Pharmacy Website
Clinic Website
TabletWise.com TabletWise.com
 
हर दिन दुनिया भर में कई लोग ओपियोइड दवाओं के अत्यधिक उपयोग के कारण मर रहे हैं।

अमेरिका और भारत में ओपियोइड विवाद संबंधी जनवरी 2019 की जानकारी

लेखक   •  
शेयर
अमेरिका और भारत में ओपियोइड विवाद संबंधी जनवरी 2019 की जानकारी
Read in English

ओपियोइड विवाद दुनिया के कई हिस्सों में ओपियोइड दवाओं के दुरुपयोग और लत में तेजी से वृद्धि होने को कहा जाता है। यह विवाद कई सालों से हजारों लोगों की जान लेने के लिए हमेशा चर्चा में रहा है।

हर दिन दुनिया भर में कई लोग ओपियोइड दवाओं के अत्यधिक उपयोग के कारण मर रहे हैं।

ओपियोइड अत्यधिक नशे की लत वाली दवाओं की एक श्रेणी है। ये दवाएं ज्यादातर मध्यम से गंभीर दर्द का इलाज करने के लिए उपयोग की जाती हैं। ओपियोइड्स में डॉक्टर की सलाह से ली जाने वाली कुछ दर्द निवारक दवाएं, हेरोइन, और कृत्रिम ओपिओइड जैसे कि फेंटेनाइल शामिल हैं।

हाल ही में अमेरिका में एक सबसे अमीर परिवार, सैकलर परिवार के खिलाफ अदालत में एक मामला दर्ज किया गया है। सैकलर परिवार 2000 के दशक के प्रारंभ से ही ओपियोइड विवाद का एक हिस्सा रहा है। यह परिवार पर्ड्यू फार्मा नामक कंपनी का मालिक है जो एक ऑक्सीकॉन्टिन नामक ऑपियोइड दवा बनाने के लिए जाना जाता है।

पर्ड्यू फार्मा कंपनी कई मुक़दमों का निशाना रही है। इस कंपनी को वर्षों से कई ओपिओइड दर्द निवारक दवाओं के खतरों के बारे में डॉक्टरों और रोगियों को गुमराह करने के लिए दोषी ठहराया जाता है।

मैसाचुसेट्स के अटॉर्नी जनरल ने 15 जनवरी 2019 को अदालत में दर्ज हुए मामले में पर्ड्यू फार्मा के आंतरिक संचार और ईमेल के पर्चे जमा करवाए। इन ईमेलों में, पर्ड्यू फार्मा के पूर्व अध्यक्ष रिचर्ड सैकलर को नशे की लत वाले लोगों पर दोष लगाते हुए देखा जा सकता है।

मुकदमे में यह भी उल्लेख किया गया है कि पर्ड्यू फार्मा के संस्थापक के बेटे सैकलर ने बिक्री प्रतिनिधियों को डॉक्टरों को ऑक्सीकॉन्टिन दर्द निवारक की उच्च खुराक निर्धारित करने की सलाह देने पर ज़ोर दिया क्योंकि वे उनके लिए अधिक लाभदायक है।

मुकदमे में यह भी शामिल था कि कंपनी ने उन डॉक्टरों को दवा का प्रचार किया जो ओपिओइड की सलाह देते थे, जिसके परिणामस्वरूप चिकित्सकों को अपने लाइसेंस से हाथ धोना पड़ा।

कंपनी ने ऑक्सीकॉन्टिन की बिक्री बढ़ाने के लिए फार्मेसी डिस्काउंट कार्ड का भी इस्तेमाल किया। अदालत में दर्ज मामले में यह भी कहा गया कि सैकलर परिवार को पता था कि पर्ड्यू फार्मा ने ऑक्सीकॉन्टिन की बिक्री और दुरुपयोग की सूचना नहीं दी थी।

दवा के आक्रामक प्रचार ने ओपिओइड विवाद को जन्म दिया। जब से ऑक्सीकॉन्टिन बाजार में आया है, अमेरिका में 200,000 से अधिक लोग डॉक्टर की सलाह से लिए आने वाले ओपिओइड के अत्यधिक उपयोग से मर चुके हैं।

एक अन्य बड़ी घटना दिसंबर 2018 में हुई जिसने ओपियोइड विवाद में आग में घी डालने जैसा काम किया। एक भारतीय मूल के डॉक्टर, राजेंद्र बोथरा को धोखाधड़ी करके अवैध रूप से 13 मिलियन (लगभग 1.3 करोड़ रुपये) से अधिक की दर्द निवारक दवाओं की सलाह देने के मामले में आरोपित किया गया था।

