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सुपरवीड्स वह अवांछित पौधे होते हैं जो खेतों में अपने आप ही पैदा होते हैं।

ऑस्ट्रेलिया से 'सुपरवीड्स' को संभालने के तरीकों की खोज की सम्भावना

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ऑस्ट्रेलिया से 'सुपरवीड्स' को संभालने के तरीकों की खोज की सम्भावना
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ऑस्ट्रेलिया अपने खेतों में अवांछित शाकनाशी-प्रतिरोधी 'सुपरवीड्स ’के विकास को रोकने के लिए एक रास्ता खोजने की कोशिश कर रहा है।

सुपरवीड्स वह अवांछित पौधे होते हैं जो खेतों में अपने आप ही पैदा होते हैं। इन खरपतवार को शक्तिशाली शाकनाशी-प्रतिरोधक द्वारा भी मिटाया नहीं जा सकता और इन्हें मिटाना लगभग असंभव है।

ऑस्ट्रेलिया के खेतों में इन खरपतवारों की जबरदस्त वृद्धि के कारण, वहां के किसान कठोर हो रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप, उनके लिए इसके प्रबंधन के नए तरीके खोजना मज़बूरी बन गया है।

बायर के अनुसार, बढ़े हुए प्रबंधन और उपज की हानि के कारण किसान प्रति एकड़ लगभग 27 प्रतिशत अधिक भुगतान कर रहे हैं।

आज तक लगभग 255 विभिन्न खरपतवार खोजे गए हैं और यह पाया गया हैं की ये 165 अलग-अलग शाकनाशीयों में से कम से कम किसी एक का प्रतिरोध तो करते ही हैं। लेकिन अभी भी 43 प्रकार के खरपतवार ऐसे हैं जिन्होंने ग्लाइफोसेट के प्रति प्रतिरोध दिखाया है। ग्लाइफोसेट मुख्य और व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला खरपतवार नाशक है।

इंटरनेशनल सर्वे ऑफ़ हर्बिसाइड रेसिस्टेंट वीड्स के अनुसार यूएस में ग्लाइफोसेट-प्रतिरोधी खरपतवारों की संख्या 17 है। इनमें से, सबसे खतरनाक 'पामर अमरनाथ' है।

पामर अमरनाथ के एक पौधे में 1,00,000 से अधिक बीजों के उत्पादन की क्षमता होती है। साथ ही इन खरपतवारों में मनुष्यों से भी लंबे होने की क्षमता होती है। ऑस्ट्रेलिया के खेत इस तरह के खरपतवारों से नष्ट हो रहे हैं।

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और ऑस्ट्रेलिया जाने वाले वीड एक्सटेंशन विशेषज्ञ क्रिस्टी स्प्रैग ने कहा, "यह उस बिंदु पर पहुंच रहा है जहां अगर किसान प्रतिरोध का सामना नहीं करते हैं, तो उन्हें बड़ा नुकसान होगा।"

आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी के खरपतवार वैज्ञानिक, बॉब हर्ट्जलर ने कहा, "खरपतवारों को ज़िंदा रखने के लिए जैसे तरीके हमारे पास यहां लोवा में है आप उससे अधिक बेहतर तरीके नहीं बना सकते हैं, जिधर हम मकई और सोयाबीन उगाते हैं।"

उन्होंने यह भी कहा, "केवल एक चीज जो निरंतर है, और वह शाकनाशी है, और अब हमने (अनजाने में) कुछ ऐसे खरपतवारों चुन लिए हैं जो नई शाकनाशीयों के प्रतिरोध को बढ़ावा देते हैं।"

ऑस्ट्रेलिया के एक किसान, सीमन्स के अनुसार, खरपतवारों के खिलाफ लड़ने की अधिकांश जिम्मेदारी किसानों को लेनी चाहिए और उन्हें इस काम के लिए उद्योगों पर पूरी तरह से निर्भर नहीं होना चाहिए।

पिछले 30 वर्षों में, जब भी खरपतवारों की ऐसी समस्या उत्पन्न हुई, उद्योग ने हमेशा एक नया रासायनिक समाधान खोजा है। लेकिन यह शोध कुछ वर्षों से बहुत धीमा या शून्य हो गया है। इसलिए, इन खरपतवारों से लड़ने की आवश्यकता अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

इन भव्य खरपतवारों से लड़ने के लिए अभी तक कोई विशिष्ट विधि ढूंढी नहीं गई है। लेकिन किसान शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर ऑस्ट्रेलिया के खेतों की इन खरपतवारों से प्रतिरक्षा करने का एक निश्चित तरीका खोजने पर काम कर रहे हैं।

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