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भारत सरकार ने गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए वित्तीय और तकनीकी दोनों तरह की सहायता की है।

गंगा नदी की सफाई

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गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए भारत सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए गए हैं। सरकार ने आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान करके इस प्रक्रिया में योगदान दिया है।

शुरू की गई परियोजनाएँ

भारत सरकार ने नमामि गंगे कार्यक्रम की शुरुआत की, एक पहल योजना जिसमें विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं जिसमें गंगा/यमुना और उसकी सहायक नदियों की सफाई शामिल है। आकड़ो के अनुसार, भारत सरकार द्वारा कुल 261 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।

परियोजनाओं में औद्योगिक प्रदूषण उन्मूलन, सीवरेज अवसंरचना, नदी भूमि का विकास, घाटों और शवदाहगृहों का निर्माण, जैविक उपचार और ऐसे कई अन्य क्षेत्र शामिल हैं, जिनका अनुमानित खर्च ₹25, 563 करोड़ है। अब तक 76 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

लक्ष्य

भारत सरकार ने पवित्र नदी से प्रदूषक तत्वों को बाहर निकालने के अपने प्रयासों को जारी रखा है। वे 2020 के अंत तक सभी छोटी बड़ी योजनाओं को पूरा करने पर ध्यान दे रहे हैं।

आधारिक संरचना की परियोजनाएं 15 साल के लंबे परिचालन और रखरखाव (O&M) के साथ अधिकृत हैं। 2014 में शुरू की गई अधिकांश परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और अब परिचालन और रखरखाव की प्रक्रिया में हैं।

सरकार क्या कर रही है?

केंद्र सरकार द्वारा नदी में अपशिष्ट प्रवाह के लिए अनिवार्य उपाय किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) द्वारा निजी घरेलू शौचालय (IHHLs) के उचित निर्माण के लिए भारत के पेयजल और स्‍वच्‍छता मंत्रालय को ₹388.35 करोड़ की राशि दी गई है।

रिपोर्टों के अनुसार, गंगा किनारे के 1604 गांवों को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया है। गंगा किनारे के 25 जिलों की 1011 ग्राम पंचायतों में लगभग 388340 निजी घरेलू शौचालयों (IHHLs) का निर्माण किया गया है।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में, एनएमसीजी (NMCG) ने गंगा किनारे के गांवों में तरल अपशिष्ट प्रबंधन के निष्पादन के लिए पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को 20 करोड़ रुपये दिए हैं।

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