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इस कार्यक्रम के तहत, देश भर में पांच साल से कम उम्र के 17 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो की बुँदे पिलाई गई।

भारत सरकार ने 2019 के लिए पल्स पोलियो कार्यक्रम शुरू किया

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भारत सरकार ने 2019 के लिए पल्स पोलियो कार्यक्रम शुरू किया
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भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने 2019 के लिए पल्स पोलियो कार्यक्रम शुरू किया है। यह घोषणा 9 मार्च 2019 को राष्ट्रपति भवन में की गई थी।

पोलियो क्या है?

पोलियोमाइलाइटिस (पोलियो) एक घातक संक्रामक विषाणुजनित बीमारी है। यह विषाणु एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है और संक्रमित व्यक्ति के मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी को प्रभावित कर सकता है जिससे लकवा हो सकता है।

पोलियो के शुरुआती लक्षण हैं बुखार, सिरदर्द, उल्टी, अंगों में दर्द, थकान और गर्दन में अकड़न। विषाणु तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है। पोलियो मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करता है। अभी तक पोलियो का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसे टीकाकरण द्वारा रोका जा सकता है।

पोलियो से बचने के लिए दो प्रकार के टीके उपलब्ध हैं। एक है ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी), जिसे जन्म के समय, 6 वें, 10 वें और 14 वें सप्ताह के दौरान और 16-24 महीने की उम्र में दिया जाता है। दूसरे प्रकार का टीका इंजेक्टेबल पोलियो वैक्सीन (IPV) है जो एक अतिरिक्त खुराक है।

भारत में पोलियो का इतिहास

पोलियो भारत में सबसे पुरानी पाई जाने वाली बीमारियों में से एक मानी जाती है। इस बीमारी का अस्तित्व इतिहास में बहुत पुराना है।

1990 की शुरुआत में, पोलियो भारत में व्यापक रूप से फैला हुआ था। यह बीमारी बहुत आम थी। लगभग 500 से 1000 बच्चे रोज़ लकवा से ग्रस्त हो रहे थे।

भारत सरकार और लोगों द्वारा निरंतर और असाधारण प्रयासों के साथ प्रसारण देखा गया। भारत सरकार ने प्रत्येक वर्ष 10 बार नियमित रूप से वार्षिक पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान किया।

25 फरवरी, 2012 को, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को, पोलियो से ग्रस्त देशों की सूची से हटा दिया था।

भारत सरकार द्वारा नियमित प्रयासों के साथ, भारत अब एक पोलियो-मुक्त राष्ट्र है। भारत से पोलियो हट गया है, लेकिन इसे बनाए रखना जरूरी है।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम

भारत सरकार ने अब एक देशव्यापी पल्स पोलियो कार्यक्रम शुरू किया है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस की पूर्व संध्या पर शुरू किया गया था। इस दिन भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने बच्चों को पोलियो की बुँदे पिलाई।

यह कदम देश से पोलियो उन्मूलन को बनाए रखने के लिए भारत सरकार के अभियान का हिस्सा है। इस कार्यक्रम के तहत, देश भर में पांच साल से कम उम्र के 17 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो की बुँदे पिलाई गई।

भारत सरकार बच्चों को अधिक से अधिक बीमारियों से बचाने के लिए प्रयास कर रही है। इसका उद्देश्य देश के हर बच्चे को टीके उपलब्ध कराना है।

हाल ही में यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत रोटावायरस वैक्सीन, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन और मीजल्स-रूबेला वैक्सीन जैसे कई नए टीके प्रस्तुत किये गए हैं।

संबंधित लोग क्या कह रहे हैं?

श्री जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री स्वास्थ्य और परिवार कल्याण ने कहा, “देश के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के साथ, हमने 90% से अधिक पूर्ण टीकाकरण पहुंच प्राप्त करने के लिए अपने लक्ष्य में तेजी लाने के लिए मिशन इन्द्रधनुष भी शुरू किया है। मिशन इन्द्रधनुष के माध्यम से 3.39 करोड़ से अधिक बच्चों और 87 लाख गर्भवती महिलाओं को टीका लगाया गया है।”

श्री जे.पी. नड्डा ने यह भी कहा, "हमारे बच्चों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए, सरकार ने इंजेक्शन निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन को अपने नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में भी पेश किया है।"

भारत सरकार यह दावा करती है कि शिशु मृत्यु दर में गिरावट हुई है। 2014 में शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 जीवित जन्मों में 39 थी और वर्ष 2017 में, यह घटकर 32 प्रति 1000 जीवित जन्म हो गई है।

भारत सरकार देश को बीमारी और संक्रमण मुक्त बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

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