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ग्राम-नकारात्मक जीवाणु हमारे शरीर के साथ संचार करते हैं और हमें बीमार करते हैं।

मानव शरीर में जीवाणुओं के संचार को समझने के तरीके की खोज

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मानव शरीर में जीवाणुओं के संचार को समझने के तरीके की खोज
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शोधकर्ताओं ने एक नए तरीके की पहचान की है जिसके माध्यम से ग्राम-नकारात्मक जीवाणु हमारे शरीर के साथ संचार करते हैं और हमें बीमार करते हैं।

यह अध्ययन बिंघमटन यूनिवर्सिटी, न्यू यॉर्क के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया था और "जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल केमिस्ट्री" पत्रिका में 25 जनवरी 2019 को प्रकाशित हुआ था।

यह अध्ययन उस तरीके को समझने पर आधारित था जिसके माध्यम से ग्राम-नकारात्मक जीवाणु को अवरुद्ध किया जा सकता है और विषाक्त पदार्थों की रिहाई को नियंत्रित किया जा सकता है। इस अध्ययन ने छोटे अणुओं के परिवहन के माध्यम से मानव शरीर के साथ जीवाणु के संचार करने के तरीके को ढूंढा है। ये अणु बाहरी झिल्ली पुटिकाओं के उत्पादन की सुविधा प्रदान करते हैं।

प्रारंभिक अभिव्यक्ति जो कि यह थी कि यह उत्पादन जीन अभिव्यक्ति को नियंत्रित करने से होता है वह गलत साबित हुई। वास्तव में यह पाया गया कि ये अणु जीवाणु की सतह से निकलते हैं और अत्यधिक संचित विषाक्त पदार्थों का निर्माण करते हैं।

संचार अणुओं को जीवाणु की झिल्ली में डालने से इन विष वितरण वाहनों के उत्पादन को सशक्त किया जाता है। इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ताओं ने इस तंत्र को विस्तार से समझने के लिए एक मॉडल बनाया। मॉडल ने उन्हें यह जानने में मदद की कि इतने कम समय में अणु, झिल्ली के साथ कैसे संपर्क करता है।

जेफरी डब्लू स्केर्टज़र, जैविक विज्ञान विभाग के एक सहायक प्रोफेसर ने कहा, “हमारी सबसे अधिक महत्वपूर्ण खोज यह है कि संचार अणु को एक बहुत विशिष्ट तरीके से झिल्ली में प्रवेश करना होता है। यह खुद को एक पुस्तक की तरह मोड़ लेता है, फिर झिल्ली में प्रवेश करते ही उसका विस्तार हो जाता है।”

उन्होंने यह भी कहा, “यह अध्ययन इस बात का प्रमाण था कि अंतःविषय कार्य कितना फायदेमंद हो सकता है। हम एक ऐसी सीमा पर पहुंच चूके हैं कि हम प्रयोगात्मक रूप से क्या कर सकते हैं और अणु कैसे झिल्ली के साथ सम्पर्क करता है यह जानने के लिए हमें डॉ योंग के मॉडल की जरूरत थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस काम से कई नए सवाल पैदा हुए हैं जिनकी हम अब भी जांच कर रहे हैं।”

शिन योंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के सहायक प्रोफेसर ने कहा, “ग्राम-नकारात्मक जीवाणु जैसे सभी जीवाणुओं में समान प्रकार के संचार अणु होते हैं। हमने सूडोमोनास एरोगिनोसा के PQS [सूडोमोनास कीनोलोन सिग्नल] अणु पर ध्यान केंद्रित किया क्योंकि यह पहली बार खोजा गया था और इस पर सबसे अच्छा अध्ययन किया गया है। अन्य ग्राम-नकारात्मक प्रजातियां, जैसे कि ई. कोलाई, भी अपने स्वयं के संचार अणुओं को इसी तरीके से स्थानांतरित कर सकती हैं।”

उन्होंने पाया कि संचार अणु में बहुत ही लचीला सिर और पूंछ थी। अपने आगे के अध्ययन में, वे यह पता लगाने का उद्देश्य रखते हैं कि पूंछ सिर की अनुपस्थिति या संशोधन में कैसे प्रतिक्रिया करती है और पूंछ हटाए जाने या संशोधित होने पर सिर कैसे प्रतिक्रिया करता है।

यह अध्ययन भहुउपजाति की प्रस्पर क्रियाओं को समझने में शोधकर्ताओं की मदद कर सकता है जो बदले में इन क्रियाओं के कारण संक्रमण के जोखिम को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

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