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स्तर I पर 5 केंद्र, स्तर II पर 25 और स्तर III पर 55 केंद्र होंगे, जिनको बनाने की अनुमानित लागत ₹534.64 करोड़ है।

85 ट्रॉमा देखभाल सेंटरों की स्थापना को मंजूरी मिली

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85 ट्रॉमा देखभाल सेंटरों की स्थापना को मंजूरी मिली
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भारत सरकार ने 12 वीं पंचवर्षीय योजना के तहत राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के पास 85 नए ट्रॉमा देखभाल सेंटर स्थापित करने को मंज़ूरी दी है।

सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में घातक घटनाओं की संख्या में सुधार लाने और अस्पतालों के आपातकालीन सेवाओं को अच्छा करने के लिए 'स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय' ने भारत में 11 वीं पंचवर्षीय योजना के तहत एक योजना शुरू की थी, जिसका नाम "कैपेसिटी बिल्डिंग फॉर डेवलपिंग ट्रॉमा केयर फैसिलिटीज़ इन गवर्नमेंट हॉस्पिटल्स ऑन नेशनल हाइवेज़" था।

अब 12 वीं पंचवर्षीय योजना के तहत, भारत सरकार ने इस योजना का विस्तार करने और देश भर में 85 और ट्रॉमा सेंटरों का निर्माण करने का लक्ष्य रखा है। प्रदान किए गए विवरण के अनुसार, स्तर I पर 5 केंद्र, स्तर II पर 25 और स्तर III पर 55 केंद्र होंगे, जिनको बनाने की अनुमानित लागत ₹534.64 करोड़ है।

यह राशि राज्य और केंद्र के बीच 30:70 के अनुपात में साझा किया जाएगा, जबकि उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में, यह 10:90 के अनुपात में होगा।

इसका उद्देश्य नए ट्रॉमा देखभाल केंद्रों का निर्माण करके आकस्मिक मौतों की संख्या को 10% तक कम करना है ताकि किसी भी रोगी को 50 किलोमीटर से अधिक दूर न ले जाना पड़े और प्रत्येक 100 किलोमीटर पर एक निर्दिष्ट ट्रॉमा देखभाल केंद्र उपलब्ध हो सके।

इसके साथ ही, चोट के पहले घंटे के भीतर प्रभावी उपचार, प्रत्येक 50 किमी पर एम्बुलेंस सहायता, अंतर-सुविधा हस्तांतरण के लिए एम्बुलेंस, एकीकृत संचार नेटवर्क, डॉक्टरों को कौशल प्रशिक्षण, नेशनल इंजरी सरवेलिएन्स सिस्टम और ट्रामा रजिस्ट्री का विकास भी सुनिश्चित किया जाएगा।

ये ट्रॉमा सेंटर सरकारी अस्पतालों में, राज्य राजमार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों के पास स्थापित किए जाएंगे, खासकर दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्रों में। इन नए केंद्रों को बनाने की जगह की पहचान दो राजधानी शहरों को जोड़ने वाले राजमार्गों, राजधानी शहरों के अलावा अन्य प्रमुख शहरों को जोड़ने वाले राजमार्गों, बंदरगाहों को प्रमुख शहरों से जोड़ने वाले राजमार्गों या औद्योगिक शहरों को राजधानी शहर से जोड़ने वाले राजमार्गों के आधार पर की जाएगी।

राज्य सरकारों ने अधिक ट्रामा देखभाल सुविधाएं स्थापित करने के लिए स्टेट एक्शन प्लान तैयार किया है। कुछ राज्यों ने स्थानों की पहचान भी की है और उन्हें अपने स्टेट एक्शन प्लान में शामिल किया है।

ट्रॉमा सेंटरों के नक्शे का विस्तृत विवरण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा परिचालन दिशानिर्देशों के पीडीएफ में प्रदान किया गया है।

2015 में भारत में हर घंटे सड़क दुर्घटनाओं के 53 मामले हुए, जिनमें से 17 लोगों की मौत हो गयी। 2017 में, भारत पर्यावरण पोर्टल के अनुसार, कुल 4,64,810 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें से, 1,47,913 दुर्घटनाओं में लोगों की जानें गई।

इनमें से 30.4% दुर्घटनाएँ राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुईं। और ज्यादातर, 18 से 45 वर्ष के बीच के लोग इन दुर्घटनाओं की चपेट में आए। तमिलनाडु को 2017 में सबसे अधिक दुर्घटनाओं यानि 65,562 का सामना करना पड़ा जबकि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मौतें हुईं।

इस कार्यक्रम को 9 वीं और 10 वीं पंचवर्षीय योजनाओं में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया था। तब इसे "पायलट प्रोजेक्ट फॉर स्ट्रेंथनिंग इमरजेंसी फैसिलिटीज अलोंग द हाइवेज़" के रूप में नामित किया गया था। 11 वीं पंचवर्षीय योजना के तहत, इसका नाम बदलकर "असिस्टेंस फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग फॉर ट्रामा केयर फॉर अप ग्रडेशन एंड स्ट्रेंगथनिंग ऑफ़ इमरजेंसी फैसिलिटीज इन गवर्न्मनट हॉस्पिटलस लोकेटेड ऑन नेशनल हाइवेज़" किया गया।

11वी पंचवर्षीय योजना में 116 ट्रॉमा देखभाल केंद्रों की स्थापना के कारण, सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों में 3% तक की कमी देखी गई। यह पाया गया कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतें 2016 में 1,50,785 से घटकर 2017 में 1,47,913 हुई। अधिक ट्रॉमा देखभाल केंद्रों की स्थापना के साथ, सरकार का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली चोटों या मौतों को और कम करना है।

11वी पंचवर्षीय योजना में 116 ट्रॉमा देखभाल केंद्रों की स्थापना के कारण, सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों में 3% तक की कमी देखी गई। यह पाया गया कि सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतें 2016 में 1,50,785 से घटकर 2017 में 1,47,913 हुई। अधिक ट्रॉमा देखभाल केंद्रों की स्थापना के साथ, सरकार का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली चोटों या मौतों को और कम करना है।

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