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अस्थिसंधिशोथ ने दुनिया भर के 237 मिलियन (23.7 करोड़) लोगों को प्रभावित किया है।

अस्थिसंधिशोथ के इलाज के लिए एक नई दवा

लेखक कनिका  •  
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अस्थिसंधिशोथ के इलाज के लिए एक नई दवा
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टोकई विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नाइ दवा की खोज की है जो घुटने के अस्थिसंधिशोथ का इलाज कर सकती है। यह रिपोर्ट 21 फरबरी 2019 को एनपीजी रीजेनरेटिव मेडिसिन नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई है।

अस्थिसंधिशोथ (OA) जोड़ों की एक बीमारी है जो जोड़ों में उपास्थि (एक जैविक स्नेहक) के पतन के कारण होती है। इन उपास्थि में कोई रक्त वाहिका या नसें मौजूद नहीं होती हैं और इन्हें मुख्य रूप से उपास्थिकोशिका के रूप में जाना जाता है।

अस्थिसंधिशोथ मानव गतिशीलता को खराब रूप से प्रभावित कर सकता है। अस्थिसंधिशोथ से पीड़ित एक मरीज को रोजमर्रा के छोटे-मोटे काम करने में कठिनाई होती है, और इस प्रकार यह जीवन की गुणवत्ता को प्रभावीत करता है

वर्तमान में, अस्थिसंधिशोथ की प्रगति को रोकने के लिए बाजार में कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। इस बीमारी का इलाज नहीं किया जा सकता, यहां तक ​​कि अन्य मामलों के जैसे इसे उपास्थिकोशिका प्रत्यारोपण की मदद से भी रोका नहीं जा सकता।

इससे पहले उपास्थि की मरम्मत के लिए उपास्थिकोशिका शीट का प्रत्यारोपण केवल पशु मॉडल पर किया गया था। अब, इस प्रक्रिया को मनुष्यों पर लागू किया गया है।

इस अध्ययन के लिए, वैज्ञानिकों ने आठ रोगियों को नामांकित किया जो घुटने के अस्थिसंधिशोथ से पीड़ित थे। इस प्रयोग में पारंपरिक सर्जरी को शामिल किया गया और जोड़ों में हड्डियों को स्थिर किया गया। फिर, वैज्ञानिकों ने उपास्थि दोषों में उपास्थ्यणु कोशिकाओं को प्रत्यारोपित किया।

शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया से पहले और बाद में दोनों समय एक्स-रे इमेजिंग का उपयोग किया। अध्ययन में शामिल मरीज़ों को 3 साल तक निगरानी में रखा गया। नतीजतन, वैज्ञानिकों ने पाया कि पारंपरिक सर्जरी और उपास्थ्यणु कोशिकाओँ की परत के प्रत्यारोपण के इस संयोजन ने इन रोगियों में सुधार दिखाया और घुटने के अस्थिसंधिशोथ के उपचार के लिए आशाजनक साबित हुआ।

हालाँकि, वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन की कुछ कमियों पर भी ध्यान दिया है। यह प्रयोग केवल आठ रोगियों पर किया गया था और इसे केवल तीन वर्षों के लिए किया गया था। इस प्रयोग के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए, वैज्ञानिकों को अधिक प्रतिभागियों के साथ लंबे समय तक इस प्रयोग को करने की आवश्यकता है।

जापान एजेंसी फॉर मेडिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट (एएमईडी) के शोधकर्ताओं द्वारा जारी बयान के अनुसार, “हालाँकि हमारे नैदानिक ​​अध्ययन में इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका नियामक अधिकारियों के लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हम मानते हैं कि घुटने के अस्थिसंधिशोथ से पीड़ित रोगियों में परिणामों की जांच जारी रखना आवश्यक है। घुटने के अस्थिसंधिशोथ के लिए इस चिकित्सा की वास्तविक प्रभावशीलता का निर्धारण करने के लिए दीर्घकालिक अनुवर्ती और सख्त तुलनात्मक अध्ययन की आवश्यकता है।"

आज अस्थिसंधिशोथ ने दुनिया भर के 237 मिलियन (23.7 करोड़) लोगों को प्रभावित किया है। आमतौर पर, 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोग इस बीमारी से पीड़ित होते हैं। औसतन 10% पुरुष और लगभग 18% महिलाएं अस्थिसंधिशोथ से पीड़ित हैं। अमेरिका में लगभग 30 से 53 मिलियन (3 से 5.3 करोड़) लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं।

इस प्रयोग के लिए शोधकर्ताओं को कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है जैसे की यह चिकित्सा विभिन्न प्रक्रियाओं का एक संयोजन है। साथ ही, वैज्ञानिकों के लिए हर अंतःक्षेप के प्रभावों का निर्दिष्ट एकत्र करना मुश्किल था, इसलिए उन्हें नियमों और विनियमों का पालन करने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।

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