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अंटार्कटिका की बर्फ की चादरें 80 के दशक की तुलना में 6 गुना तेजी से पिघल रही हैं।

अंटार्कटिका की पिघलती हुई बर्फ की चादरों के कारण समुद्र के स्तर बढ़ने का खतरा

लेखक हर्षिता  •  
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अंटार्कटिका की पिघलती हुई बर्फ की चादरों के कारण समुद्र के स्तर बढ़ने का खतरा
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अंटार्कटिका की बर्फ की चादरें इतनी तेजी से पिघल रही हैं जिसकी हम कभी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। इसके कारण समुद्र के स्तर बढ़ रहे हैं और पर्यावरण संबंधी समस्याएं हो रही हैं।

अंटार्कटिका पृथ्वी पर सबसे बड़ी बर्फ की चादरों का घर है जिसमे दो प्रकार की बर्फ की चादरें हैं। पश्चिम अंटार्कटिक आइस शीट, जो की समुद्र से नीचे एक तल पर आधारित है। दूसरी है पूर्वी अंटार्कटिक आइस शीट, जो की समुद्र तल से ऊपर है।

पूर्वी आइस शीट में पश्चिम आइस शीट की तुलना में 10 गुना अधिक बर्फ है। दोनों बर्फ की चादरें बहुत तेज गति से पिघल रही हैं, जिससे कई पर्यावरण संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके कारण वैज्ञानिकों का ध्यान ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर खिंच रहा है।

समुद्र तल के ऊपर स्थित पूर्वी आइस शीट पश्चिमी आइस शीट की तुलना में सुरक्षित है। ऐसा इसलिए है क्योंकि समुद्र का गर्म पानी पश्चिमी आइस शीट को नीचे से धोता है और इसलिए यह चादर नीचे से पिघलती रहती है।

आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की गई है कि बर्फ की चादरों के पिघलने के कारण समुद्र का स्तर काफी तेज़ी से बढ़ रहा है।

"प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज" पत्रिका में सोमवार को प्रकाशित एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने बताया कि यह बर्फ से ढका महाद्वीप 80 के दशक की तुलना में 6 गुना तेजी से पिघल रहा है।

अंटार्कटिका ने 2009 से 2017 के बीच बर्फ की बहुत बड़ी मात्रा खोई है। ग्रीनलैंड पर ग्लेशियरों का पिघलना और पृथ्वी के पहाड़ों से लुप्त होना भी पर्यावरणीय विनाश का कारण है।

"हमने हाल ही में पूर्वी अंटार्कटिका में बर्फ के पिघलने की कुछ अन्य खबरों को देखा है, और पहली बार हम उन कुछ नंबरों को देख रहे हैं जो एक पूर्ण बर्फ शीट विश्लेषण में शामिल हैं," यूएस नेशनल स्नो और आइस डेटा सेंटर की शोधकर्ता ट्विला मून ने कहा।

“अब इस और कुछ अन्य अध्ययनों ने अंटार्कटिका में बर्फ पिघलने की एक अविश्वसनीय गति दिखाई है। हमें यह ध्यान में रखने की आवश्यकता है कि अंटार्कटिका का समुद्र के स्तर में वृद्धि के लिए एक बहुत बड़ा योगदान होगा।", जेसिका चेरी, अमेरिका के नेशनल ओशियनिक महासागरीय एन्ड एटमोस्फरिक एडमिनिस्ट्रेशन की एक अलास्का आधारित जलविज्ञानी ने कहा।

अंटार्कटिक की बर्फ की चादर पृथ्वी के दो ध्रुवीय बर्फ के टुकड़ों में से एक है। इसमें पूरे अंटार्कटिक महाद्वीप का लगभग 98% भाग शामिल है। पृथ्वी के सारे ताजे पानी का लगभग 6% अंटार्कटिक बर्फ की चादर में है। यह संख्या समुद्र के स्तर में लगभग 58 मीटर की वृद्धि के बराबर है।

पिछले अध्ययनों के अनुसार, समुद्र के स्तर में यह वृद्धि लंबे समय से हो रही है लेकिन पहले यह सांख्यिकीय महत्व का नहीं था। इस हालिया वृद्धि के पीछे का कारण महासागर पर जलवायु का प्रभाव और ओजोन छिद्र का वायुमंडलीय परिसंचरण हो सकता है।

यह बर्फ लंबे समय से लगातार पिघल रही है और वैज्ञानिक अभी यह पता नहीं कर पा रहे हैं कि यह इसका पिघलना कब रुकेगा। बल्कि अध्ययनों से पता चलता है कि पिघलने की संभावना केवल आने वाले भविष्य में बढ़ ही सकती है, जिससे पृथ्वी ग्रह पर कई गहरे प्रभाव पड़ सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने एक बार घोषणा की थी कि ये बर्फ की चादरें कभी भी पिघल नहीं सकती, लेकिन अब यही चादरें पिघल कर समुद्र में पर्याप्त बर्फ छोड़ रही हैं। इस पिघलने का मतलब यह है कि सदी के अंत तक समुद्र के स्तर में दो से तीन फीट की वृद्धि हो सकती है। इसलिए, इस स्थिति को जल्द ही नियंत्रित करने की आवश्यकता है।

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