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एंड्रोमेडा आकाशगंगा, जिसके भविष्य में मिल्की वे आकाशगंगा के साथ टकराव से गुजरने की उम्मीद है।

नासा के हबल ने एक नई आकाशगंगा के निर्माण को कैमरा में कैद किया

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नासा के हबल ने एक नई आकाशगंगा के निर्माण को कैमरा में कैद किया
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नासा/इएसए की हबल अंतरिक्ष दूरबीन ने एनजीसी 6052 (NGC 6052) नाम की एक विशाल आकाशगंगा की छवि ली है जिसमें दो तारा प्रणाली टकराने की प्रक्रिया में हैं।

यह जानकारी 8 मार्च, 2019 को नासा की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित की गई थी।

नासा और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) की अंतरिक्ष दूरबीन, हबल ने कई साल पहले ही तारों के एक दूर के तारामंडल को खोजा था। वर्ष 2015 में अंतरिक्ष दूरबीन द्वारा ली गयी एक आकाशगंगा की छवि की अब अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा फिर से जांच की गई है।

इस छवि को एनजीसी 6052 के रूप में उल्लिखित किया गया था जिसे वैज्ञानिकों द्वारा आकाशगंगाओं की एक जोड़ी के रूप में वर्णित किया गया है। तब यह छवि नासा द्वारा अपनी वेबसाइट पर साझा की गई थी और यह जानकारी दी गयी थी कि दो तारा प्रणाली गुरुत्वाकर्षण बल के कारण संयोजन की प्रक्रिया में हैं।

यह टकराने वाली दो आकाशगंगा हरक्यूलिस तारामंडल में लगभग 230 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर स्थित हैं। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार, इन आकाशगंगाओं के तारों के बीच टकराने की प्रक्रिया उनके बीच फासले के कारण कठिन प्रतीत होती है। वैज्ञानिकों द्वारा यह भी जानकारी दी गयी कि आकाशगंगाओं के बीच खाली स्थान हैं।

ईएसए के अनुसार, “बहुत समय पहले गुरुत्वाकर्षण ने दो आकाशगंगाओं को एक साथ खींचा था जो अब हमें अराजक स्थिति में दिखाई देती हैं। दोनों मूल आकाशगंगाओं के भीतर के सितारे अब नए गुरुत्वाकर्षण प्रभावों के कारण नए प्रक्षेप पथों का अनुसरण करते हैं।”

ईएसए ने आगे कहा, "हालांकि, सितारों के बीच वास्तविक टकराव बहुत कम होते हैं क्योंकि सितारे उनके बीच की दूरी के सापेक्ष बहुत छोटे होते हैं (अधिकांश आकाशगंगा खाली जगह होती है)। आखिरकार, दोनों आकाशगंगाएं एक एकल, स्थिर आकाशगंगा बनाने के लिए पूरी तरह से एक दूसरे में विलीन हो जाएंगी।"

इस विशाल आकाशगंगा, एनजीसी 6052 की खोज सबसे पहले साल 1784 में विलियम हर्शेल द्वारा की गई थी। नासा और ईएसए की अंतरिक्ष दूरबीन, हबल द्वारा वाइड फील्ड और प्लैनेटरी कैमरा 2 के माध्यम से इन तारा प्रणालियों की खोज की गयी थी।

यह बताया जा रहा है कि इन दोनों आकाशगंगाओं के टकराने के बाद एक नई एकल और स्थिर आकाशगंगा का निर्माण होगा। इसलिए, एजेंसी द्वारा यह कहा गया था कि हबल दूरबीन द्वारा ली गई छवि एक नई आकाशगंगा के निर्माण की तस्वीर थी।

इन तारा प्रणालियों की विलय की प्रक्रिया के दौरान, सभी सितारे अपनी मूल कक्षाओं से बाहर निकल जाएंगे। इन तारों की टक्कर के बाद यह एक नए स्थान पर चले जाएंगे। इस प्रक्रिया के नतीजतन, नई आकाशगंगा का पुरानी दो मूल आकाशगंगाओं से एक अलग आकार होगा।

वैज्ञानिकों द्वारा यह उम्मीद की जा रही है कि हमारी अपनी मिल्की वे आकाशगंगा भी निकटवर्ती तारा प्रणाली, एंड्रोमेडा आकाशगंगा के साथ भविष्य में टकराव की एक समान प्रक्रिया से गुजरेगी। उस टक्कर के परिणामस्वरूप एक नई आकाशगंगा का निर्माण होगा।

हालांकि, फ़िलहाल मिल्की वे और एंड्रोमेडा आकाशगंगा का एक दूसरे से 2.5 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर होने का अनुमान है। यह दोनों आकाशगंगाएँ 402,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से एक दूसरे के निकट आ रही हैं। नेशनल ज्योग्राफिक के वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस टक्कर में अभी 4 बिलियन साल लगेंगे।

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