Pharmacy Website
Clinic Website
TabletWise.com TabletWise.com
 
जन्म से पहले या बचपन की शुरुआत में ही विभिन्न प्रदूषकों और रसायनों के संपर्क में आना फेफड़ों के कार्य को प्रभावित कर सकता है।

बच्चों का विभिन्न रसायनों के संपर्क में आना बन सकता है फेफड़ों के विकार का कारण

लेखक   •  
शेयर
बच्चों का विभिन्न रसायनों के संपर्क में आना बन सकता है फेफड़ों के विकार का कारण
Read in English

शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ रासायनिक प्रदूषकों के संपर्क में आने से (जन्म से भी पहले) बच्चों में फेफड़ों के कार्यों में कमी आ सकती है।

यह अध्ययन बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ (ISGlobal) और फ्रेंच इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड बायोमेडिकल रिसर्च (INSERM) द्वारा सह-निर्देशित किया गया था। यह अध्ययन "द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ" पत्रिका में फरवरी 2019 में प्रकाशित किया गया था।

यह अध्ययन छह देशों में माँ और शिशु के 1,033 जोड़ों की जानकारी के माध्यम से किया गया था। भाग लेने वाले बच्चों पर 6 और 12 साल की उम्र में फेफड़ों के कार्यों से संबंधित एक परीक्षण हुआ था।

इस अध्ययन का मकसद यह जानना था कि कैसे 85 अलग-अलग प्रसव पूर्व प्रदूषक अनावरण और 125 अलग-अलग प्रदूषक अनावरण बच्चों में प्रारंभिक बचपन में फेफड़ों के कार्यों को प्रभावित करते हैं। रसायनों के साथ, इन अनावरणो में बच्चों को घेरने वाले भीतरी और बाहरी वातावरण के साथ धूम्रपान, आवास और अड़ोस-पड़ोस की स्थिति भी शामिल थी।

इस अनुसंधान ने केवल व्यक्तिगत रसायनों या विषाक्त पदार्थों को लक्षित किया है और अनावरण के पुरे समूह को लक्षित नहीं किया जिस से बच्चों को गुज़रना पड़ता है। इस अध्ययन के परिणामों को मापने के लिए, स्पाइरोमेट्री नामक तकनीक का उपयोग किया गया था।

स्पाइरोमेट्री उस बल को मापता है जिसके माध्यम से एक व्यक्ति साँस लेता है और इसका अस्थमा जैसी श्वसन समस्याओं को मापने के लिए उपयोग किया जाता है।

इस अध्ययन में पाया गया कि PFAS (पॉलीफ्लुओरोअल्काइल और पेरफ्लुओरोअल्काइल पदार्थों के लिए) के रूप में जाना जाने वाला रसायनों का जन्मपूर्व अनावरण 2 प्रकार का था। PFAS घरेलू उत्पादों जैसे खाद्य पैकेज, पानी के विकर्षक, दाग-प्रतिरोधी कपड़े, न चिपकने वाले भोजन बनाने के बर्तन आदि में मौजूद होते हैं। इनसे फेफड़ों के कार्य में खराबी आ सकती है।

इसके साथ ही, अन्य कारक जिनके परिणाम बचपन में रसायनों के सम्पर्क में आने के समान थे, उनमें भीड़-भाड़ वाले आवास, घने पड़ोस में स्कूल और प्लास्टिक और सौंदर्य प्रसाधनों में पाए जाने वाले रसायन शामिल थे।

एथिल-पैराबेन और फैटालेट मेटाबोलाइट्स सहित रसायन बच्चों में भोजन के माध्यम से और गर्भ में नाल के माध्यम से बच्चों के शरीर तक पहुंचते हैं। साथ ही, यह भी पाया गया कि फेलेट (अक्सर इत्र, साबुन और शैंपू में पाए जाने वाले) के संपर्क में आने से भी फेफड़ों को नुकसान होता है।

उपर्युक्त रसायनों के अलावा, सौंदर्य प्रसाधनों और तांबे में पाए जाने वाले पैराबेन्स भी फेफड़ों में दुष्प्रभाव पैदा करते हैं। इस अध्ययन के माध्यम से, 10 में से कम से कम 9 महिलाओं में, दो-तिहाई से अधिक रासायनिक अनावरण बायोमार्कर पाए गए।

मार्टीन वर्जीहेड, ISGlobal के शोधकर्ता और अध्ययन के सह-समन्वयक ने कहा, "यह पहला अध्ययन है जो महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कारकों और फेफड़ों के कार्य की दुर्बलता की एक सीमा के बीच संघों की पहचान करने के लिए एक अनावरण दृष्टिकोण को लागू करता है, जिससे पर्यावरणीय स्वास्थ्य अनुसंधान में एक नए प्रतिमान का प्रतिनिधित्व होता है।"

उन्होंने कहा, "इन निष्कर्षों का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव है। एक कठोर नियमन और उपभोक्ता उत्पादों की लेबलिंग सहित, सार्वजनिक रूप से बेहतर जानकारी देने के लिए और रासायनिक पदार्थों के संपर्क को कम करने के लिए निवारक उपायों की आवश्यकता है, जिससे बचपन में फेफड़े के काम में अधीनता को रोका जा सके और दीर्घावधि में स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाया जा सके।”

इन रसायनों के संपर्क में सांस की समस्याओं और फेफड़ों के कार्यों में कमी के अलावा स्थायी स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं। और इसलिए, इन रसायनों के प्रसार पर जाँच रखने की सख्त आवश्यकता है।

ताज़ा खबर

TabletWise.com
Home
Saved

साइन अप