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रोजाना अपनी दवा लेने वाले और नियमित रूप से जांच करवाने वाले बच्चों की तुलना में खराब नियंत्रित दमे वाले शहरी छात्र ज्यादातर स्कूल नहीं जा पाते।

दमे से पीड़ित बच्चों में स्कुल में बुरे प्रदर्शन की संभावना

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दमे से पीड़ित बच्चों में स्कुल में बुरे प्रदर्शन की संभावना
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एक नए अध्ययन में पाया गया है कि दमे से पीड़ित बच्चों को स्कूल में अधिक संघर्ष करना पड़ता है। खासकर जब उनके लक्षण अच्छी तरह से नियंत्रित नहीं किये गए हो, जिसकी वजह से उन्हें स्कूल से छूटी लेनी पड़ती है और उनके परिक्षा के परिणामों पर नाकरात्मक प्रभाव पड़ता है।

यह अध्ययन 11 मार्च, 2019 को एनल्स ऑफ़ एलर्जी, अस्थमा एंड इम्मुनोलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। यह अमेरिकन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थ्मा और इम्यूनोलॉजी (एसीएएआई) की आधिकारिक पत्रिका है।

आज के समय में दमा बच्चों में सबसे आम बीमारियों में से एक है। यह बताया गया है कि गंभीर दमा और अन्य सांस की बीमारियों से पीडित बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में पिछे रहते हैं।

अध्ययन के अनुसार कहा गया है कि शहरी बच्चे ऐसी बीमारियों की चपेट में आते हैं क्योंकि वे खराब वायु-गुणवत्ता में रहते हैं, फिर वो चाहे अंदर रहें या बाहर।

शोधकर्ताओं ने 216 काले/अफ्रीकी अमेरिकी स्कूल के बच्चों में हाज़िरी और अकादमिक प्रदर्शन के रिकॉर्ड की जांच की, जिसमें से 46 प्रतिशत लैटिनो और 26 प्रतिशत नॉन-लैटिनो सफेद थे। भाग लेने वाले सभी छात्र 7 से 9 साल के थे।

दमे और एलर्जी की स्थिति, फेफड़ों के कार्य और उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को निर्धारित करने के लिए एक पूर्ण नैदानिक ​​मूल्यांकन किया गया था।

इस शोध के परिणाम में कहा गया है कि रोजाना अपनी दवा लेने वाले और नियमित रूप से जांच करवाने वाले बच्चों की तुलना में खराब नियंत्रित दमे वाले शहरी छात्र ज्यादातर स्कूल नहीं जा पाते।

एसीएएआई के अध्यक्ष टॉड महर ने कहा, "इस अध्ययन में बहुत कम बच्चों ने एलर्जी के डॉक्टर जैसे विशेषज्ञ से जांच करवाई। इसके अलावा, कई लोगों के मौसमी बुखार का निदान नहीं करवाया गया था, जो कि दमा के गंभीर परिणामों और संभावित रूप से खराब शैक्षणिक प्रदर्शन में बहुत योगदान दे सकता है। "

इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा, "जिन बच्चों का इलाज एलर्जी के डॉक्टर जो दमा का इलाज करने वाले विशेषज्ञ होते हैं, उनसे करवाया जाता है वह रोज़ स्कूल जा पाते हैं क्योंकि उनका अस्थमा बेहतर तरीके से नियंत्रित रहता है। अस्थमा वाले बच्चों विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को विशेष देखभाल तक पहुंच की आवश्यकता होती है क्योंकि दमा वाला हर व्यक्ति को अच्छा महसूस करने में सक्षम होना चाहिए, पूरे दिन सक्रिय रहना चाहिए और उन्हें रात में अच्छी नींद लेनी चाहिए। ”

डॉ. कोइनिस-मिशेल, अध्ययन के प्रमुख लेखक, ने कहा, "अस्थमा के डर के उच्च स्तर, भाषा अवरोध, संस्कृति में फिट बैठने से संबंधित तनाव, लक्षणों की खराब अनुभूति, दवाओं के बारे में अधिक से अधिक चिंता और दवा का कम पालन जैसे कारकों से लैटिन अमेरिका के लोगों में खराब शैक्षणिक प्रदर्शन का अधिक खतरा होता है। ”

अध्ययन के अनुसार, बच्चों और माता-पिता को दमा या किसी अन्य सांस की बीमारी के लक्षणों के प्रति अनभिज्ञ नहीं होना चाहिए क्योंकि यह बच्चों के स्वास्थ्य और स्कूल के प्रदर्शन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। डॉक्टरों ने अच्छा अस्थमा नियंत्रण रखने का सुझाव दिया है। यहां तक ​​कि अस्थमा के लक्षणों में मामूली वृद्धि सीधे शिक्षा और नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।

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