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स्वस्थ लोगों की तुलना में अल्जाइमर रोगियों के नेत्रपटल में काफी अंतर देखा गया है।

नेत्र परीक्षा के माध्यम से अल्जाइमर रोग का पता लगाया जा सकता है

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नेत्र परीक्षा के माध्यम से अल्जाइमर रोग का पता लगाया जा सकता है
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ड्यूक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने खोज की है कि अल्ट्रासोनिक क्रमवीक्षण तकनीक का उपयोग करके वे आंखों की जांच के जरिए अल्जाइमर रोग और मस्तिष्क स्वास्थ्य के संकेतों की पहचान कर सकते हैं।

यह अध्ययन 11 मार्च, 2019 को ऑपथैल्मोलॉजी नेत्रपटल नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

अल्जाइमर रोग एक पुरानी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जो समय के साथ और भी गंभीर होती जाती है। इस बीमारी से याददाश्त में कमी और किसी व्यक्ति के सोचने की क्षमता प्रभावित होती है। बाजार में इसके लिए कोई सफल उपचार उपलब्ध नहीं है, न ही इसके शुरुआती निदान के लिए कोई उपकरण है।

शोधकर्ताओं की टीम ने तुलनात्मक अध्ययन किया, जिसमें उन्होंने अल्जाइमर रोगियों के नेत्रपटल की तुलना हल्के संज्ञानात्मक क्षीणता वाले रोगियों से की।

इस शोध के लिए, शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर के संकेत का पता लगाने के लिए ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी एंजियोग्राफी (OCTA) नामक एक गैर-आक्रमणशील तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह तकनीक प्रकाश तरंगों का उपयोग करती है जो नेत्रपटल की हर परत में रक्त प्रवाह का पता लगा सकती हैं।

ओसीटीए (OCTA) नेत्रपटल के बदलावों का पता लगा सकता है जो मस्तिष्क की गतिविधि में बाधाओं को इंगित करते हैं, जैसे कि नेत्रपटल की नसों की परतों का पतला होना।

यह शोध 200 से अधिक लोगों पर किया गया था। इनमें से 133 प्रतिभागी एक नियंत्रण समूह में थे, जिनका दिमाग स्वस्थ था। इस समूह में, यह देखा गया है कि सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं नेत्रपटल के अंदर आंख के पीछे एक घना जाल बनाती हैं। जबकि, 39 लोग जिन्हें अल्जाइमर रोग था, इस परिक्षण से पता चला की उनकी आँखों में बनने वाला जाल कम घना था और यहां तक ​​कि बिखरा हुआ था।

इसके परिणामस्वरूप, शोधकर्ताओं ने पाया है कि स्वस्थ लोगों की तुलना में अल्जाइमर रोगियों के नेत्रपटल में काफी अंतर देखा गया।

शोधकर्ता दिलराज एस ग्रेवाल, ड्यूक के एक नेत्र रोग विशेषज्ञ और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक ने कहा, "हम जानते हैं कि अल्जाइमर रोग वाले लोगों में मस्तिष्क में छोटी रक्त वाहिकाओं में परिवर्तन होते हैं, और क्योंकि नेत्रपटल मस्तिष्क का एक विस्तार है, हम यह जांचना चाहते थे कि क्या नई इस तकनीक जो कम आक्रामक हो और प्राप्त करने में आसान हो, उसका उपयोग करके नेत्रपटल में इन परिवर्तनों का पता लगाया जा सकता है।”

इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और एक ड्यूक नेत्र रोग विशेषज्ञ और नेत्रपटल के शल्य चिकित्सक, शेरोन फ़ेक्रैट ने कहा, "हम उन रक्त वाहिकाओं को माप रहे हैं जिन्हें एक नियमित नेत्र परीक्षण के दौरान नहीं देखा जा सकता है और हम ऐसा उस तकनीक का उपयोग करके कर रहे हैं जो कि कम आक्रमण है और जो कुछ मिनटों में ही नेत्रपटल में मौजूद छोटी रक्त वाहिकाओं की उच्च संकल्प वाली तस्वीर ले सकती है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह संभव है कि नेत्रपटल में रक्त वाहिनियों के घनत्व में बदलाव से हमें यह पता चल जाए कि दिमाग की छोटी वाहिनियों में क्या चल रहा है, इससे पहले की हम दिमाग में होने वाले बदलावों का पता लगा पाएं।”

अल्जाइमर रोग मनोभ्रंश का सबसे आम प्रकार है। मनोभ्रंश रोग के कुल मामलों में से 60-70% अल्जाइमर रोग के पाए जाते हैं। दुनिया भर में 50 मिलियन लोग (5 करोड़) मनोभ्रंश से पीड़ित हैं। हर साल दुनिया भर में इस बीमारी के 10 मिलियन (10 करोड़) नए मामले दर्ज किए जाते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, ओसीटीए (OCTA) स्कैन तकनीक से हम सबसे छोटी केशिकाओं का निदान कर सकते हैं, जो हमारे बालों के आधे से भी कम चौड़ी होती हैं। यह तकनीक एमआरआई या सेरेब्रल एंजियोग्राम से बेहतर है जो केवल बड़ी रक्त वाहिकाओं का निदान कर सकती है। ये तकनीक आक्रामक और अध्ययन करने के लिए महंगी होती हैं।

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