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टमाटरों में कैप्सैसिनोइड नामक एक मसालेदार पदार्थ बनाने के लिए निष्क्रिय जीन मौजूद होते हैं।

जल्द आ रहा है: जीनोम एडिटिंग के जरिए मसालेदार टमाटर

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जल्द आ रहा है: जीनोम एडिटिंग के जरिए मसालेदार टमाटर
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शोधकर्ताओं ने अब पुष्टि की है कि जीनोम एडिटिंग तकनीक टमाटर में कैप्सैसिनोइड्स नामक एक मसालेदार पदार्थ का उत्पादन कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप मसालेदार टमाटर का उत्पादन हो सकता है।

यह शोध हाल ही में ट्रेंड्स इन प्लांट साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ था। इस शोध के अनुसार, कैप्सैसिनोइड के उत्पादन के लिए टमाटर को आनुवंशिक रूप से संशोधित किया जा सकता है।

कैप्सैसिनोइड एक बहुत गर्म रसायन हैं जो मिर्च में तीखा और मसालेदार स्वाद लाते हैं। ब्राज़ील के फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ़ विकोसा के शोधकर्ताओं ने कहा कि जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल करके मसालेदार टमाटर का उत्पादन संभव होगा।

इस शोध के पीछे मुख्य उद्देश्य मसालेदार टमाटर को सुपरमार्केट या किराने की दुकानों में बेचना नहीं है। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए मसालेदार पदार्थ का उत्पादन करना है जिसे कैप्सैसिनोइड्स कहा जाता है।

यह तेज-स्वाद वाले पदार्थ का उत्पादन करने का सबसे आसान तरीका हो सकता है जिसका महत्वपूर्ण मूल्य है। इसका कारण यह है कि कैप्सैसिनोइड्स का उत्पादन करने वाली काली मिर्च की पैदावार कठिन होती है।

ब्राज़ील के फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ़ विकोसा के अगस्टिन ज़्सोगोन और शोध पत्र के सह-लेखक ने कहा, "टमाटर के लिए कैप्सैसिनोइड्स आनुवंशिक मार्ग का निर्माण करना करना इस पदार्थ का उत्पादन आसान और सस्ता बना देगा, इसके बहुत ही दिलचस्प उपयोग हैं।"

ज़्सोगोन ने यह भी कहा, “कैप्सैसिनोइड्स बहुत ही मूल्यवान पदार्थ हैं; वे काली मिर्च के स्प्रे के लिए हथियार उद्योग में उपयोग किए जाते हैं, वे एनेस्थेटिक्स के लिए भी उपयोग किए जाते हैं और कुछ अनुसंधानों से यह पता चलता है कि वे वजन घटाने में भी मददगार हैं।"

काली मिर्च की फसल की खेती करना मुश्किल है। फल में तीखेपन की स्थिरता बनाए रखना जटिल हो जाता है। लेकिन चूंकि टमाटर की पैदावार बहुत अधिक होती है और इसके पौधे पर अच्छी तरह से शोध किया जा चुका है, शोधकर्ताओं का कहना है कि इसके माध्यम से कैप्सैसिनोइड्स बनाना आसान है।

अध्ययन से पता चला है कि टमाटर और काली मिर्च में एक ही डीएनए होता है क्योंकि वे दोनों सामान पूर्वज से विकसित हुए हैं। टमाटर और काली दोनों 19 मिलियन (1.9 करोड़) वर्ष पहले प्रजातियों के रूप में अलग हो गए थे।

पौधों के अध्ययन से पता चला है कि टमाटर में अभी भी कैप्सैसिनोइड्स का उत्पादन करने के लिए आवश्यक निष्क्रिय जीन मौजूद हैं। उन निष्क्रिय जीन को सक्रिय करने की आवश्यकता है। शोधकर्ता विभिन्न तकनीकों का उपयोग करके टमाटर में कैप्सैसिनोइड्स अणु के अभिव्यक्ति पैटर्न का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।

ट्रेंड्स इन प्लांट साइंस जर्नल में प्रकाशित शोध पत्र ने उन जीनों को टमाटर में सक्रिय करने और कैपसैसिनोइड्स बनाने के सिद्धांतों की व्याख्या की है। उन तरीकों में से एक है "क्लस्टर्ड रेगुलरली इंटरस्पेसड शॉर्ट पालिंड्रोमिक रिपीट्स (CRISPR-Cas9)"।

सीआरआईएसपीआर-सीऐएस9 (CRISPR-Cas9) डीएनए अनुक्रमों का एक समूह है जो बैक्टीरिया और आर्किया के जीनोम में मौजूद होते हैं। प्रोकैरियोट्स में संक्रमण से निपटने और उसका पता लगाने के लिए इस तरह के अनुक्रमों का उपयोग किया जाता है। यह वाइरसरोधी रक्षा प्रणाली के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सीऐएस9 एक एंजाइम है जो सीआरआईएसपीआर अनुक्रमों की मदद से सीआरआईएसपीआर-सीऐएस9 तकनीक का इस्तेमाल करके एक जीव के भीतर जीन को अलग करता है। इस तरह की तकनीक का एक विस्तृत उपयोग है जो बीमारी के इलाज में मदद कर सकता है।

एक समय में एक जीन को सक्रिय करने के लिए सीआरआईएसपीआर-सीऐएस9 जैसे जीनोम एडिटिंग तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। इससे शोधकर्ताओं को उत्पादित पदार्थ को देखने में मदद मिलेगी। यह तकनीक अभी कुछ अन्य तरीकों के साथ परीक्षण के अधीन है।

यदि वैज्ञानिक वर्ष के अंत तक सफलतापूर्वक इस तकनीक का उपयोग करते हुए एक मसालेदार टमाटर का निर्माण कर लेते हैं, तो यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी क्योंकि यह जीनोम एडिटिंग अवधारणा के लिए महत्वपूर्ण मूल्य पैदा करेगा।

इस तकनीक को फिर भविष्य में कई आवश्यक चयापचय पदार्थों का उत्पादन करने के लिए जीन संपादित टमाटर या अन्य उत्पादों के उपयोग करने के लिए कृषि के क्षेत्र में लागू किया जा सकता है।

यह पहली बार नहीं है कि टमाटर के जीन में बदलाव लाने के लिए सीआरआईएसपीआर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक का उपयोग पहले मीठी स्ट्रॉबेरी, स्वादिष्ट जमीनी चेरी और नॉन-ब्राउनिंग मशरूम बनाने के लिए भी किया गया है।

आनुवंशिक रूप से संशोधित टमाटर का उपयोग करके, हम बिक्सिन का उत्पादन कर सकते हैं जो एक आवश्यक कॉस्मेटिक और खाद्य वर्णक है। यह बीटा-कैरोटीन के निर्माण के लिए भी सहायक होगा जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट है।

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