यह यूएस के इतिहास में सबसे बड़ा स्वास्थ्य देखभाल संबंधी धोखाधड़ी मामलों में से एक है, जिसमें 464 मिलियन अमरीकी डालर (लगभग 3313 करोड़ रुपये, वर्तमान विनिमय दर 1 USD = 71 INR के अनुसार) की धोखाधड़ी शामिल हैं। राजेंद्र बोथरा को जनवरी 2019 को रिकॉर्ड 7 मिलियन (लगभग 50 करोड़ रुपये) के बॉन्ड पर मुक्त किया गया है।

बोथरा पिछले महीने से पांच अन्य चिकित्सकों के साथ सलाखों के पीछे है। वह उच्च प्रोफ़ाइल भारतीय अमेरिकी कार्यकर्ताओं में से एक हैं और उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, पद्‍मश्री से सम्मानित किया जा चुका है।

बोथरा को जीपीएस ट्रैकर के साथ घरेलू कस्टडी के तहत रिहा किया जाएगा और उसे अपनी साड़ी संपत्ति की पहचान दंड के तहत करनी होगी।

अमेरिकी अटॉर्नी मैथ्यू श्नाइडर ने मंगलवार को अदालत की सुनवाई में भाग लिया। उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम मिलकर तय करेंगे कि इस बॉन्ड को मंज़ूर करना है या नहीं।

ओपियोइड विवाद से संबंधित एक और वाक्य हाल ही में मुंबई में हुआ। महाराष्ट्र पुलिस के एंटी-नारकोटिक्स सेल ने भारी मात्रा में फेंटेनाइल नामक सिंथेटिक दवा जब्त की।

पुलिस ने 26 दिसंबर 2018 को मुंबई में एक कार से जब्त की गई 100 किलोग्राम फेंटेनाइल का मूल्य 100 करोड़ रुपये पाया। यह संदेह है कि यह दवा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिक्री के लिए थी।

इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह कहा जाता है कि फेंटेनाइल का उपयोग कैंसर से पीड़ित रोगियों के लिए किया जाता है। लेकिन लोग इसे हेरोइन के साथ मिलाकर एक मनोरंजक दवा के रूप में उपयोग कर रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि गुजरात में छोटी फार्मा कंपनियां भूमिगत बाजार में फेंटेनाइल बनाने और वितरित करने में शामिल हो सकती हैं।

भारतीय राज्य पंजाब से आई एक अन्य खबर ने भी चल रहे ओपियोइड विवाद में योगदान दिया। राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सत्ता में आने के चार सप्ताह के भीतर पंजाब को नशा मुक्त राज्य बनाने की कसम खाई।

राज्य की दवा नीति के अनुसार, छह नशीली दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध है - ट्रामाडोल, टैनेंटाडोल, कोडीन, डिपेनोक्सिलेट, अल्प्राजोलम, और बुप्रेनोर्फिन।

हालांकि, इस नीति के क्रियान्वयन में लापरवाही और अंतर-राज्यीय सीमाओं के कारण पंजाब में इनमें से दो दवाओं की तस्करी अभी भी की जा रही है। इन दवाओं को अवैध रूप से आसपास के राज्यों से ट्रेनों, बसों और छोटी डाक कंपनियों के माध्यम से आयात किया जाता है।

ये दवाएं मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश और हरियाणा की दवा कंपनियों द्वारा बनाई जाती हैं।

पिछले साल से, राज्य का खाद्य और औषधि प्रशासन दवा की दुकाओं की स्कैनिंग और जांच कर रहा है और सैकड़ों केमिस्टों के लाइसेंस निलंबित कर रहा है। लुधियाना और बठिंडा की कई दवा की दुकानें इससे प्रभावित हुई हैं।

हर साल दुनिया भर में हज़ारों लोग ओपियोइड दवाओं की अधिक मात्रा के कारण मर जाते हैं। ओपियोइड दवाएं दुनिया भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य और कानून प्रवर्तन के लिए एक बड़ा खतरा बन रही हैं।

पिछले दो वर्षों में ओपियोइड के अत्यधिक उपयोग के कारण होने वाली मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है।

अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग द्वारा उपलब्ध किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2016 से 2017 तक ओपियोइड संबंधित दवाओं के अत्यधिक उपयोग के कारण हर दिन 130 से अधिक लोगों की मौत हुई।

अमेरिका में 2017 में नशीली दवाओं से संबंधित लगभग 72,000 मौतें हुईं। इन मौतों में सबसे ज़्यादा गिनती सिंथेटिक ओपियोइड जैसे ओ फेंटेनाइल और फेंटेनल एनालॉग्स के कारण हुई है जिसमें लगभग 30,000 लोगों द्वारा अत्यधिक उपयोग शामिल था।

ओपियोइड से संबंधित मृत्यु दर में यह वृद्धि एक चिंता का विषय है क्यूंकि इससे दुनिया भर में कई लोग प्रभावित हो रहे हैं।

ताज़ा खबर

TabletWise.com