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सांप के डंक से विश्वभर में हर साल लगभग 5.4 मिलियन लोग प्रभावित होते हैं।

सांप के डंक का प्रभाव डब्ल्यूएचओ की नई रणनीति द्वारा कम किया जा सकता है

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सांप के डंक का प्रभाव डब्ल्यूएचओ की नई रणनीति द्वारा कम किया जा सकता है
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मेलबर्न विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एक नई विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) आधारित रणनीति विकसित की है जिसके माध्यम से सांप के डंक के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

इस रणनीति के बारे में 21 फरवरी, 2019 को नवीनतम पीएलओएस (PLOS) निग्लेक्टिड ट्रॉपिकल डिज़ीज़ पत्र में प्रकाशित किया गया है।

डब्ल्यूएचओ का उद्देश्य सांप के डंक के प्रभाव को कम करना है और इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह रणनीति बनाई गयी है। साँप के डंक के कारण बहुत से सामाजिक-आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी खर्च में वृद्धि हुई है। इस खर्चे को कम करने के लिए यह एक पहली वैश्विक योजना बनाई गयी है।

यह रणनीति बनाने का प्रमुख उद्देश्य है कि सांप के डंक की वजह से होने वाली मौतों और विकलांगता को कम किया जा सके। इस नई रणनीति की मदद से हम वर्ष 2030 तक इस बोझ को 50 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।

इस रणनीति के तहत अन्य उद्देश्यों में समुदायों को रोकथाम के कार्य करने के लिए सक्षम बनाने के साथ-साथ प्रभावी और किफायती उपचार सुनिश्चित करना शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार इस रणनीति की मदद से हमारी स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने के साथ-साथ संसाधनों को जुटाने के लिए वैश्विक संघ का विकास किया जा सकता है।

यह सब उद्देश्य एक व्यापक रणनीति के ज़रिये हासिल किए जा सकते हैं जिसमें तीन मिलियन (30 लाख) सांप के डंक का वार्षिक उपचार भी शामिल है।

डेविड विलियम्स, इस रणनीति के एक प्रमुख विकासकर्ता ने कहा, "डब्ल्यूएचओ का सर्पदंश विषाक्त नक्शा, जिसका 23 मई को जिनेवा में आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया जाएगा, साँप के काटने से होने वाली मानव पीड़ा को कम करने के लिए विकसित एक पहली वास्तविक वैश्विक रणनीति प्रस्तुत करता है।"

डॉ विलियम्स ने आगे कहा, "सांप के डंक को विषाक्त करने की यह योजना राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल होने का मांग करती है और वैश्विक स्वास्थ्य व्याप्ति और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए वैश्विक प्रतिबद्धताओं के साथ गठबंधन करती है।"

विशेषज्ञों द्वारा यह बताया गया है कि सांप के डंक से विश्वभर में हर साल लगभग 5.4 मिलियन (54 लाख) लोग प्रभावित होते हैं। इसकी वजह से करीब 138,000 लोग हर साल मारे जाते है और लगभग 400,000 लोग शारीरिक और मनोवैज्ञानिक विकलांगता से पीड़ित होते हैं।

यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत में सांप के डंक के कारण हर साल 2.8 मिलियन (28 लाख) लोग प्रभावित होते हैं और लगभग 46,000 लोगों की मौत दर्ज की जाती है। हालांकि अफ्रीका में सांप के डंक के कारण 32,000 लोगों की मौत होने का अनुमान लगाया गया है।

इस रणनीति को बनाने वाले विशेषज्ञों में से एक, डॉ विलियम्स ने पुष्टि की है कि इस चुनौती से निपटने के लिए वैश्विक समन्वय की आवश्यकता है। सांप के डंक के प्रभाव को पड़ोसी देशों की तकनीकी, राजनीतिक और वित्तीय सहायता प्राप्त करके आसानी से कम किया जा सकता है। इस चुनौती से निपटने के लिए यह ज़रूरी है कि परोपकारी और विकास सहयोगी साथ मिलकर काम करें।

दुनिया की आबादी के स्वास्थ्य में सुधार के लिए, 28 विशेषज्ञों की एक टीम के वैश्विक कार्य समूह ने इस मुद्दे का सामना करने के लिए एक रणनीति का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव में सभी प्रभावित देशों के प्रयासों को एकीकृत करने पर जोर दिया गया है।

डब्ल्यूएचओ द्वारा दी गयी इस रणनीति का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन पूरी तरह से भागीदार देशों और दाताओं से प्राप्त होने वाली धनराशि पर निर्भर करता है। यह बताया गया है कि इस कार्य में निवेश करने से सांप के डंक के शिकार हुए लोगों को स्वास्थ्य प्रणालियों में सुधार करने में मदद मिल सकती है।

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