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जो लोग कम सोते हैं उन्हें दिल की बीमारियां होती हैं

कम नींद दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ा सकती है

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कम नींद दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ा सकती है
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अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने शोध किया है कि जो लोग रात में छह घंटे से कम सोते हैं उन्हें दिल की बीमारियां होती हैं।

यह शोध 14 जनवरी, 2019 को अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (JACC) की पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।

अध्ययन में कहा गया है कि कम नींद से हृदय रोग का ख़तरा बढ़ जाता है। हृदय रोग के जोखिम के कारणों में ग्लूकोज के स्तर में वृद्धि, सूजन, रक्तचाप और मोटापा भी शामिल हैं।

इस नए प्रोग्रेशन ऑफ़ अर्ली सबक्लिनिकल ऐथिरोस्क्लेरोसिस सीएनआईसी संताणडर (PESA CNIC-Santander) अध्ययन में 3,974 बैंक कर्मचारियों ने भाग लिया था। सभी प्रतिभागियों में से दो-तिहाई पुरुष थे और सभी बिना किसी हृदय रोग के स्वस्थ थे।

इस अध्ययन का नेतृत्व वैलेन्टिन फुस्टर ने किया था जो जेएसीसी (JACC) के प्रधान संपादक और संचालक हैं। 46 साल तक की उम्र के लोगों में संवहनी संबंधी बीमारीओं का पता लगाने के लिए इस अध्ययन में इमेजिंग तकनीकों का उपयोग किया गया था।

प्रतिभागियों द्वारा उनकी नींद को मापने के लिए एक्टिग्राफ के नाम से जाना जाने वाला एक छोटा उपकरण उपयोग किया गया था। इस उपकरण ने लगभग सात दिनों तक लगातार उनकी गतिविधियों का विश्लेषण किया।

प्रतिभागियों के बीच चार समूह बनाए गए थे: जो आठ घंटे से अधिक सोए थे, जो सात से आठ घंटे सोए थे, जो छह से सात घंटे सोए थे, और जो छह घंटे से कम सोए थे।

हृदय में होने वाले परिवर्तनों की जांच के लिए, प्रतिभागियों के हृदय का सीटी स्कैन और 3डी अल्ट्रासाउंड करवाया गया।

जोस एम ऑर्डोविस, जो इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक हैं ने कहा, "हृदय रोग एक प्रमुख वैश्विक समस्या है, और हम दवाईओं, शारीरिक गतिविधि और आहार सहित कई तरीकों का उपयोग करते हुए इसे रोक रहे हैं और इसका इलाज कर रहे हैं। लेकिन यह अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि हमें नींद को उन तरीकों में से एक के रूप में शामिल करना होगा जिनका उपयोग हम हृदय रोग से लड़ने के लिए करते हैं। नींद एक ऐसा कारक है जिससे हम हर दिन समझौता कर रहे हैं। ”

ऑर्डोविस ने आगे बताया, "इस तथ्य को बताने के लिए यह पहला अध्ययन है कि उद्देश्यपूर्ण रूप से मापी गई नींद स्वतंत्र रूप से पूरे शरीर में ऐथिरोस्क्लेरोसिस से जुड़ी होती है, न कि केवल हृदय में।"

यह नया अध्ययन नींद और हृदय स्वास्थ्य पर किए गए पिछले शोधों के समान नहीं है। यह पहले के अध्ययनों से कई ज़्यादा बड़ा माना जाता है जो जनसंख्या के स्वास्थ्य पर केंद्रित था।

पिछले अध्ययन में अन्य स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोग शामिल थे। जबकि कुछ अध्ययन कुछ प्रश्नावली पर आधारित थे ताकि यह पता लगाया जा सके कि लोग कितनी अच्छी नींद लेते हैं। हालांकि, इस नए अध्ययन ने नींद के बारे में वास्तविक जानकारी प्राप्त करने के लिए एक्टिग्राफ उपकरण का इस्तेमाल किया।

इस नए अध्ययन में यह पाया गया कि जो लोग छह घंटे से कम सोते हैं उनमें ऐथिरोस्क्लेरोसिस का खतरा उन लोगों की तुलना में अधिक होता है जो सात से आठ घंटे तक सोते हैं।

एथरोस्क्लेरोसिस एक ऐसी बीमारी है जो धमनियों की भीतरी दीवारों में चरबी के इकट्ठा होने के कारण विकसित होती है।

वहीं, जिन लोगों की नींद अच्छी होती है, वे उन लोगों की तुलना में स्वस्थ जीवन जीते हैं, जो अक्सर अपनी नींद के दौरान रात में जाग जाते हैं।

इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि जो महिलाएं रात में आठ घंटे से अधिक सोती थीं उनमें हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययन से यह भी पता चला कि जो लोग अधिक कैफीन और शराब का सेवन करते हैं, उन्हें कम और बाधित नींद आती है।

इस अध्ययन से शोधकर्ताओं का लक्ष्य एक ऐसी दुनिया विकसित करना है जो बेहतर स्वास्थ्य संबंधी इलाजों से दिल की बीमारीओं से मुक्त हो। इसके लिए, शोधकर्ता हृदय विकारों के अन्य कारणों के बारे में जानने के लिए आगे के अध्ययन करने के लिए उत्सुक हैं।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि एक बेहतर जीवन शैली के लिए स्वस्थ आहार और व्यायाम के साथ-साथ अच्छी नींद भी प्राथमिकता होनी चाहिए।

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