Clicky

Pharmacy Website
Clinic Website
TabletWise.com TabletWise.com
 
नई कृत्रिम त्वचा जले हुए रोगियों को "अनुभूति" करने में मदद कर सकती है।

बनाई गई कृत्रिम त्वचा अतिमानवीय अनुभूति प्रदान कर सकती है

लेखक   •  
शेयर
बनाई गई कृत्रिम त्वचा अतिमानवीय अनुभूति प्रदान कर सकती है
Read in English

वैज्ञानिकों ने एक संवेदक विकसित किया है जो कृत्रिम त्वचा द्वारा जले हुए मरीज़ो की मदद कर सकता है। यह अध्ययन 28 जनवरी 2019 को एडवांस्ड मैटेरियल्स में प्रकाशित हुआ था।

इस कृत्रिम त्वचा को बनाने का विचार यह है कि जले हुए मरीज़ो को गर्मी, ठंड, दबाव और कंपन महसूस करने में मदद मिले। ये सभी एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कार्य है जिसका लोग महत्व नहीं समझते।

जले हुए मरीज़ जिनकी त्वचा की संवेदनशीलता खत्म हो जाती है या कृत्रिम अंगों वाले लोग इन कार्यों का लाभ नहीं उठा पाते। जिस वजह से, वे खुद को अनजाने में चोट पहुंचा लेते हैं।

इस नए संवेदक को टोरंटो विश्वविद्यालय के इंजीनियर अब्दलसलाम अहमद, कनेक्टिकट विश्वविद्यालय (यूकोन) के कैमिस्ट इस्लाम मोसा और यूकोन और यूकोन हेल्थ के जेम्स रुसलिंग ने विकसित किया है। वे एक ऐसा संवेदक विकसित करना चाहते थे, जो त्वचा की संवेदन वाली विशेषताओं का अभिनय कर सके।

मोसा और उनकी टीम ने यह संवेदक एक सिलिकॉन ट्यूब से बनाया है। यह ट्यूब तांबे की तार से लिपटी हुई होती है और लोहे की ऑक्साइड के नैनोकणों से बने द्रव से भरी होती है। ये छोटे कण सिलिकॉन ट्यूब के अंदर रगड़ने वाली गतिविधि करके एक विद्युत प्रवाह उत्पन्न करते हैं।

यह विद्युत प्रवाह संकेत के रूप में तांबे की तार द्वारा उठाई जाती है। जब यह ट्यूब एक झटके के द्वारा दबाव का अनुभव करती है, तो नैनोकण चलते हैं और विद्युत संकेत बदल जाता है।

ध्वनि तरंगें और चुंबकीय क्षेत्र इन संकेतों को बदलने की क्षमता रखते हैं। साथ ही, किसी व्यक्ति की गतिविधि भी इन संकेतों को बदल सकती है। इस प्रकार किसी व्यक्ति के चलने,दौड़ने, तैरने या कूदने पर उत्पन्न होने वाले विद्युत संकेतों में अंतर आता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह धातु की त्वचा न केवल जले हुए मरीज़ो को महसूस करने में मदद कर सकती है बल्कि कर्मचारियों को खतरनाक चुंबकीय क्षेत्रों के संपर्क में आने से भी बचा सकती है। रबर की बाहरी परत जलरोधी भी है।

इस्लाम मोसा ने कहा, "यह बहुत अच्छा होगा अगर इसमें वह विशेषताएं हों जो मानव त्वचा में भी नहीं होती; जैसे कि चुंबकीय क्षेत्र, ध्वनि तरंगों और असामान्य व्यवहारों का पता लगाने की क्षमता।"

मोसा ने यह भी कहा, "इस संवेदक को बनाने की प्रेरणा यह थी कि कुछ ऐसा बनाएं जो स्थिर हो, लंबे समय तक चले और कई खतरों का पता लगा सके।"

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार हर साल लगभग 1,80,000 लोग गंभीर रूप से जलने के कारण मर जाते हैं।

जलना एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है। 2004 में, 11 मिलियन (लगभग 1.1 करोड़) लोग दुनिया भर में गंभीर रूप से आग से झुलस गए थे।

ऐसा कहा जाता है कि असुरक्षित रसोइयों के पास या खुली आग में खाना पकाने वाले लोग जलने की परिस्थितियों में होते हैं। इसके अलावा, खतरनाक जगहों पर काम करने वाले कर्मचारी भी इस परिस्थिति का सामना करते हैं।

वैज्ञानिक जल्द ही गर्मी और ठंड का पता लगाने के लिए इस संवेदक का परीक्षण करेंगे। वैज्ञानिक इस संवेदक को एक चपटे आकार में बनाने की भी कोशिश कर रहे हैं जो मानवीय त्वचा की तरह होगी।

ये नए कृत्रिम त्वचा संवेदक जल्द ही चिकित्सा पहलू को बदल सकते हैं और जले हुए मरीज़ों को एक उम्मीद दे सकते हैं।

ताज़ा खबर

TabletWise.com