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अमेरिकी मिडवेस्ट जम रहा है जबकि ऑस्ट्रेलिया तप रहा है।

मौसम में चरम बदलावों का युग

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मौसम में चरम बदलावों का युग
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इस साल हम पूरी दुनिया में मौसम की चरम स्थिति का सामना कर रहे हैं। कुछ देशों में बर्फ के रूप में ठंड पढ़ रही है और, कुछ देश आग की तरह जल रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया इस बात रिकॉर्ड तोड़ रहा है और अत्यधिक गर्मी का सामना कर रहा है। दक्षिण ऑस्ट्रेलिया की स्टेट एमर्जेन्सी सर्विस ने घोषणा की कि गर्मी की लहरें लोगों के लिए खतरा है। देश की झाड़ीयों में आग लगने से धुआं बढ़ रहा है और तस्मानिया के लोगों और जानवरों को प्रभावित कर रहा है।

इतनी गर्मी में ऐसी (AC) के बढ़ते उपयोग के कारण बिजली पर काफी भार पड़ा जिसके कारण ऑस्ट्रेलियन एनर्जी मार्केट ऑपरेटर ने बिजली काट दी जिस के कारण 60,000 लोग प्रभावित हुए। बिजली बचाने के लिए ट्राम रद्द कर दिए गए। दक्षिण में तापमान 40 डिग्री से ऊपर गया।

इसके विपरीत, शिकागो ने इतिहास के सबसे ठंडे दिनों में से एक का सामना किया। आर्कटिक से सीधे आने वाली ध्रुवीय हवाओं के साथ, शहर और विश्वविद्यालय पूरे क्षेत्र में बंद कर दिए गए हैं। शिकागो डिपार्टमेंट ऑफ़ फ़ैमिली और सपोर्ट सर्विसेज (DFSS) ने ठण्ड से बचने के लिए वार्मिंग केंद्र खोले हैं।

अधिकारी लोगों को फ्रॉस्टबाइट के जोखिम के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। फ्रॉस्टबाइट त्वचा को ठंडा, सुन्न और पीला बना देता है। फ्रॉस्टबाइट के कारण हमारे ऊतक जम जाते हैं।

हर साल विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) एक 'स्टेटमेंट ऑन द स्टेट ऑफ़ द ग्लोबल क्लाइमेट' जारी की है जिसमें विश्व के मौसम और बदलते जलवायु की जानकारी होती है।

स्टेटमेंट ऑफ़ द ग्लोबल क्लाइमेट 2018 की रिपोर्ट के अनुसार 2018 चौथा सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसें बढ़ रही हैं जिसके कारण जलवायु परिवर्तन हो रहा है। ग्रीनहाउस गैसों से उत्पन्न होने वाली 90% से अधिक ऊर्जा सागर में जा रही है। इसके परिणाम से समुद्र के स्तर में वृद्धि हो रही है।

इसके अतिरिक्त, अंटार्टिका और ग्रीनलैंड में भी सोच से बहुत अधिक दर से ग्लेशियर पिघल रहे हैं।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के महासचिव पेटरी टालस ने कहा, "ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता एक बार फिर से रिकॉर्ड बनाने के स्तर पर है और यदि यह जारी रहती है तो हम देख सकते हैं कि सदी के अंत तक तापमान 3-5 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाएगा। यदि हम सभी जीवाश्म ईंधन संसाधनों का पूर्ण उपयोग करते हैं, तो तापमान में वृद्धि काफी अधिक होगी।”

टालस ने यह भी कहा कि "यह एक बार फिर से दोहराने वाली बात है कि हम जलवायु परिवर्तन को पूरी तरह से समझने वाली पहली पीढ़ी हैं और हम आखिरी पीढ़ी है जो इसके बारे में कुछ कर सकती है।"

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के उप महासचिव एलेना मेनेयनकोवा ने कहा, "गर्मी की डिग्री का हर अंश मानव स्वास्थ्य, भोजन और ताजे पानी की आपूर्ति, जानवरों और पौधों के विलुप्त होने, प्रवाल भित्तियों और समुद्री जीवन के अस्तित्व को प्रभावित करता है।”

मेनेयनकोवा ने यह भी कहा, “यह आर्थिक उत्पादकता, खाने की सुरक्षा और हमारे बुनियादी ढांचे और शहरों के लचीलेपन में बदलाव लाता है। यह ग्लेशियर के पिघलने की गति और पानी की आपूर्ति और निचले द्वीपों और तटीय समुदायों के भविष्य को भी प्रभावित करता है। हर अतिरिक्त चीज़ मायने रखती है।"

ऑस्ट्रेलिया पिछले साल से सूखे का सामना कर रहा है। दिसंबर के महीने में देश के कई हिस्सों में बारिश कम पड़ी। कम नमी के कारण वर्ष गर्म रहा, जिसके परिणामस्वरूप कम बारिश हुई।

ऑस्ट्रेलिया की गर्मी लोगों पर भारी पड़ रही है। जबकि शिकागो में लोग अत्यधिक सर्दियां सेहन कर रहे हैं। अत्यधिक गर्मी और ठंड के कारण कई लोग प्रभावित रहे हैं, इसलिए इन परिवर्तनों को नियंत्रित करने और बदलते मौसम को कम करने की तत्काल आवश्यकता है।

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