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पात्रे निषेचन (आईवीएफ) में मानव शरीर के बाहर एक ग्लास में शुक्राणु के साथ एक अंडे का संयोजन किया जाता है।

आईवीएफ से पैदा होने वाले बच्चों में जन्म के वजन में वृद्धि

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आईवीएफ से पैदा होने वाले बच्चों में जन्म के वजन में वृद्धि
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एक नए अध्ययन से पता चलता है कि मैनचेस्टर के सेंट मैरी अस्पताल में पात्रे निषेचन (आईवीएफ) द्वारा पैदा होने वाले बच्चों का जन्म के समय का वजन पिछले 25 वर्षों में 200 ग्राम से अधिक हो गया है। यह अध्ययन मैनचेस्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया था।

यह अध्ययन 14 मार्च 2019 को ह्यूमन रिप्रोडक्शन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। यह अध्ययन पहले और अब की आईवीएफ तकनीक के परिणामों में बड़े बदलावों पर प्रकाश डालता है।

इस पात्रे निषेचन (आईवीएफ) में मानव शरीर के बाहर एक ग्लास में शुक्राणु के साथ एक अंडे का संयोजन किया जाता है। इससे विकसित भ्रूण को गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। आईवीएफ लाखों निःसंतान माता-पिता को बच्चा पैदा करने में मदद करता है।

इस नए अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने सेंट मैरी अस्पताल मैनचेस्टर में पिछले 3000 जीवित जन्मों का अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि आईवीएफ उपचार की सफलता के साथ-साथ सन 1991 से लेकर 2015 तक बच्चों के जन्म के समय के वजन में औसत 180 किलोग्राम की वृद्धि हुई है।

पुराने अध्ययनों के अनुसार, शुरुआती 20 या 30 वर्षों में आईवीएफ उपचार से जन्म लेने वाले बच्चों के जन्म के समय वजन कम होता था। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि बिना आईवीएफ के पैदा होने वाले बच्चों को बाद में वयस्कता में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

पुराने अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि आईवीएफ उपचार के माध्यम से कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चे एक दम से विकास पकड़ते है। इसकी वजह से अधिक स्वास्थ्य संबधी समस्याएं हो सकती हैं। एक वैज्ञानिक के अनुसार, जमाकर रखे हुए भ्रूण के परिणामस्वरूप शिशुओं का सामान्य जन्म होता है और उनकी शुरुआती वृद्धि हो सकती है।

अध्ययन के प्रमुख लेखक प्रोफेसर डैनियल ब्रिसन ने कहा, “हालांकि अभी यह कहना बहुत जल्दी होगा कि आईवीएफ से पैदा होने वाले बच्चों पर कोई दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव पड़ेगा, ऐसे प्रभाव, किसी भी मामले में, छोटे होंगे। लेकिन हमें लगता है कि सभी आईवीएफ वाले बच्चों के स्वास्थ्य की निगरानी करना और उपचार को जितना संभव हो सके उतना सुरक्षित बनाने के लिए आईवीएफ प्रथाओं को बदलना महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, उन्होंने कहा, "हमारे शोध से यह पता चलता है कि आईवीएफ वाले बच्चों की नवीनतम पीढ़ी कम जोखिम में हो सकती है। हमारा मानना ​​है कि ऐसा होने की संभावना इसलिए है क्योंकि पिछले 25 वर्षों में आईवीएफ तकनीकों में स्पष्ट रूप से बदलाव हुए हैं - हालांकि यह इंगित करना कठिन है कि कौन से बदलाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं।”

अब आईवीएफ उपचार में ताजा भ्रूण को गर्भाशय में डाला जाता है। शोधकर्ता वर्तमान में इस कारण का पता लगाने में असमर्थ हैं कि आईवीएफ से पैदा होने वाले बच्चों में अब जन्म के समय का वजन कैसे बढ़ गया है और वे इसका उत्तर खोजने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, वे सुझाव देते हैं कि यह वृद्धि क्रमिक है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, वर्षों में वैज्ञानिक तकनीक में बहुत बदलाव आया है, जिसके परिणामस्वरूप इस उपचार को अधिक सफलता मिली है। हालाँकि, जन्म के समय के वजन में इन उतार-चढ़ावों के कारण का पता लगाने के लिए बहुत अधिक शोध की आवश्यकता है।

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