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हैदराबाद में टीबी की जागरूकता के लिए स्थानीय अभियान।

सरकार द्वारा 2025 तक टीबी को समाप्त करने की योजना

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सरकार द्वारा 2025 तक टीबी को समाप्त करने की योजना
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भारत के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 5 फरवरी, 2019 को एक प्रेस प्रकाशनी जारी की है। इस प्रकाशनी में टीबी को जड़ से ख़त्म करने के लिए चलाए जा रहे 2017-2025 राष्ट्रीय रणनीतिक योजना के तहत 2018 की उपलब्धियां बताई गयी हैं।

इस योजना के तहत राज्य की खामियों, लक्ष्यों, कारणों और भविष्य की रणनीतियां भी सरकार द्वारा साझा की गयी है। यह जानकारी पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार पर प्रकाशित की गई है।

वर्ष 2017 में, भारतीय प्रधान मंत्री, नरेंद्र मोदी ने देश से टीबी को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना 2017-2025 की घोषणा की थी। यह लक्ष्य विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा घोषित 2030 के वैश्विक लक्ष्य से 5 वर्ष आगे है।

सरकार ने टीबी बीमारी के प्रमुख क्षेत्रों को लक्षित करने के लिए निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी की शुरुआत की। इस साझेदारी को जॉइंट एफर्ट फॉर द एलिमिनेशन ऑफ ट्यूबरकुलोसिस (JEET) नाम दिया गया था। इस योजना को मई 2018 में सफलतापूर्वक शुरू किया गया था।

राज्य की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में निजी क्षेत्रों में टीबी रोगियों की 40 प्रतिशत वृद्धि देखी गई है। कार्यक्रम के तहत, 8 प्रतिशत रोगियों को टीबी विरोधी दवाएं दी गई हैं। इसके अलावा, 35 प्रतिशत उपचार समर्थकों और 8 प्रतिशत निजी चिकित्सकों को 25 जनवरी, 2019 तक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से भुगतान प्रोत्साहन द्वारा लाभान्वित किया गया है।

डॉ मारियो रविग्लियोन, डब्लूएचओ ग्लोबल टीबी कार्यक्रम के निदेशक ने कहा, "जब मैंने मुंबई में 10 लाख से अधिक लोगों के साथ सबसे बड़ी झुग्गी का दौरा किया, तो मैंने देखा कि यह देखभाल का काम करने का एक प्रतिमान है जिसमें निजी चिकित्सकों को एक एनजीओ के समर्थन के माध्यम से टीबी का पता लगाने और उसका वर्णन करने का अधिकार है और मरीजों को वाउचर के प्रोत्साहन के माध्यम से टीबी सेवाओं तक पहुंचने के लिए जुटाया गया है।"

श्री जेपी नड्डा, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ने कहा, “जनसंख्या के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना सरकार के लिए प्राथमिकता है और हम टीबी से शुन्य मौतें हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और इसलिए हमें नए सिरे से रणनीति बनाने की जरूरत है, नए सिरे से सोच और 2025 तक टीबी समाप्त करने के लिए हमारे दृष्टिकोण को आक्रामक होना चाहिए।”

दुनिया भर में, टीबी मौत के शीर्ष 10 कारणों में से एक है। वर्ष 2016 में, टीबी के कारण भारत में 4,23,000 से अधिक मौतें हुईं थी। हालांकि मृत्यु दर में 12% की गिरावट आई है, लेकिन भारत में टीबी के नए मामलों की संख्या में केवल 3% की गिरावट आई है।

डब्लूएचओ की रिपोर्टके अनुसार, विश्वभर में 2017 में 10 मिलियन (1 करोड़) लोगों में टीबी की बीमारी पायी गयी है जिसमें से 2.79 मिलियन (27.9 लाख) टीबी के नए मामले भारत के थे। सभी देशों में टीबी के मामले देखे गए हैं और भारत में कुल 27 प्रतिशत मरीज टीबी के कारण बीमार पड़ते हैं।

टीबी मानव शरीर के अंगों में जीवाणुओं के कारण होता है, यह जीवाणु विशेष रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। ये जीवाणु या तो आपको बीमार कर सकते हैं या नहीं। क्योंकि अव्यक्त टीबी में, रोगी बीमार महसूस नहीं करता है और सक्रिय टीबी में, रोगियों को खराब खांसी हो सकती है जो दो सप्ताह से अधिक समय तक रह सकती है।

टीबी के लक्षण शरीर के संक्रमित भाग पर निर्भर करते हैं। कुछ लक्षणों में खराब खांसी, छाती में दर्द, वजन कम होना, भूख न लगना, कमजोरी, थकान, बुखार, ठंड लगना या रात को पसीना आना शामिल हैं। टीबी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हवा के माध्यम से फैल सकती है।

सरकार ने सभी टीबी रोगियों का शीघ्र निदान सुनिश्चित किया है। टीबी रोगी की प्रारंभिक अवस्था में दवा प्रतिरोध को देखने के लिए जांच की जाती है। प्रारंभिक पहचान और उपचार के लिए नैदानिक क्षमता में वृद्धि इस बीमारी के कारण मृत्यु दर में कमी लाएगी।

सरकार ने कई उपचारों को भी शुरू किया है जैसे कि प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाओं के प्रबंधन के लिए एकीकृत तंत्र (एडीआर)। यह टीबी के निदान और उपचार के दौरान रोगियों और परिवार को परामर्श का प्रावधान है।

रोगी अनुपालन में सुधार के लिए, कई शिकायत निवारण तंत्र भी शुरू किए गए हैं। इसके अलावा, निक्षय पोषण योजना सभी टीबी रोगियों को मासिक 500 रूपए देती है। यह टीबी के उपचार के दौरान पोषण संबंधी सहायता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।

श्री अश्विनी कुमार चौबे, राज्य मंत्री (स्वास्थ्य और परिवार कल्याण) ने कहा, "सरकार 2025 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने और लक्ष्यों में किसी संशोधन पर विचार नहीं करने के लिए प्रतिबद्ध है।"

राष्ट्रीय रणनीतिक योजना के तहत, लगभग 85 जिलों में सार्वजनिक-निजी सहायता संस्थान शुरू किये गये थे। भारतीय चिकित्सा संघ भी इस कार्यक्रम के बड़े पैमाने पर जागरूकता के लिए योजना में शामिल है।

राज्यों को टीबी रोगियों के लिए टीबी-विरोधी दवाएं प्रदान की जाती हैं। सभी राज्यों को भी कार्यक्रम की गति बनाए रखने के लिए सभी स्तरों पर मार्गदर्शन दिया जाता है।

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