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दुनिया भर में लगभग 17 करोड़ लोग उम्र से संबंधित मैक्युलर डीजेनेरेशन (एक नेत्र विकार) से पीड़ित हैं।

जीन थेरेपी से खोई हुई दृष्टि वापस मिल सकती है

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जीन थेरेपी से खोई हुई दृष्टि वापस मिल सकती है
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कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि दृष्टिपटल में ग्रीन-लाइट प्रापक के लिए एक जीन डालने से वे खोई हुई दृष्टि वापस लाने में सक्षम हो सकते हैं। यह अध्ययन 15 मार्च, 2019 को नेचर कम्युनिकेशन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

वैज्ञानिकों की टीम ने नेत्रहीन चूहों पर इस नई चिकित्सा का प्रयोग किया, जिनकी आंखों में ग्रीन-लाइट प्रापक डाला गया। इसके लिए शोधकर्ताओं ने एक विषाणु विकसित किया है, जो दृष्टिपटल की नाड़ीग्रन्थि कोशिकाओं के लिए लक्षित होता है। नाड़ीग्रन्थि कोशिकाएं मस्तिष्क के अंदर दृश्य चित्र बनाने में मदद करती हैं।

इस प्रयोग में, अनुसंधान दल ने इस विषाणु को चूहें की आंख में डाला। जिसके कारण विषाणु में मौजूद जीन ने नाड़ीग्रन्थि कोशिकाओं को प्रकाश संवेदी बना दिया, जो सामान्य रूप से प्रकाश के प्रति असंवेदनशील होती हैं। इसने नाड़ीग्रन्थि कोशिकाओं को मस्तिष्क में संकेत भेजने और दृष्टि में परिवर्तित होने के लिए संभव बनाया। शोधकर्ता 90 प्रतिशत नाड़ीग्रन्थि कोशिकाओं को प्रकाश-संवेदी कोशिकाओं में बनाने में सफल रहे हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, यही उपचार मानव दृष्टि का इलाज करने के लिए उपयोग किया जा सकेगा। हालांकि, उन्हें कई और विषाणु कणों की आवश्यकता होगी क्योंकि मानव की आंख में चूहों की तुलना में एक हज़ार गुना अधिक नाड़ीग्रन्थि कोशिकाएं होती हैं।

एहूड इसाकॉफ, यू सी बर्कले में आणविक और कोशिका जीव विज्ञान के प्राध्यापक ने कहा , "आप इस विषाणु को एक व्यक्ति की आंख में डालोगे और फिर कुछ महीने बाद, वे थोड़ा देख पाएंगे। दृष्टि पटल के तंत्रिका के अपकर्ष संबंधी रोगों के साथ, प्रायः सभी लोग या तो इसे रोकने या इसकी गति को धीमा करने की कोशिश करते हैं। लेकिन कुछ ऐसा जो कुछ महीनों में एक छवि को पुनर्स्थापित कर दे - यह सोचने के लिए एक अद्भुत बात है।"

शोधकर्ता अब इस नए प्रकाश संवेदक को मानव उपचार के लिए उच्च प्रतिशत नाड़ीग्रन्थि कोशिकाओं में डालने की कोशिश कर रहे हैं।

इस शोध के लिए, वैज्ञानिकों की टीम और अच्छा शोध करने के लिए धन जुटा रही है जिसमें जीन थेरेपी को मानव परीक्षण में उपयोग किया जा सके। शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस शोध के लिए उन्हें इस प्रयोग को सफलतापूर्वक लागू करने में केवल तीन साल लगेंगे।

रिपोर्टों के अनुसार दुनिया भर में लगभग 170 मिलियन (17 करोड़) लोग उम्र से संबंधित मैक्युलर डीजेनेरेशन (एक नेत्र विकार) से पीड़ित हैं। इसके अलावा, 1.7 मिलियन (17 lakh) लोगों को आनुवंशिक अंधापन होता है, जिसे रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा कहा जाता है, जो एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है जो दृष्टि पटल में कोशिकाओं के टूटने या क्षति का कारण बनता है। इस बीमारी से पीड़ित लोग 40 साल की उम्र तक अंधे हो जाते हैं।

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि यह उपचार उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा, जो दृष्टि पटल के पतन के कारण अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं। इस उपचार की मदद से नेत्रहीन लोगों को पढ़ने, वीडियो देखने या दिन के मूल कार्यों को करने के लिए पर्याप्त दृष्टि मिल जाएगी।

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