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रिपोर्टों के अनुसार, 2017-2018 में इन्फ्लूएंजा (फ्लू) के मौसम के दौरान अस्पताल में भर्ती होने वाले लगभग आधे रोगियों को हृदय रोग था।

फ्लू कर सकता है हृदय के रोगियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित

लेखक कनिका  •  
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फ्लू कर सकता है हृदय के रोगियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित
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अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी द्वारा किए गए एक नए शोध से पता चला है कि फ्लू और हृदय की विफलता आपस में जुड़ी हुई होती है। जैसे-जैसे फ्लू के मामलों की संख्या बढ़ती जाती है, वैसे ही दिल की विफलता के मामलों की संख्या भी बढ़ती जाती है।

यह अध्ययन 27 मार्च 2019 को जामा कार्डियोलॉजी नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। इस अध्ययन से पता चलता है कि फ्लू हृदय की समस्याओं के लोगों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए तो एक मामुली फ्लू और न्यूमोनिया गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। फ्लू एक संक्रामक श्वसन बीमारी है जिसके कारण बुखार, सिरदर्द, खांसी, थकान, मांसपेशियों और शरीर में दर्द हो सकता है।

फ्लू से पीड़ित अधिकांश लोग कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो जाते हैं। जबकि कुछ मामलों में लोगों में एक जटिलता विकसित हो जाती है जिससे निमोनिया हो सकता है, जो जीवन के लिए खतरा बन सकता है। जिन लोगों को दिल की समस्या होती है उन लोगों को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है क्योंकि फ्लू उन रोगियों के स्वास्थ्य को ओर ज्यादा खराब कर सकता है।

इस शोध के लिए, वैज्ञानिकों ने सेंटर्स फॉर डिजीज कण्ट्रोल एंड प्रिवेंशन से डेटा एकत्र किया था। इस अध्ययन में 451588 लोगों की जांच की गई, जिनकी आयु 35 से 84 के बीच थी। शोधकर्ताओं ने 2010 से 2014 तक फ्लू के चार मौसमों में चार भौगोलिक क्षेत्रों को भी जाँच में शामिल किया था।

शोधकर्ताओं ने 2042 रोगियों का बयान भी एकत्र किया जो हृदय गति रुकने के कारण अस्पताल में भर्ती थे। साथ ही, उन्होंने 1599 दिल के दौरे वाले मरीजों के रिकॉर्ड की जाँच भी की।

शोधकर्ताओं ने लोगों के सभी कारकों जैसे क्षेत्र, जाति, मौसम और आयु वर्ग आदि को ध्यान में रख कर जाँच की थी। इन कारकों के आधार पर प्रयोग ने प्रदर्शित किया कि फ्लू के कारण लोगों के अस्पताल में भर्ती होने में 5 प्रतिशत की वृद्धि के कारण, लोगों के हृदय की विफलता के काऱण अस्पताल में भर्ती होने में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

इस शोध ने यह भी संकेत दिया कि दिल की विफलता के कारण अस्पताल में भर्ती होने के 19 प्रतिशत मामलों में मौसमी इन्फ्लूएंजा योगदान देता है। हालांकि, जिन लोगों को दिल का दौरा पड़ा हो या जिन्हें दिल की बीमारी हो, उनमें फ्लू के कारण जटिलता बढ़ने का खतरा अधिक होता है।

रिपोर्टों के अनुसार, 2017-2018 में इन्फ्लूएंजा (फ्लू) के मौसम के दौरान अस्पताल में भर्ती होने वाले लगभग आधे रोगियों को हृदय रोग था। इस प्रकार, आम फ्लू सीधे दिल के दौरे और स्ट्रोक की संख्या में वृद्धि के साथ जुड़ा हुआ है।

हालांकि, हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इन्फ्लूएंजा से संक्रमित होने के हर जोखिम से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। हृदय रोग से पीड़ित लोगों को संक्रमित व्यक्ति से दूर रहना चाहिए। एक ओर बात जिस पर विचार करना चाहिए, वह यह है कि हृदय रोगियों को अपनी दवा लेने से नहीं चूकना चाहिए और नियमित स्वास्थ्य जांच करवाते रहना चाहिए, ताकि चिकित्सक आपके स्वास्थ्य की स्थिति जान सकें।

रिपोर्टों के अनुसार, वायरल फ्लू शरीर पर एक दबाव डाल सकता है जिसके परिणामस्वरूप रक्तचाप, हृदय गति और हृदय की कुल कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। यह दबाव स्ट्रोक या दिल के दौरे का कारण बनता है, इसलिए हृदय रोगी के लिए यह आवश्यक है कि वह अपनी अतिरिक्त देखभाल करे और जितना हो सके वायरल फ्लू से बचे।

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