों के बारे में जानकारी का उपयोग करती है। इस अध्ययन के नतीजे मरीजों की मूत्र विसंगति और स्तंभन दोष के खतरों के बारे में प्रामाणिक जानकारी देते हैं।

इस प्रश्नावली के ऐसे परिणामों के आधार पर, रोगी शल्यचिकित्सा या विकिरण चिकित्सा के अलावा कैंसर की निगरानी के लिए 'सक्रिय निगरानी' चुन सकता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नया परीक्षण 84 प्रतिशत सटीक जानकारी देता है। इस परीक्षण का संचालन करने के लिए, शोधकर्ताओं ने कैंसर से पीड़ित 10,000 ब्रिटिश पुरुषों और 2,546 सिंगापुर के पुरुषों का विश्लेषण किया था। शोधकर्ताओं ने कहा कि यह नया उपकरण चिकित्सकों द्वारा किए गए अनावश्यक और हानिकारक उपचार को कम कर सकता है।

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