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दिमाग तेज़ करने वाली दवाएं स्यूडोमेडिसिन हैं जिनके लिए विश्वसनीय प्रभावकारिता जानकारी उपलब्ध नहीं है।

अमेरिका के वृद्ध लोग दिमाग तेज़ करने वाली दवाओं का शिकार हो रहे हैं

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अमेरिका के वृद्ध लोग दिमाग तेज़ करने वाली दवाओं का शिकार हो रहे हैं
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अमेरिका में मध्यम और वृद्ध उम्र के लोग अल्जाइमर रोग के बढ़ते दर के कारण तथाकथित "दिमाग तेज़ करने वाली दवाओं" के शिकार हो रहे हैं।

बढ़ती उम्र के साथ, लोग ज्ञान संबंधी परिवर्तन और मनोभ्रंश विकसित करने के बारे में अधिक चिंता करते हैं। इस वजह से, दिमाग तेज़ करने वाली दवाओं के निर्माताओं और डीलरों ने इसे एक व्यवसाय बना लिया है।

लेकिन जैसा कि तंत्रिका विज्ञानी कहते हैं, ये दवाइयां सूडोमेडिसिन हैं यानी कि ये केवल कानून के भीतर मौजूद हैं और अक्सर वैज्ञानिक रूप से समर्थित उपचार के रूप में प्रचारित की जाती हैं, लेकिन इनके लिए विश्वसनीय प्रभावकारिता जानकारी मौजूद नहीं होती है।

इसीलिए इन दवाओं के अधिक सेवन से किसी भी तरह से स्वास्थ्य को लाभ नहीं होता है। बल्कि, कुछ नकारात्मक प्रभाव दिख सकते हैं। इसी कारण, तंत्रिका विज्ञानी ऐसी दवाओं का इस्तेमाल करने से मना करते है।

25 जनवरी, 2019 को JAMA में प्रकाशित एक लेख में, तंत्रिका विज्ञानी इन दवाओं से संबंधित जोखिमों और लागतों के बारे में 'ईमानदार वैज्ञानिक व्याख्या' प्रदान करने के लिए डॉक्टरों से अनुरोध करते हैं।

यूसीएसएफ मेमोरी एंड एजिंग सेंटर के निदेशक और ग्लोबल ब्रेन हेल्थ इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ लेखक ब्रूस मिलर ने कहा, "पागलपन के लिए सीमित उपचार और सूचना की व्यापक पहुंच के कारण स्यूडोमेडिसिन का उपयोग परेशानीदायक रूप से बढ़ रहा है।"

उन्होंने यह भी कहा, "जबकि अनैतिक कार्यप्रणाली स्यूडोमेडिसिन के उपयोग को बढ़ावा देती हैं, पड़े लिखे डॉक्टर और रोगी ऐसी प्रथाओं को ख़तम कर सकते हैं।

जोएना हेलमुथ, यूसीएसएफ मेमोरी एंड एजिंग सेंटर के एक तंत्रिका विज्ञानी और यूसीएसएफ वील इंस्टिट्यूट फॉर न्यूरोसाइंसेस के एक सदस्य ने कहा, "दिमागी सेहत के लिए बेची जाने वाली दवाएं असल में एक स्यूडोमेडिसिन चिकित्सा अभ्यास है जिसके बारे में रोगी अक्सर पूछते हैं।"

हेलमुथ ने यह भी टिप्पणी की, “हमने ज्ञान संबंधी कमी और मनोभ्रंश को उलटने के लिए व्यक्तिगत प्रक्रियाओं में भी वृद्धि देखी है। दुर्भाग्य से, इन व्यवधानों के लिए वर्तमान में ऐसे आंकड़े उपलब्ध नहीं है जो बता सके कि वे प्रभावी हैं।"

अभी तक कोई सिद्ध दवाएं उपलब्ध नहीं हैं जो अल्जाइमर रोग का इलाज कर सकती हैं, इसके बावजूद भी मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए अनुपूरक का वैश्विक बाजार फल-फूल रहा है। वैश्वीकरण के इस युग में, इन आहार अनुपूरकों का बाजार 2016 में $3.2 बिलियन (लगभग 22690 करोड़) कमाने में कामयाब रहा है। रिसर्च एंड मार्केट्स के अनुसार, 2024 तक इस राशि के $11.6 बिलियन (लगभग 83100 करोड़) तक पहुंचने की उम्मीद है।

अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र द्वारा दी गई रिपोर्टों के अनुसार, 2014 में लगभग 5 मिलियन (50 लाख) अमेरिकियों को अल्जाइमर रोग होने का अनुमान था । ये संख्या 2060 तक 14 मिलियन (1.4 करोड़) तक बढ़ने की संभावना है। अब तक वैज्ञानिक इस बीमारी को रोकने या उलटने का इलाज नहीं ढूंढ पाए हैं।

मरीज़ो की ‘मदद’ करने के लिए, कई मेडिकल कंपनियां स्यूडोमेडिसिन की खपत का समर्थन और प्रचार करती हैं। लेकिन ये दवाएं रक्तस्रावी स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती हैं, और अधिक मात्रा में इस खुराक का सेवन करने से मृत्यु का खतरा बाढ़ जाता है क्योंकि वे एफडीए द्वारा अनुमोदित नहीं हैं।

आने वाले समय में इस बीमारी से पीड़ित लोगों की जनसंख्या बढ़ने के खतरे के कारण, हमे ये समझना और भी जरूरी हो गया है कि इन दवाओं ने अभी तक अल्जाइमर को रोकने या ख़तम करने का कोई संकेत नहीं दिखाया है। इस तरह के झूठे विज्ञापन से कई रोगियों को बचाने के लिए अधिक चिकित्सा अनुसंधानों और लोगों में जागरूकता की आवश्यकता है।

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