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ये कृत्रिम रक्त वाहिकाएं हमारे शरीर में पाई जाने वाली वाहिकाओं की तरह दिखती और व्यवहार करती हैं।

कृत्रिम मानव रक्त वाहिकाओं को अब एक प्रयोगशाला में बनाया जा सकता है

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कृत्रिम मानव रक्त वाहिकाओं को अब एक प्रयोगशाला में बनाया जा सकता है
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वैज्ञानिकों ने पहली बार पेट्री डिश में ऑर्गनॉयड के रूप में मानव रक्त वाहिका को विकसित करने का एक नया तरीका खोज निकाला है।

ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने वाहिकाओं संबंधी रोगों में वृद्धि के कारण एक शोध किया। वाहिकाओं संबंधी रोगों में अल्जाइमर रोग, हृदय रोग, घाव भरने की समस्याएं, स्ट्रोक, कैंसर और, मधुमेह शामिल हैं।

अध्ययन के परिणाम 16 जनवरी, 2019 को नेचर जर्नल में प्रकाशित किए गए थे।

इस शोध के अनुसार, वैज्ञानिक प्लूरिपोटेंट मूल कोशिकाओं की मदद से स्व-संगठित तीन आयामी मानव रक्त वाहिका को विकसित कर सकते हैं। इस कृत्रिम संरचना को ऑर्गनोइड के नाम से जाना जाता है।

ऑर्गेनोइड एक तीन आयामी संरचना है जो स्टेम सेल से प्राप्त होती है। यह एक अंग की तरह काम करता है। पेट्री डिश में कई मानव अंगों के पहलुओं का अध्ययन करने के लिए यह संरचना बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।

इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और युबीसी (UBC) में लाइफ साइंसेज इंस्टीट्यूट के निदेशक, जोसेफ पेनिंगर ने कहा, "मानव रक्त वाहिकाओं को स्टेम सेल से ऑर्गेनोइड के रूप में बना पाने में सक्षम होना खेल में बदलाव की तरह है।"

पेनिंगर ने आगे कहा कि, "हमारे शरीर में हर एक अंग रक्‍तवाही प्रणाली से जुड़ा हुआ है। यह संभावित रूप से शोधकर्ताओं के लिए विभिन्न वाहिकाओं संबंधी रोगों के कारणों और उपचार को उजागर करने में मददगार हो सकता है।"

इस अध्ययन के एक अन्य लेखक और आईएमबीए (IMBA) में एक पोस्टडॉक्टरल रिसर्च फेलो, रेनर विमर ने कहा, "हमारे ऑर्गेनोइड मानव केशिकाओं से काफी हद तक एक आणविक स्तर पर भी मिलते हैं, और अब हम उनका मानव ऊतक पर सीधे रक्त वाहिका का अध्ययन करने के लिए उपयोग कर सकते हैं। "

एक विश्लेषण के अनुसार, दुनिया भर में 420 मिलियन (42 करोड़ ) लोग मधुमेह से प्रभावित हैं। मधुमेह के प्रमुख लक्षण रक्त वाहिकाओं में परिवर्तन के कारण उत्पन्न होते हैं। इससे रक्त परिसंचरण में कमज़ोरी या ऊतकों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।

इस नए ऑर्गनोइड के प्रतिरूप के विकास के साथ, वाहिकाओं संबंधी उत्पन्न होने वाले परिवर्तनों को संभाला जा सकता है।

इसके अलावा, मधुमेह में झिल्ली की निचली परत अनियमित रूप से मोटी होने लगती है। इससे ऊतकों को आवश्यक पोषक तत्व पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। यह कई स्वास्थ्य हानियों का कारण भी बनता है जैसे कि स्ट्रोक, गुर्दे की विफलता, अंधापन या दिल के दौरे।

ऑर्गनोइड की कोशिकाएं अन्य कोशिकाओं को बनाने के लिए अनिश्चित काल तक विभाजित हो सकती हैं। वैज्ञानिकों ने अब स्टेम कोशिकाओं के आनुवंशिक निर्देशों का पालन करने के लिए सही वातावरण को विकसित करना सीख लिया है। वे ऑर्गनोइड के छोटे अंगों की संरचना कर सकते हैं जो लघु अंगों की तरह दिखाई देते हैं।

अध्ययन करते समय, शोधकर्ताओं ने ऑर्गेनोइड को चूहों में स्थानांतरित किया। यह करने पर ऑर्गनोइड कार्यात्मक मानव रक्त वाहिकाओं में विकसित हो गया। इसमें धमनियां और कोशिकाएं भी थीं।

एक पेट्री डिश पर, शोधकर्ताओं ने एक "मधुमेह" वातावरण बनाया और उसमें रक्त वाहिका ऑर्गेनोइड को रखा। यह करने पर संवहनी अंग में झिल्ली का बड़े पैमाने पर विकास हुआ जो मधुमेह के रोगियों में समान रूप से पाया जाता है।

अभी तक वैज्ञानिक रक्त वाहिकाओं में सूजन को रोकने के लिए किसी भी रासायनिक समास या मधुमेह विरोधी दवाओं को खोजने में विफल रहे हैं। हालांकि, इस दौरान शरीर में γ-सेक्रेटेस नामक एक अवरोधक पाया गया था।

γ-सेक्रेटेस एक प्रकार का किण्वक है। इससे रक्त वाहिका की दीवारें सख्त नहीं हो पाती जो मधुमेह के रोगियों के इलाज के लिए उपयोगी हो सकती हैं।

रक्त वाहिकाओं में परिवर्तन को रोकने के लिए यह तकनीक एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। आखिरकार, इसके परिणामस्वरूप मृत्यु दर में कमी हो सकती है क्योंकि वाहिकाओं सम्बन्धी रोगों के कारण अधिकांश मौतें दर्ज की जा रही हैं

यह अनुसंधान अन्य प्रजातियों में भी कार्यात्मक मानव वाहिका प्रणाली को बढ़ाने का एक रास्ता है। इस तरह के अध्ययन से रोगियों के लिए नए परीक्षण और उपचार विकसित होंगे।

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