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नई अपचनीय गोली को पेट की परत में इंजेक्ट किया जा सकता है और यह पेट के कठोर एंजाइमों और एसिड से बच सकती है।

नई दवा के माध्यम से इंसुलिन पेट में डाला जा सकता है

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नई दवा के माध्यम से इंसुलिन पेट में डाला जा सकता है
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मैसाचुसेट्स के प्रौद्योगिकी संस्थान, नोवो नॉर्डिस्क, केटीएच रॉयल प्रौद्योगिकी संस्थान और अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के वैज्ञानिकों ने शरीर में सुई के माध्यम से इंसुलिन पहुंचाने वाली एक नई दवा विकसित की है।

यह शोध 7 फरवरी, 2019 को साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया था।

शरीर में दवाओं को पहुंचाने के लिए मौखिक दवाएं सबसे अच्छा तरीका है लेकिन इंसुलिन जठरांत्र संबंधी मार्ग के माध्यम से काम नहीं कर सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस नई पचने योग्य गोली को पेट की परत में इंजेक्ट किया जा सकता है। यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने के लिए इंसुलिन की आपूर्ति के बाद हानिरहित रूप से शरीर से बाहर निकल जाती है।

यह नव विकसित दवा पेट के कठोर एंजाइमों और अम्ल से बच सकती है। इसे रक्तप्रवाह में बहुत कुशलता से अवशोषित किया जा सकता है।

यह शोध कुछ जानवरों पर किया गया था और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। यह दवा इंसुलिन की मौखिक खुराक दे सकती है। यह उन इंजेक्शनों की जगह लेगी जो टाइप 1 मधुमेह के रोगियों द्वारा उपयोग किए जाते हैं।

रॉबर्ट लैंगर, इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखकों में से एक हैं, उन्होंने कहा, "हम वास्तव में उम्मीद कर रहे हैं कि यह नए प्रकार की दवा किसी दिन इंसुलिन रोगियों की मदद कर सके और शायद किसी को भी ऐसी चिकित्सा की आवश्यकता होती है जो अब केवल इंजेक्शन या जलसेक द्वारा दी जा सकती है।”

इस पेपर के पहले लेखक, एलेक्स अब्रामसन कहते हैं, "यह बात महत्वपूर्ण है कि इंजेक्शन लगाने पर सुई ऊतक के संपर्क में आती है। इसके अलावा, अगर लोग घूमते हैं या पेट में कुछ हलचल हो, तो भी यह उपकरण अपनी जगह से नहीं हटेगा।”

वर्ष 2014 में, मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान के शोधकर्ताओं ने उस दवा को विकसित किया था जो कई छोटी-छोटी सुइयों से ढकी हुई थी। यह छोटी आंत में या पेट में दवाओं को डालने के लिए इस्तेमाल की जा सकती थी।

नई विकसित की गयी दवा में, पुरानी रचना को बदल दिया गया है और इसमें केवल एक सुई है। इस सुई की नोक ठंडी सुखी इंसुलिन से बनी होती है जो लगभग 100 प्रतिशत संकुचित होती है। इस दवा को बनाने के लिए उसी प्रक्रिया का उपयोग किया गया है।

इस सुई का ढांचा जैवनिम्ननीय पदार्थ से बना हुआ है। यह ढांचा पेट की दीवार में प्रवेश नहीं करता है।

इस नई दवा के अंदर, इसकी सुई एक संकुचित स्प्रिंग के साथ रखी जाती है। यह एक डिस्क का उपयोग करके रखी जाती है जो चीनी से बनी होती है। जब आप दवा को निगलते हैं, तो चीनी से बनी डिस्क पेट के पानी से घुल जाती है। यह तब स्प्रिंग को छोड़ देती है और पेट की दीवार में सुई को इंजेक्ट करती है।

रोगियों को इंजेक्शन से पेट में दर्द नहीं होता क्योंकि हमारे वहां दर्द महसूस करने वाला कोई अभिग्राहक नहीं होता है। इस दवा की प्रणाली को सावधानीपूर्वक विकसित किया गया है ताकि दवा पेट में उतर जाए और खुद को उन्मुख कर सके। इस तरह सुई सीधे पेट के अस्तर के संपर्क में आ जाती है।

शरीर में भेजे गए इंसुलिन की दर को नियंत्रित किया जा सकता है और इंसुलिन को पूरे शरीर में असर करने में लगभग एक घंटा लगता है।

नई गोली का आकार ब्लूबेरी के समान होता है। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया है कि इस उपकरण का उपयोग शरीर में कुछ अन्य प्रोटीन दवाओं को स्थानांतरित करने के लिए भी किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं की टीम अब इस तकनीक को विकसित करने के लिए अपना काम फिर से शुरू कर रही है। वे इस सरल उपकरण के लिए इसकी निर्माण प्रक्रिया को अनुकूलित करना चाहती है।

यह अनोखी दवा वितरण प्रणाली किसी भी प्रोटीन दवा के लिए बहुत उपयोगी हो सकती है जिसे शरीर में इंजेक्ट करने की आवश्यकता होती है। शोधकर्ता अब आरएनए और डीएनए जैसे न्यूक्लिक अम्ल के लिए काम करेंगे।

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