Pharmacy Website
Clinic Website
TabletWise.com TabletWise.com
 
पिछले कुछ दशकों में पुरुषों और कुत्तों की प्रजनन क्षमता और शुक्राणु की गुणवत्ता में कमी देखी गई है।

घर में रसायन बना सकते हैं पुरुषों और कुत्तों को नपुंसक

लेखक   •  
शेयर
घर में रसायन बना सकते हैं पुरुषों और कुत्तों को नपुंसक
Read in English

नॉटिंघम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा प्रकाशित किए गए एक नए अध्ययन के अनुसार, घर पर रसायनों और पर्यावरण प्रदूषकों की वजह से पुरुषों और पालतू कुत्तों की प्रजनन क्षमता कम हो जाती है।

यह नया अध्ययन 4 मार्च, 2019 को सइंटिफ़िक रिपोर्ट्स में प्रकाशित किया गया है।

पिछले कुछ दशकों से, दुनिया भर के शोधकर्ताओं द्वारा पुरुषों में प्रजनन क्षमता और शुक्राणओं की गुणवत्ता में कमी देखी गई है। घरेलू कुत्तों की शुक्राणु की गुणवत्ता में भी 30 प्रतिशत से अधिक की कमी बताई गयी है। इन सभी घटनाओं के कारण शोधकर्ताओं में चिंता की स्थिति थी और उन्होंने घर पर ही मौजूद इसके संभावित कारणों की तलाश शुरू कर दी थी।

इस शोध की शुरुआत दो रसायनों के परीक्षण से की गयी जिनका नाम कॉमन प्लास्टिसाइज़र डायथाइलहेक्सिल फलेट (डीईएचपी) और औद्योगिक रासायनिक पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफिनाइल 153 (पीसीबी153) है। शोधकर्ताओं द्वारा इन दोनों रसायनों के प्रभाव का विस्तार से अध्ययन किया गया है।

डीईएचपी रसायन घर पर मौजूद विभिन्न वस्तुओं में पाया जाता है जिनमें तार, खिलौने, कालीन, कपड़े, फर्श आदि शामिल हैं। हालांकि पीसीबी153 रसायन सिर्फ खाद्य पदार्थों में ही मौजूद होता है, लेकिन इसके उपयोग पर अब दुनिया भर में प्रतिबंध लगा दिया गया है।

इस शोध की आगे की जांच के लिए शोधकर्ताओं द्वारा शुक्राणु के नमूने एकत्र किए गए थे। इन शुक्राणुओं के नमूने उन पुरुषों और कुत्तों द्वारा लिए गए थे जो यूके के एक ही क्षेत्र में रह रहे थे। इस जांच के दौरान जब पर्यावरण में रसायनों का स्तर अधिक था तब पुरुषों और कुत्तों में शुक्राणु की गुणवत्ता विकृत पाई गई।

रिचर्ड ली, इस अध्ययन के प्रमुख लेखक ने एक बयान में कहा, "यह नया अध्ययन हमारे इस सिद्धांत का समर्थन करता है कि घरेलू कुत्ता वास्तव में मानव नर प्रजनन में गिरावट के लिए एक 'प्रहरी' या दर्पण जैसा है।"

उन्होंने आगे कहा, "हमारे निष्कर्ष यह बताते हैं कि मानव निर्मित रसायन जिनका घर और काम के वातावरण में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, वे समान वातावरण में रहने वाले मनुष्य और कुत्ते दोनों में शुक्राणु की गुणवत्ता में गिरावट के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।"

नॉटिंघम के शोधकर्ताओं द्वारा किये गए पिछले अध्ययन के अनुसार, कुत्तों पर किए गए एक अध्ययन ने यह स्पष्ट किया था कि रासायनिक प्रदूषकों का शुक्राणु के कार्य पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है।

जिसके बाद हाल ही में किये गये नये अध्ययन में कुत्ते और मानव शुक्राणु दोनों पर डीईएचपी और पीसीबी153 जैसे दो प्रमुख पर्यावरण प्रदूषकों के खतरनाक प्रभावों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है।

यह बताया गया है कि दूषित वातावरण के संपर्क में आने के परिणामस्वरूप, शुक्राणु की गतिशीलता और डीएनए विखंडन में वृद्धि होती है। यह भी स्पष्ट किया है कि पुरुषों में बांझपन शुक्राणु में डीएनए की कमी के बढ़े हुए स्तर के साथ जुड़ा हुआ है।

अब यह कहा जा सकता है कि पालतू कुत्तों में भी इसकी प्रगति समान है। ऐसा एक ही वातावरण और समान घरेलू अशुद्धियों के संपर्क में आने के कारण होता है। पालतू कुत्तों की प्रक्रिया में समानता का मतलब यह भी है कि कुत्ते भविष्य के किसी भी शोध के लिए एक आदर्श मॉडल साबित हो सकते हैं।

इस अध्ययन के एक अन्य शोधकर्ता ने यह भी कहा है कि पर्यावरण संबंधी अशुद्धियाँ काफी हद तक स्थान और औद्योगिक प्रदूषकों और पर्यावरण में मौजूद रसायनों पर निर्भर करती हैं। भविष्य में, शोधकर्ता इस बात पर अपने अध्ययन को केंद्रित करेंगे कि कैसे शुक्राणु की गुणवत्ता व्यक्ति के रहने वाले क्षेत्र से प्रभावित होती है।

ताज़ा खबर

TabletWise.com