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स्मार्टफोन ऐप मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए ग्लूकोज संवेदक और इंसुलिन पंप के साथ काम करती है।

एक मोबाइल ऐप मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है

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एक मोबाइल ऐप मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है
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शोधकर्ताओं ने एक कृत्रिम अग्न्याशय प्रणाली विकसित की है जो रोगियों में मधुमेह को माप सकती है। यह कृत्रिम प्रणाली एक स्मार्टफोन ऐप का उपयोग करती है जो मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए ग्लूकोज़ संवेदक और इंसुलिन पंप के साथ काम करती है।

यह शोध 8 जनवरी 2019 को एक पत्रिका, मैरी एन लिबर्ट में प्रकाशित किया गया था।

इस कृत्रिम अग्न्याशय प्रणाली ने प्रारंभिक परीक्षण पास कर लिया है जो टाइप 1 मधुमेह वाले लोगों पर किया गया था। इस नए ऐप का परीक्षण खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) के नियमों के अनुसार किया गया था।

इसका परीक्षण उन छह वयस्कों पर किया गया था जिन्हें टाइप 1 मधुमेह था। इस प्रणाली को इंसुलिन पंप के दो ब्रांडों के साथ जोड़ा जाता है। यह दो प्रकार के ग्लूकोज संवेदकों के साथ भी काम करता है।

टाइप 1 मधुमेह के रोगियों को पूरे दिन अपने रक्त में शक़्कर के स्तरों की जांच करनी पड़ती है। कुछ रोगी इंसुलिन पंप का उपयोग करते हैं। इंसुलिन पंप शरीर को हार्मोन का एक पूर्वनिर्धारित स्तर प्रदान करता है और यह दिन में 24 घंटे काम करता है।

परंतु असमान भोजन की खपत या व्यायाम के कारण इंसुलिन पंप विफल हो सकते हैं। दिन भर की ये गतिविधियाँ रक्त में शक़्कर के स्तरों को बढ़ा सकती हैं या इसमें गिरावट आ सकती है। ऐसे में रोगियों को अपने शरीर में इंसुलिन के स्तर को निर्धारित करने की आवश्यकता होती है।

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक ईयाल दसाऊ ने कहा, “लोग सार्वजनिक रूप से इंसुलिन पंप या संवेदक को बाहर निकाले बिना अपने मधुमेह को नियंत्रित कर सकते हैं। आपको बस एक स्क्रीन पर देखना है और किसी को भी यह पता नहीं चलेगा कि आपको मधुमेह है।”

दसाऊ ने यह भी कहा, "यह पंप इंसुलिन के एक स्थिर प्रवाह को रखने में मददगार हैं जो उपयोगकर्ता द्वारा ग्लूकोज का स्तर कम होने पर संशोधित किया जा सकता है। लेकिन यह “स्मार्ट” उपकरण नहीं हैं।”

डॉ जेसन एनजी, एक अन्त:स्त्रावविज्ञानी हैं जिन्होंने कहा, "टाइप 1 मधुमेह में, अग्न्याशय बहुत कम या कोई इंसुलिन पैदा नहीं करता है, यह एक हार्मोन है जो एक यातायात संचालित करने वाले सिपाही की तरह काम करता है जो शक्कर को बताता है कि कहां जाना है और कब।"

डॉ एनजी ने यह भी कहा, "तो, क्या होता है जब आप इंसुलिन को संशोधित करने की क्षमता खो देते हैं और उसके कारण, आपको इंसुलिन दिया जाता है।”

कृत्रिम अग्न्याशय प्रणाली वे उपकरण है जो सावधानीपूर्वक विकसित किए जाते हैं। ये उपकरण उपयुक्त अग्न्याशय के ग्लूकोज-विनियमन कार्य की प्रतिकृति बनाते हैं। यह उपकरण शरीर में ग्लूकोज के स्तर की निगरानी करते हैं। साथ ही, यह उपकरण शरीर में इंसुलिन के संचालन को स्वचालित रूप से नियंत्रित करता है।

यह उच्च रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है और निम्न रक्त शर्करा को नियंत्रित करता है। खाद्य और औषधि प्रशासन यह बताता है कि कृत्रिम अग्न्याशय प्रणाली टाइप 1 मधुमेह रोगियों में रक्त शर्करा के स्तर को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।

प्रतिभागियों पर संवेदक-संवर्धित पंप (एसएपी) के इस्तेमाल के एक सप्ताह के बाद 48 घंटे के लिए कृत्रिम अग्न्याशय का उपयोग किया गया था। कृत्रिम अग्न्याशय (एपी) की प्रणाली को प्रतिभागियों द्वारा चुनौती दी गई थी जिन्होंने नियंत्रक को चेतावनी दिए बिना व्यापक रूप से चलने की क्रिया की।

उन्होंने दो रातों तक लगातार भोजनालय में भोजन का सेवन किया। उन्होंने आइसक्रीम भी खा ली। जानबूझकर दी गयी इन चुनौतियों के बाद, एपी अध्ययन के साथ एसएपी की तुलना ने एक बेहतर प्रवृत्ति दी।

इस आईऐपीएस प्रणाली ने विश्वसनीय परिणाम दिए और परिधीय उपकरणों के साथ बेहतर संपर्क प्रस्तुत किए। इस उपकरण को बार-बार उपयोगकर्ताओं के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती है।

इनमें से छह रोगियों ने पूरी प्रक्रिया में उच्च रक्त शर्करा का अनुभव नहीं किया। यहां तक कि वे उच्च कार्ब से युक्त भोजन करते थे लेकिन फिर भी उनमें रक्त शर्करा का स्तर कम पाया गया था।

इस कृत्रिम ऐप के बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि यह एक बंद स्मार्टफोन में ग्लूकोज पर नज़र रख सकता है, निर्णय लेने वाले एल्गोरिदम या इंसुलिन पंप के साथ बिना तार के काम कर सकता है।

लेकिन इस नए अध्ययन के साथ समस्या यह है कि इस अध्ययन को करने में कम समय लगा और इस शोध के आधार पर हम प्रभावी निष्कर्ष नहीं निकाल सकते हैं।

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