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पीटीएसडी से पीड़ित होने के दौरान, व्यक्ति आघात की बार बार आने वाली गहन यादों से गुजरता है।

आघात के कारण बुरी यादों को भूलना हो सकता है मुश्किल

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आघात के कारण बुरी यादों को भूलना हो सकता है मुश्किल
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बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि आघात से ग्रस्त लोग अवांछित भावनात्मक यादों को भूला नहीं पाते हैं। यह शोध 4 मार्च, 2019 को साइकियाट्रिक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुआ था।

इस अध्ययन के अनुसार, बुरी यादों को न भूल पाने की यह अक्षमता मरीज के मस्तिष्क में व्यवधान के कारण होती है। यह व्यवधान तंत्रिका और व्यवहार संबंधी हो सकता है। यह आगे चलकर अभिघातजन्य तनाव विकार (पीटीएसडी) के विकास का कारण बनता है।

इस अध्ययन से यह पता लगता है कि स्वस्थ व्यक्ति ऐसी भावनात्मक स्तिथी का सामना कर सकते हैं। हालांकि, यह पीटीएसडी से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इस शोध से यह पता चलाता है कि पीटीएसडी के रोगी नियमित रूप से अपने आहत अनुभवों का स्मरण करते रहते हैं। इस तरह के आघातों से बचने के लिए कई प्रयास करने के बाद भी, पीटीएसडी रोगी ऐसा करने में विफल रहते हैं।

डेनिएल आर सुलिवान, इस अध्ययन के एक प्रमुख लेखक ने सुझाव दिया है, "न्यूरोइमेजिंग जानकारी से पता चला है कि आघात-ग्रस्त व्यक्तियों ने दाएं मध्य ललाट गाइरस में कम सक्रियता दिखाई है, यह स्मृति दमन के कार्य के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है और इसमें गैर-आघात वाले लोगों की तुलना में स्मृति को सफलतापूर्वक दबाने की संभावना कम होती है"

पीटीएसडी से पीड़ित होने के दौरान, व्यक्ति आघात की तीव्र यादों से गुजरता है। व्यक्ति के लिए यह आघात थकाने वाला, परेशान करने वाला और विनाशकारी साबित हो सकता है। रोगियों में ये लक्षण अवांछित यादों को दबाने के लिए असमर्थता लाते हैं। पीटीएसडी के व्यवहार अभिव्यक्ति में यह भी एक मजबूत योगदानकर्ता हो सकता है।

हालाँकि, विकास और तंत्रिका प्रभाव पीटीएसडी से ग्रस्त व्यक्तियों में स्मृति दमन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अध्ययन के दौरान, शोधकर्ताओं द्वारा तीन समूहों में स्मृति दमन की जांच करने के लिए कार्यात्मक चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग का उपयोग किया गया था।

यह कार्य करने के लिए शोधकर्ताओं ने तीन समूहों को तैयार किया जिसमें से एक में पीटीएसडी वाले व्यक्ती थे; दूसरे में वे लोग थे जिन्होंने पीटीएसडी के बिना आघात का अनुभव किया और तीसरे में वे थे जिन्होंने कोई आघात खतरे या पीटीएसडी के बिना ही नियंत्रण किया। इस अधययन के गहन विश्लेषण के बाद यह पाया गया है कि आघात वाले प्रतिभागी स्मृति को दबाने में असमर्थ थे।

ये परिणाम उन प्रतिभागियों की पीटीएसडी स्थिति की परवाह किए बिना प्रदर्शित किए गए थे। ऐसे लोगों का समूह जो किसी आघात के संपर्क में नहीं था, वे बेहतर तरीके से अपने व्यवहार को नियंत्रित कर पा रहे थे।

इस अध्ययन के परिणाम स्पष्ट रूप से यह बताते हैं कि स्मृति दमन में तंत्रिका और व्यवहार संबंधी व्यवधान आघात से जुड़ा हुआ है। यह इस संभावना को इंगित करता है कि बुरी यादों को दबाने में कठिनाई केवल कई संभावित कारणों में से एक हो सकती है जो पीटीएसडी के विकास में योगदान करते हैं।

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