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कोरल रीफ्स समुद्र के अम्लीकरण और बढ़ते तापमान से खतरों का सामना कर रहे हैं।

प्रवाल भित्तियों की उत्पत्ति की खोज

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प्रवाल भित्तियों की उत्पत्ति की खोज
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प्रवाल भित्तियाँ या ’समुद्र का वर्षावन’ या कोरल पृथ्वी के सबसे विविध इको-सिस्टमों में से एक हैं। प्रवाल भित्तियाँ (कोरल) पूरे विश्व के महासागरों में पाई जाती हैं। लेकिन, समुद्र के पानी में कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण के कारण महासागर अम्लीय हो रहे है। साथ में, समुद्र का तापमान भी बढ़ रहा है। इससे दुनिया भर में प्रवाल भित्तियों का खतरा है।

सितंबर 2019 से, शोधकर्ताओं की एक टीम प्रवाल भित्तियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए हवाई में एक अभियान शुरू करेगी। शोधकर्ताओं यह समझना चाहते हैं की पृथ्वी की जलवायु का प्रवाल भित्तियाँ पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

जीवाश्म प्रवाल भित्ति ढूंढने के लिए शोधकर्ता हवाई के आसपास महासागर के नीचे 11 स्थानों पर ड्रिल करेंगे। जीवाश्म प्रवाल भित्ति की जानकारी वैज्ञानिकों को पिछले 500,000 वर्षों से समुद्र में समुद्र-स्तर के परिवर्तन के इतिहास का अध्ययन करने की अनुमति देगी।

इस अभियान को हवाई ड्रोनड रीफ्स अभियान नाम दिया गया है। अभियान यूरोपीय कंसोर्टियम फॉर ओशन रिसर्च ड्रिलिंग (ECORD) द्वारा संचालित किया जा रहा है। ECORD एक अंतरराष्ट्रीय निकाय है जो वैज्ञानिक ड्रिलिंग मिशन का संचालन करता है।

अध्ययन से वैज्ञानिक वैश्विक जलवायु परिवर्तन और वैश्विक समुद्र तल परिवर्तन के बीच संबंधों की जांच कर पायेंगे। यह अभियान वैज्ञानिकों को मानव गतिविधि के कारण जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन करने के लिए एक रूपरेखा विकसित करने में मदद करेगा।

जीवाश्म प्रवाल भित्तियों से रिकॉर्ड वैज्ञानिकों को यह समझने की अनुमति देगा कि प्रवाल भित्तियाँ जलवायु और समुद्र-स्तर में त्वरित परिवर्तनों का जवाब कैसे देती हैं। वैज्ञानिक यह समझना चाहते हैं कि प्रवाल भित्तियाँ कैसे अपने प्राकृतिक वातावरण में गड़बड़ी से उभरती हैं।

परियोजना के ड्रिलिंग चरण को पूरा होने में 60 दिन लगेंगे। इसके बाद, प्रवाल भित्तियों (कोरल) की उत्पत्ति और इतिहास के आसपास के प्रमुख सवालों का जवाब देने के लिए ड्रिल किए गए कोर का विश्लेषण किया जाएगा।

ड्रिल किए गए जीवाश्मों का आधा-भाग भविष्य के किसी भी शोध की आवश्यकता के लिए संरक्षित किया जाएगा। मिशन के दौरान एकत्र किए गए जीवाश्म और शिपबोर्ड डेटा को किसी भी वैज्ञानिक शोधकर्ता को उपलब्ध कराया जाएगा जो इसका अध्ययन करना चाहते हैं।

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