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एचआईवी एक विषाणु है जो किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है और यह व्यक्ति के शरीर के कुछ तरल पदार्थों द्वारा उसके शरीर में फैलता है।

एचआईवी के लिए नए इलाज की खोज

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एचआईवी के लिए नए इलाज की खोज
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अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक समूह ने मूल कोशिका का प्रत्यारोपण करके एचआईवी सकारात्मक लोगों के इलाज का एक नया तरीका खोजा है।

यह अध्ययन 5 मार्च 2019 को पत्रिका नेचर में प्रकाशित किया गया था। यूनिवर्सिटी ऑफ विटवाटरसरैंड, जोहान्सबर्ग के वैज्ञानिक इस समूह का एक हिस्सा हैं।

इस अध्ययन में यह पाया गया कि एचआईवी का इस नई तकनीक से सफल इलाज किया जा सकता है। एचआईवी एक विषाणु है जो किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है। यह व्यक्ति के शरीर के कुछ तरल पदार्थों द्वारा उसके शरीर में फैलता है।

इस अध्ययन का संचालन करने के लिए, कुछ एचआईवी सकारात्मक रोगियों को छांटा गया और उनमें उनके कैंसर के इलाज के एक हिस्से के रूप में हेमटोलॉजिकल रक्त रोग को ठीक करने के लिए मूल कोशिका का प्रत्यारोपण किया गया। इन प्रतिभागियों ने प्रत्यारोपण के बाद अपनी नियमित एचआईवी दवा लेना बंद कर दिया था और इसके बावजूद भी इन लोगो में एचआईवी के वापस आने का कोई संकेत नहीं दिखा।

प्रत्यारोपित कोशिकाओं में महत्वपूर्ण इंद्राज द्वारपालों की कमी होती है जिसे एक जीन दोष [CCR5delta32mutant] के रूप में माना जाता है। एचआईवी कोशिकाएं इन जीनों द्वारा संक्रमित होती हैं।

इस उपचार को पाने वाले और एचआईवी मुक्त घोषित होने वाले पहले मरीज बर्लिन से टिमोथी रे ब्राउन थे। उन्होंने 12 साल पहले प्रत्यारोपण करवाया था और तब से अब तक उनमें एचआईवी के वापिस आने के कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए।

यह इसलिए हुआ क्योंकि प्रत्यारोपण के बाद वाली कोशिकाएं एचआईवी कोशिकाओं से ब्राउन की प्रतिरक्षा प्रणाली को बचाने के लिए कुशल थीं। हालांकि, ब्राउन को आक्रामक कीमोथेरेपी, कुल शरीर विकिरण और दो स्टेम सेल प्रत्यारोपण भी पहले प्राप्त हुए थे।

अब, दुनिया भर के मरीज़ इस उपचार का आनंद ले रहे हैं और ब्राउन के एचआईवी मुक्त समूह में शामिल हो रहे हैं। केवल एक बार, हल्के कैंसर कीमोथेरेपी और विकिरण के बिना प्रत्यारोपण प्राप्त करने के बाद भी नए रोगी एचआईवी मुक्त साबित हुए।

IciStem कार्यक्रम में पंजीकृत लगभग 39 रोगियों को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण उपचार प्राप्त हुआ है। IciStem एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग है जो इस प्रत्यारोपण द्वारा एचआईवी के इलाज की क्षमता की जांच करता है।

प्रोफेसर फ्रांकोइस वेंटर, उप कार्यकारी निदेशक, विटस आरएचआई ने कहा, “स्पष्ट रूप से देखें तो, यह अभी तक एचआईवी से पीड़ित लोगों के लिए एक विकल्प नहीं है, यहां तक ​​कि बहुत अमीर देशों में भी, लेकिन यह एक बड़ा कदम है। यह अविश्वसनीय रूप से रोमांचक है, क्योंकि यह एचआईवी के जटिल प्रतिरक्षा विज्ञान के बारे में हमारी समझ को प्रभावित करता है और हमें इलाज के करीब पहुंचाता है। ”

वेंटर ने आगे कहा, "यूट्रेक्ट के साथ विट्स का सहयोग एक खुशी की बात है और हमने अभिनव काम करने और शीर्ष चिकित्सा पत्रिकाओं में प्रकाशित होने वाली अनुवाद संबंधी अनुसंधान करने के लिए विट्स और यूट्रेक्ट की विशेषज्ञता को संयुक्त किया है।"

यह अध्ययन एचआईवी के लिए एक विश्वसनीय और उपयुक्त इलाज खोजने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि बर्लिन के एक मरीज पर पहले भी यह इलाज लागू किया गया था पर यह प्रचलित हालही में हुआ है।

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