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टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में स्तंभन दोष बहुत पाया गया।

स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) और टाइप 2 मधुमेह आनुवंशिक रूप से जुड़ा हो सकता है

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स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) और टाइप 2 मधुमेह आनुवंशिक रूप से जुड़ा हो सकता है
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वर्षों से किए गए अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि मधुमेह और स्तंभन दोष / इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी) एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उदाहरण के लिए, ईडी की संभावना टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में बहुत अधिक है।

अब तक यह लिंक कार्य-कारण साबित नहीं हुआ था। हालाँकि ईडी को टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों में बहुत देखा गया था, लेकिन यह नहीं पता था कि टाइप 2 मधुमेह ईडी का कारण था। अब, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में किया गया एक नया अध्ययन कहता है कि टाइप 2 मधुमेह के लिए आनुवंशिक संवेदनशीलता ईडी का एक कारण हो सकता है।

इस जीनोम-वाइड एसोसिएशन अध्ययन में, 220,000 से अधिक पुरुषों के डेटा की जांच की गई थी। कुल 220,000 पुरुषों में से 6000 पुरुष ईडी से पीड़ित थे। शोधकर्ताओं ने मधुमेह, वजन और स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) के बीच संबंधों को खोजने के लिए आनुवंशिक विश्लेषण का उपयोग किया। अनुसंधान ने पुष्टि की कि टाइप 2 मधुमेह के लिए आनुवंशिक प्रवृत्ति ईडी का कारण बनता है।

अध्ययन महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर लोग मधुमेह के अपने जोखिम को कम कर सकते हैं, तो वे ईडी से भी बच सकते हैं। स्वस्थ जीवन शैली जीने से मधुमेह से बचा जा सकता है।

हाल के शोध से पता चला है कि 15 किलोग्राम (लगभग 33 पाउंड) वजन घटाने से, टाइप 2 मधुमेह को बिलकुल ख़तम किया जा सकता है।

इसका कारण यह हो सकता है वजन घटाने के कारण अग्न्याशय में इंसुलिन पैदा करने वाली बीटा कोशिकाएं सामान्य हो जाती हैं।यह रक्त शर्करा के स्तर को सामान्य कर सकता है।

अब यह समझा जाता है कि इस तरह के वजन घटाने से मधुमेह के साथ स्तंभन दोष / इरेक्टाइल डिसफंक्शन के रोगियों को भी मदद मिल सकती है।

इस अध्ययन के प्रमुख लेखक जोनास बोविजन, बिग डेटा इंस्टीट्यूट, ली का शिंग सेंटर फॉर हेल्थ इंफॉर्मेशन एंड डिस्कवरी, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, यूनाइटेड किंगडम थे।

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