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भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस सी को खत्म करना है।

भारत ने विषाणु संबंधी हेपेटाइटिस के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की

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भारत ने विषाणु संबंधी हेपेटाइटिस के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना शुरू की
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श्री अश्विनी कुमार चौबे, केंद्रीय राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, ने देश से विषाणु संबंधी हेपेटाइटिस के उन्मूलन के लिए एक कार्य योजना शुरू की है। यह घोषणा 24 फरवरी 2019 को मुंबई में की गई थी।

हेपेटाइटिस एक विषाणु संबंधी संक्रमण है जो जिगर की सूजन का कारण बनता है। यह एक संक्रमित व्यक्ति के रक्त के संपर्क में आने से फैलता है या तब जब कोई व्यक्ति संक्रमणित भोजन या पानी के संपर्क के माध्यम से कोई अपशिष्ट पदार्थ ले लेता है।

हेपेटाइटिस से पीड़ित लोगों की संख्या बहुत बड़ी है और यह चिंता का एक गंभीर कारण है। विषाणु संबंधी हेपेटाइटिस कई प्रकार के होते हैं जिन्हें हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस डी और हेपेटाइटिस ई के रूप में जाना जाता है।

हर साल हेपेटाइटिस के कारण हजारों लोग संक्रमित और प्रभावित होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लगभग 40 मिलियन (4 करोड़) लोग भारत में हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हैं। साथ ही, भारत में लगभग 12 मिलियन (1.2 करोड़) लोग हेपेटाइटिस सी से संक्रमित हैं।

उठाए गए कदम

भारत सरकार ने 69वें विश्व स्वास्थ्य सभा में जनता को सूचित किया कि वह राष्ट्र को हेपेटाइटिस मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

भारत हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी से पीड़ित लोगों को नि: शुल्क निदान और आजीवन दवाईयां प्रदान कर रहा है। भारत उन कुछ देशों में से है, जिन्होंने हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी का प्रबंधन करना शुरू किया है।

शुरू की गई योजना का लक्ष्य और उद्देश्य हेपेटाइटिस के खिलाफ लड़ना और वर्ष 2030 तक देशभर से हेपेटाइटिस सी को खत्म करना है। सरकार का उद्देश्य हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी से संबंधित रुग्णता और मृत्यु दर को कम करना भी है।

हेपेटाइटिस बी के निदान और प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश भी दिए गए थे। योजना के लक्ष्यों में से एक और हेपेटाइटिस बी के लिए गर्भवती महिलाओं की जांच करना है, विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में जहां उचित प्रसव संस्थान 80% से कम हैं। आवश्यकता पड़ने पर सरकार टीकाकरण भी प्रदान करेगी।

सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली महत्वपूर्ण रणनीतियों में से एक देश में री-यूज प्रिवेंशन (RUP) टीके के उपयोग को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही सरकार ने इस योजना के लिए एक आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च की है।

संबंधित लोग क्या कह रहे हैं?

श्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा, “हमारा उद्देश्य 2030 तक हेपेटाइटिस को खत्म करना है। मुझे विश्वास है कि यह कार्य सफल होगा। भारत हेपेटाइटिस के लिए विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य प्रबंधन करने की योजना बना रहा है, जो प्रभावी उपचार के लिए आवश्यक है। डॉक्टरों, विशेषज्ञों और राज्य सरकारों की भागीदारी के साथ एक एकीकृत योजना तैयार की जा रही है।”

श्री एकनाथ एस. शिंदे, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि हम NVHCP के माध्यम से हेपेटाइटिस के खिलाफ लड़ाई जीतेंगे। जब पूरा देश एक कारण के लिए एक साथ आता है, तो हमें जीतने से कोई नहीं रोक सकता।”

प्रभाव

सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के साथ, एक रोगी के लिए हेपेटाइटिस बी के उपचार की लागत काफी कम हो गई है। इसके उपचार की पिछली लागत का अनुमान $800 (लगभग ₹57,000) प्रति कोर्स लगाया गया था। अब यह लागत लगभग $35 (लगभग ₹2,500) प्रति कोर्स हो गई है। भारत सरकार ने अगले तीन वर्षों के लिए इस योजना के लिए ₹907 करोड़ रुपये दिए हैं।

भारत सरकार, राज्य सरकार और अन्य हिस्सेदार मिलकर इस योजना को मजबूत बनाने और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेंगे।

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