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जीन-संपादित मुर्गियां मनुष्यों को फ्लू की बीमारियों से बचाएँगी।

जल्द ही: फ्लू को रोकने के लिए जीन संपादित मुर्गियां

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जल्द ही: फ्लू को रोकने के लिए जीन संपादित मुर्गियां
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ब्रिटिश वैज्ञानिकों एक समूह ऐसी जीन-संपादित मुर्गियों को विकसित कर रहा है जो फ्लू के प्रतिरोधी होंगी। यह शोध स्कॉटलैंड में यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के रोज़लिन इंस्टीट्यूट में किया जा रहा है।

शोधकर्ता इन जीन-संपादित मुर्गियों को अगले जानलेवा फ्लू रोगों को रोकने के लिए विकसित कर रहे हैं।

मुर्गी जैसे पक्षी मनुष्यों के बीच H5N1, इन्फ्लूएंजा ए विषाणु का कारण बनते हैं। यह मनुष्यों में विश्व स्तर पर फैलने वाली एक जानलेवा बीमारी है।

इस विषाणु ने दुनिया भर में कई मुर्गियों को संक्रमित किया है इस फ्लू से हजारों मानव जीवन प्रभावित हो रहे हैं।

इस नई रोकथाम विधि में, वैज्ञानिक इस संक्रमित विषाणु को रोकने के लिए पक्षियों के डीएनए को बदलने की एक प्रक्रिया विकसित कर रहे हैं।

पक्षियों के डीएनए को एक नई तकनीक के उपयोग से बदला जायेगा जिसे क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेसड शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट्स (CRISPR) कहते है। इस प्रक्रिया के दौरान, एक प्रोटीन का हिस्सा जिस पर फ्लू विषाणु निर्भर करता है उसे हटा दिया जाता है। यह मुर्गी को पूरी तरह से फ्लु-प्रतिरक्षित बना देता है।

मुर्गी के डीएनए को बदलने के लिए CRISPR के उपयोग से केवल एक हिस्सा बदला जायेगा। मुर्गी के बाकि हिस्से में अनुवांशिक रूप से कोई बदलाव नहीं लाया जाता।

सीआरआईएसपीआर (CRISPR) डीएनए अनुक्रमों का एक समूह है जो बैक्टीरिया और आर्किया के जीनोम में मौजूद होते हैं। प्रोकैरियोट्स में संक्रमण से निपटने और उसका पता लगाने के लिए इस तरह के अनुक्रमों का उपयोग किया जाता है। यह वाइरसरोधी रक्षा प्रणाली के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पहली जीन-संपादित मुर्गी इस साल रोज़लिन संस्थान में प्रस्तुत की जाएगी।

वेंडी बार्कले, इंपीरियल कॉलेज लंदन में वायरोलॉजी के प्रोफेसर जो इस परियोजना के सह-प्रमुख हैं, उन्होंने कहा, “यदि हम इन्फ्लूएंजा विषाणु को जंगली पक्षियों से मुर्गियों में आने से रोक सकते हैं, तो हम स्रोत पर अगली महामारी को रोक पाएंगे”।

बार्कले ने यह भी कहा कि, "इसके उद्देश्य यह है कि मुर्गियां फ्लू न उत्पन्न कर सकें और जंगली पक्षियों और मनुष्यों के बीच एक अंतर्रोधी का निर्माण हो"।

रोज़लिन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक काफी समय से जीन-संपादित जानवरों पर काम कर रहे हैं। इस से पहले, उन्होंने जीन-संपादित सूअरों को विकसित किया था जो एक विषाणु के लिए प्रतिरोधी बन गए थे।

बार्कले के अनुसार, सबसे बड़ी बाधाओं में से एक जनता की स्वीकृति होगी। लोग उन पारंपरिक जानवरों के भोजन खा रहे हैं जो पारंपरिक प्रजनन का हिस्सा रहे हैं। लेकिन अब वे जीन-परिवर्तित भोजन खाने के लिए व्याकुल हो सकते हैं।

इन रोकथाम के माध्यम से, वैज्ञानिक मनुष्य जीवन को प्रभावित करने वाले संभावित स्वास्थ्य खतरों से रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। इसके पीछे प्रमुख लक्ष्य अगली महामारी को रोकना है।

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