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मच्छर हर साल 700,000 से अधिक लोगों की मौत का कारण बनते हैं और विश्व स्तर पर लगभग 17% संक्रामक रोगों को जन्म देते हैं।

मादा मच्छरों का खतरा कम हुआ

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मादा मच्छरों का खतरा कम हुआ
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शोधकर्ताओं ने मानव आहार की दवाए खिलाकर मच्छरों की काटने की ज़रूरत को कम करने का एक नया तरीका खोज निकाला है।

अध्ययन का नाम "स्मॉल-मोलेक्यूल एगोनिस्ट ऑफ एडीज़ एजिप्टी न्यूरोपेप्टाइड वाई रिसेप्टर ब्लॉक मॉस्किटो बाइटिंग” है और ये 7 फरवरी 2019 को पत्रिका सेल में प्रकाशित हुआ है।

इसके अनुसार, शोधकर्ताओं ने मच्छरों की प्यास को कम करने का एक तरीका खोजा है जो उन्हें मनुष्यों को काटने से रोकने में मदद करता है। और साथ ही, जीका, डेंगू बुखार, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों को रोकने में भी मदद करेगा।

हालांकि मादा मच्छर आकार में बहुत छोटे होते हैं, लेकिन पृथ्वी पर ये सबसे खतरनाक जानवरों में से एक हैं। इन मच्छरों द्वारा प्रेषित रोगाणुओं के कारण कई बीमारियां होती हैं और हर साल इसके कारण लाखों की संख्या में लोगों की मौत हो जाती है।

लेकिन रॉकफेलर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गए इस नए तरीके से मादा मच्छरों का लोगों काटना बिल्कुल कम हो जाएगा। शोधकर्ताओं ने एडीज़ एजिप्टी मच्छरों पर एक अध्ययन किया। मच्छरों की यह प्रजाति डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और पीत ज्वर जैसी बीमारियों का कारण बनती है।

ये मच्छर मानव रक्त से बहुत आकर्षित होते हैं क्योंकि इसमें अंडे का उत्पादन करने के लिए मादा मच्छरों द्वारा आवश्यक प्रोटीन मौजूद होते हैं। एक बार जब मच्छर कुछ खा ले और उनका पेट भर जाये, तो भरे पेट वाले मच्छर सुरक्षित होते हैं क्योंकि वे कई दिनों तक फिर से हमला करने के कोई संकेत नहीं दिखाते हैं।

रॉकफेलर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का मानना ​​था कि मनुष्यों में भोजन के सेवन को विनियमित करने वाले न्यूरोपेप्टाइड Y या NYP रिसेप्टर्स, मच्छरों में भी ऐसा कर सकते हैं। इसलिए, शोधकर्ताओं ने मादा मच्छरों को एक नमकीन घोल पिलाया जिसमें इंसानों में NYP रिसेप्टर्स को सक्रिय करने वाली दवाइयां मिली हुई थीं। इसके परिणामस्वरूप, मानव रक्त के प्रति उनका आकर्षण कम होने लगा।

वैज्ञानिकों ने सभी 47 प्रकार के रिसेप्टर्स पर एक ही अध्ययन किया और पाया कि NPYLR7 एकमात्र ऐसा रिसेप्टर था जिसने मादा मच्छरों के काटने की आवश्यकता में कमी की।

लेकिन NPYLR7 इंसानों के आस-पास इस्तेमाल होने के लिए सुरक्षित नहीं था क्योंकि यह मानवों में NPY रिसेप्टर्स को भी सक्रिय कर सकता है। इसलिए वे अंततः "कंपाउंड 18" पर आकर ठहरे। कंपाउंड 18 एक ऐसा अणु है, जो बिना किसी लक्ष्य-निर्धारण प्रभाव के एडीज़ के मेजबान-व्यवहार को दबा देता है। इस कंपाउंड ने मानव रिसेप्टर्स को उत्तेजित किए बिना NPYLR7 के समान परिणाम दिखाए हैं।

"हम प्रभावित और आश्चर्यचकित थे कि मानव भूख को प्रभावित करने के लिए डिज़ाइन की गई दवाएं मच्छर की भूख को दबाने के लिए पूरी तरह से काम करती हैं", लेस्ली बी वोशैल, रॉबिन केमर्स नेस्टीन प्रोफेसर ने कहा

लौरा डुवैल, पोस्टडॉक्टरल सहायक जिन्होंने इस परियोजना का नेतृत्व किया, उनका कहना है, "यह परम धन्यवाद भोजन की तरह है।"

रॉकफेलर विश्वविद्यालय के निष्कर्षों की भविष्य के अनुसंधान और वेक्टर नियंत्रण दोनों के लिए दीर्घकालिक उपयोगिता है। मच्छरों को खिलाने के लिए रिसेप्टर की आवश्यकता को जानने के बाद, अब वैज्ञानिक उस स्थान को खोजने पर काम करना शुरू कर सकते हैं जहां यह एक कीट के शरीर में उत्पन्न होता है।

आईएस ग्लोबल बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के अनुसार, मच्छर हर साल 700,000 से अधिक लोगों की मौत का कारण बनते हैं और विश्व स्तर पर लगभग 17% संक्रामक रोगों को जन्म देते हैं।

रॉकफेलर विश्वविद्यालय द्वारा किए गए इस अध्ययन से इस संख्या को कम करने और मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है।

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