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जिका विषाणु पहली बार 2015 में अमेरिका में रिपोर्ट किया गया था।

डेंगू का इतिहास आपको जिका विषाणु से बचा सकता है

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डेंगू का इतिहास आपको जिका विषाणु से बचा सकता है
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नए अध्ययनों से पता चला है कि जिन बच्चों को अतीत में डेंगू का सामना करना पड़ा था, उनमें मूल रूप से जिका विषाणु से संक्रमित होने का खतरा कम होता है।

यह अनुसंधान निकारागुआ में 3000 हजार से अधिक बच्चों पर किया गया था, जिनकी उम्र 2 से 14 वर्ष के बीच थी। पहले विशेषज्ञों का मानना था कि डेंगू से संक्रमित बच्चों में गंभीर जिका विषाणु से पीड़ित होने की संभावना ज़्यादा है, लेकिन, हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि डेंगू विषाणु वास्तव में जिका विषाणु के खिलाफ प्रतिरक्षा की तरह काम करता है।

यह अनुसंधान PLOS मेडिसिन नामक पत्रिका में प्रकाशित की गई है। इस अनुसंधान को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज (NIAID) द्वारा समर्थित किया गया था जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान का एक हिस्सा है।

यह अनुसंधान विश्वविद्यालयों, संस्थानों और स्वास्थ्य केंद्रों के एक समूह द्वारा आयोजित किया गया था जिसमें मानागुआ, निकारागुआ के स्वास्थ्य मंत्रालय, मिशिगन विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय और सस्टेनेबल साइंस इंस्टिट्यूट शामिल हैं।

जिका विषाणु की सुचना पहली बार अमेरिका में 2015 में मिली थी। जबकि डेंगू वायरस दशकों से इस क्षेत्र में व्याप्त था। जिका विषाणु और डेंगू दोनों में समान लक्षण होते हैं जिनमें जोड़ों में दर्द, दाने और बुखार शामिल हैं।

यह दोनों विषाणु फ्लेविवायरस से संबंधित हैं, इसलिए यह कहना ठीक होगा कि डेंगू की प्रतिरक्षा जिका विषाणु के लिए संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकती है। एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) मच्छर जिका विषाणु और डेंगू दोनों को संक्रमित करने के लिए जिम्मेदार है।

कुछ गंभीर मामलों में, यह दर्ज किया गया है कि जिका विषाणु मस्तिष्क संबंधी विकारों को जन्म दे सकता है। कभी-कभी गर्भावस्था के दौरान यह शिशुओं के विकास में समस्या पैदा कर सकता है या जन्म दोष पैदा कर सकता है, जिसे जन्मजात जिका सिंड्रोम कहा जाता है। हालाँकि, यह सभी के लिए सच नहीं है, बहुत से लोगों में जिका विषाणु या डेंगू से संक्रमित होने पर कोई लक्षण नहीं दिखते हैं।

मानव जिका विषाणु का पहला मामला युगांडा में 1952 में किए गए रक्तजनित अध्ययनों में पाया गया था। जिका विषाणु 2015 में ब्राजील में आग की तरह फैल गया, इस महामारी के परिणामों ने दक्षिण, उत्तर, मध्य अमेरिका और कैरेबियन द्वीपों को प्रभावित किया। निकारागुआ में, 2016 में जिका विषाणु मामले की पहचान की गई थी।

प्रयोगों और केस अध्ययनों की एक श्रृंखला के बाद, यह देखा गया है कि कभी-कभी दूसरा डेंगू संक्रमण पहले की तुलना में बहुत अधिक हानिकारक और कठोर हो सकता है। हालांकि जिका और डेंगू विषाणु कुछ सामान्य आधार साझा करते हैं, जिससे यह जानना अनिवार्य हो जाता है कि यदि जिका विषाणु के बाद डेंगू संक्रमण होता है, तो वह अधिक नुकसान पहुंचा सकता है या नहीं।

लगभग 2 से 14 वर्ष की आयु के 3,893 बच्चों के अवलोकन के तहत, लगभग 1,356 बच्चे जिका से संक्रमित थे और उनमें से 560 इसके लक्षण दिखाते थे। आरटी-पीसीआर (RT-PCR) वह विधि है जो शरीर में जिका विषाणु का पता लगाती है।

अध्ययन लेखक ने 743 में से 3,027 संक्रमित बच्चों के इतिहास को निर्धारित करने के लिए बाल चिकित्सा जांच की 15 साल पुरानी जानकारी का उपयोग किया था जिन्हें डेंगू संक्रमण था। यह भी दर्ज किया गया है कि मार्च 2015 से पहले डेंगू से संक्रमित बच्चों को लाक्षणिक और नैदानिक रूप से जिका विषाणु से प्रभावित होने का खतरा कम था।

लेखकों और रिपोर्टों के अनुसार, डेंगू से प्रभावित होने वाले बच्चों ने प्रारंभिक चरण में जिका विषाणु के संक्रमण के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता का निर्माण किया है। हालांकि, जिका विषाणु और डेंगू के बीच पार संरक्षण के प्रतिरक्षात्मक तंत्र की प्रक्रिया की जांच करने और पता लगाने की आवश्यकता है।

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