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नमि प्रदान करने वाली क्रीम के साथ त्वचा की उचित देखभाल से शोथ का स्तर कम होता है और उम्र से संबंधित बीमारियों की रोकथाम होती है।

त्वचा की देखभाल कर सकती है उम्र-संबंधी जीर्ण शोथ को खत्म

लेखक सोनम  •  
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त्वचा की देखभाल कर सकती है उम्र-संबंधी जीर्ण शोथ को खत्म
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कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय सैन फ्रांसिस्को द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि नमी प्रदान करने वाली क्रीम की मदद से अपनी त्वचा की उचित देखभाल करने से आप उम्र से संबंधित बीमारियों की रोकथाम कर सकते हैं।

यह अध्ययन 5 मार्च 2019 को जर्नल ऑफ यूरोपियन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी एंड वेनेरोलॉजी नामक प्रत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

मानव शरीर में 'त्वचा' सबसे बड़ा अंग होती है। उम्र बढ़ने के साथ, लोग एक निम्न स्तर के शोथ का अनुभव करते हैं जो रक्त में अणुओं की वृद्धि से होता है। वृद्ध लोगों में, यह निम्न-स्तर का शोथ कुछ गंभीर जीर्ण बीमारियों जैसे कि हृदय रोग, मधुमेह और अल्जाइमर रोग से जुड़ी होता है।

पहले माना जाता था कि यह शोथ प्रतिरक्षा प्रणाली या यकृत से उत्पन्न हुआ था। हालांकि यह अध्ययन कुछ और दर्शाता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि शोथ एक ऐसे स्रोत से शुरू होना चाहिए जो बहुत बड़ा हो और जो पूरे शरीर को प्रभावित कर सके।

इस कारण से, वैज्ञानिकों का कहना है कि त्वचा बड़े पैमाने पर शोथ पैदा करने के लिए एक उपयुक्त स्रोत है जो पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है। बुढ़ापे के साथ, लोगों में त्वचा संबंधी बीमारी के लक्षण उत्पन्न होते हैं। इन लक्षणों में सूखापन, खुजली और अम्लता में परिवर्तन शामिल हैं।

जब एक व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, तो इस बात की संभावना होती है कि उसकी त्वचा में बहुत निम्न स्तर का शोथ है। निम्न शोथ के साथ, साइटोकिन के स्तर के संचलन में वृद्धि होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, त्वचा इस प्रक्रिया को बढ़ावा देती है क्योंकि यह एक बड़ा अंग है।

50 उम्र के आसपास, हमारी त्वचा का क्षय होना शुरू हो जाता है। इस वजह से जलयोजन, पारगम्यता अवरोध और एपिडर्मल पीएच में बदलाव होता है। ये पानी और अन्य संभावित रोगजनकों और जीवाणुओं को बाहर रखता है।

पारगम्यता अवरोध में नमी की कमी के कारण त्वचा से शोथ संबंधी साइटोकिन जारी होते हैं। उम्र बढ़ने के दौरान, इस त्वचा की बाधा को आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता जिसके परिणामस्वरूप शोथ संबंधी संकेत निकलने जारी रहते हैं।

थियोडोरा मौरो, अध्ययन के प्रमुख लेखक ने कहा, "पहले, वैज्ञानिक समुदाय का मानना नहीं था कि त्वचा प्रणालीगत शोथ और बीमारी में योगदान कर सकती है। लेकिन पिछले पांच वर्षों में, सोरायसिस और डर्मेटाइटिस के अध्ययन से पता चला है कि इन रोगों के कारण हुए त्वचा के शोथ से हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।”

अध्ययन में 58 और 95 वर्ष की आयु के बीच के 33 वयस्क शामिल थे। इन लोगों को एक महीने के लिए दिन में दो बार अपने शरीर पर क्रीम लगाने के लिए कहा गया था। एक महीने के बाद, वैज्ञानिकों ने तीन साइटोकिन के रक्त स्तर को मापा।

वैज्ञानिकों ने क्रीम के उपयोग से पहले और बाद में साइटोकिन की तुलना की। क्रीम का उपयोग करके साइटोकिन के निम्न स्तर देखे गए जो 30 की उम्र के लोगों के बराबर थे। ये परिणाम बताते हैं कि त्वचा की देखभाल करने से "उम्र-संबंधी जीर्ण शोथ" की रोकथाम की जा सकती है।

वैज्ञानिकों ने यह भी देखा कि क्रीम ने त्वचा के जलयोजन में सुधार किया, पारगम्यता अवरोध की देखभाल की और पीएच को भी कम किया। इन परिणामों से संकेत मिलता है कि एक नमी प्रदान करने वाली क्रीम के साथ त्वचा की ठीक से देखभाल करके, शोथ के स्तर को कम किया जा सकता है और उम्र से संबंधित बीमारियों को भी रोका जा सकता है।

थियोडोरा मौरो ने यह भी कहा, "त्वचा की उम्र का बढ़ना सोरायसिस या डर्मेटाइटिस की तुलना में बहुत अधिक सामान्य है, इसलिए लोगों को त्वचा की उम्र बढ़ने से होने वाला जोखिम त्वचा रोगों से कई गुना अधिक होता है। उम्र बढ़ने से देखी जाने वाली त्वचा की शिथिलता का इलाज करके शोथ को कम करना स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

वैज्ञानिकों का अगला कदम एक अधिक लंबा और बड़ा अध्ययन करने का होगा जिसमें यह जांच की जाएगी कि क्या क्रीम के साथ साइटोकिन के स्तर को कम करके उम्र से संबंधित शोथ रोगों की रोकथाम की जा सकती है।

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