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जो महिलाएं हर दिन तले हुए चिकन या मछली का सेवन करती हैं उनमें मृत्यु का खतरा 13 प्रतिशत अधिक हो सकता है।

नियमित रूप से तला हुआ चिकन खाने से मरने का ख़तरा ज़्यादा होता है

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नियमित रूप से तला हुआ चिकन खाने से मरने का ख़तरा ज़्यादा होता है
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संयुक्त राज्य अमेरिका में किए गए एक नए अध्ययन से पता चलता है कि महिलाओं में मासिक धर्म बंद होने के बाद रोज़ाना तला हुआ चिकन या मछली के सेवन से मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

यह शोध 23 जनवरी, 2019 को मेडिकल जर्नल बीएमजे में प्रकाशित हुआ था।

जो महिलाएं हर दिन चिकन या मछली का सेवन करती हैं उनमें मृत्यु का खतरा 13 प्रतिशत अधिक हो सकता है। अध्ययन से पता चला है कि चिकन और मछली जैसे तले हुए खाद्य पदार्थों का कम सेवन करने से बेहतर स्वास्थ्य रहता है।

यह अध्ययन मृत्यु दर और तले हुए भोजन की खपत के बीच संबंधों को दिखाने के लिए किया गया था। पिछले शोध ने टाइप 2 मधुमेह या हृदय रोग के बढ़ते ख़तरे और तले हुए खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन के बीच संबंध का पता लगाया था।

2017 में किए गए अध्ययनों में से एक में पाया गया कि सप्ताह में एक बार भी तले हुए आलू खाने से असामयिक मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।

आयोवा विश्वविद्यालय में महामारी विज्ञान के एक सहायक प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख लेखक, वेई बाओ ने कहा, “हम जानते हैं कि तले हुए भोजन की खपत संयुक्त राज्य अमेरिका और दुनिया भर में बहुत ही सामान्य है। दुर्भाग्य से, हम तले हुए खाद्य पदार्थों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव के बारे में बहुत कम जानते हैं। ”

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की पोषण समिति के विज्ञान स्वयंसेवक और भूतपूर्व अध्यक्ष, जो एन कार्सन ने कहा, "दुनिया भर के विभिन्न हिस्सों से हृदय रोग और आहार के प्रतिमान के साथ इसके संबंध के कई सबूत उपलब्ध हैं।"

कार्सन ने आगे कहा, "पिछले शोध ने हमें पारंपरिक दक्षिणी आहार के बारे में बताया है, जो तले हुए खाद्य पदार्थों के लिए जाना जाता है, यह हृदय के अच्छे स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है और यह अध्ययन हमें यह बताने में मदद करता है कि ऐसा क्यों हो सकता है।"

शोधकर्ताओं की टीम ने लगभग 1,07,000 महिलाओं की भोजन की आदतों की जांच की। सभी प्रतिभागियों की आयु 50 से 79 के बीच थी।

अध्ययन में महिलाओं के नामांकन के बाद, एक खाद्य आवृत्ति प्रश्नावली पूछी गई थी। इसमें खपत और 122 खाद्य पदार्थों से संबंधित सवाल शामिल थे। टीम ने प्रतिभागियों की आय, शिक्षा स्तर, समग्र आहार, और कुल ऊर्जा खपत जैसे अन्य कारकों की भी गणना की।

अध्ययन में पाया गया कि तले-भुने खाने की दैनिक खपत से महिलाओं में दिल से संबंधित मौत के साथ-साथ और भी कारणों से मृत्यु का 8 प्रतिशत खतरा बढ़ गया। अधिक सटीकता के लिए यह पाया गया कि, तले हुए चिकन की खपत में 13 प्रतिशत मृत्यु का ख़तरा था। हालाँकि, तली हुई मछली खाने से दिल से संबंधित मृत्यु की संभावना 7 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यह नया अध्ययन पुरुषों के लिए भी लागू होता है। मौत के खतरे में वृद्धि भोजन में उच्च सोडियम के कारण हो सकती है।

हालाँकि, इस अध्ययन के नए निष्कर्ष विश्व स्तर पर लागू नहीं होते हैं। यह संभव है कि लोगों को विभिन्न स्थानों पर विविध तरिके से तलने या खाने का अभ्यास हो। शोध में स्पेन में जैतून के तेल के उपयोग के कारण तला हुआ भोजन और मृत्यु दर के बीच कोई संबंध नहीं दिखाया गया है।

तले हुए चिकन और मछली के अस्वस्थ होने के कई कारण हो सकते हैं। वसा की मात्रा और उच्च तापमान में वृद्धि के परिणामस्वरूप ट्रांस वसा का उत्पादन अन्य यौगिकों के साथ ज़्यादा हो सकता है और यह हानिकारक हो सकता है।

एक आहार सलाहकार, लिन गार्टन ने कहा कि यह अध्ययन एक दिलचस्प कदम है। अध्ययन के अनुसार, जिन महिलाओं ने अधिक तले हुए भोजन का सेवन किया, वे अधिक अस्वस्थ पाई गईं।

तले हुए खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन करने से हम अधिक कैलोरी की खपत करते हैं। यह वसा और नमक की खपत को भी बढ़ाता है। लेकिन घर पर स्वस्थ्य खाना पकाने या भूनने के तरीकों से बेहतर स्वास्थ्य के लिए बड़े अंतर पैदा हो सकते हैं।

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