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बायोफिल्म के अंदर मौजूद प्रतिजैविकी-प्रतिरोधी जीवाणु।

प्रतिजैविकी-प्रतिरोधी जीवाणु विकसित करने के लिए नई विधि ढूंढी गई

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प्रतिजैविकी-प्रतिरोधी जीवाणु विकसित करने के लिए नई विधि ढूंढी गई
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टीबी के कारणों की पहचान करने के लिए मैनुएल कैंट बाल्टिक स्टेट यूनिवर्सिटी (IKBFU) द्वारा एक नई विधि यानी एकल प्रतिजैविकी-प्रतिरोधी जीवाणु कोशिकाएं विकसित की गई हैं।

IKBFU द्वारा टीबी के कारणों को जल्दी पहचान ने के लिए एक एक नया अध्ययन किया गया। अध्ययन का पहला परीक्षण डेटा इन ब्रीफ जर्नल में प्रकाशित किया गया था।

IKBFU के भौतिकविदों द्वारा किए गए इस अध्ययन का उद्देश्य जीवाणु को खोजने और जैविक सामग्री को नुकसान पहुंचाए बिना जीवाणु दवाओं के प्रति उनके प्रतिरोध का मूल्यांकन करना था। अध्ययन समग्र रूप से टीबी से संबंधित है।

टीबी एक संक्रामक जीवाणु रोग है जो माइकोबैक्टीरियम क्षय रोग के प्रतिजैविकी-प्रतिरोधी उपभेदों के कारण होता है। हालाँकि टीबी शरीर के सभी अंगों को प्रभावित करता है लेकिन ऐसा माना जाता है कि यह ज्यादातर फेफड़ों को प्रभावित करता है।

IKBFU के शोधकर्ताओं के एक समूह द्वारा जीवाणु कोशिकाओं का शीघ्र विश्लेषण करने के लिए रमन स्कैटरिंग स्पेक्ट्रोग्राफी के उपयोग का सुझाव दिया गया था। इसमें उनका सहयोग सेंट-पीटर्सबर्ग स्टेट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ थाइसिओपुलमनोलॉजी और सेंट-पीटर्सबर्ग स्टेट यूनिवर्सिटी के सहकर्मियों द्वारा दिया गया।

बीजिंग में पहली बार टीबी के पहले लक्षण देखे गए थे। और स्पेक्ट्रोग्राफी की आवश्यकता तब महसूस की गई जब ये उपभेद औषधीय दवाओं के प्रति प्रतिरोधी होने लगे। इसलिए, नैदानिक ​​अभ्यास और वैज्ञानिक अनुसंधान दोनों के लिए, दवा प्रतिरोधी बैक्टीरिया की त्वरित पहचान के लिए नए तरीकों की आवश्यकता थी।

स्पेक्ट्रोग्राफी एक गैर-हमलावर विधि है जो अध्ययन के तहत सामग्री की संरचना और उस संरचना की पहचान करने में मदद करती है। यह अपने नमूने द्वारा एक निश्चित तरंग दैर्ध्य के साथ लेजर विकिरण के प्रकीर्णन पर आधारित होती है।

इस प्रक्रिया के दौरान, वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न जीवाणु में लेजर बीम को इंगित किया गया। यह विभिन्न उपभेदों से संबंधित कोशिकाओं की संरचना से संबंधित जानकारी देने के लिए किया गया था। प्रतिजैविकी दवाओं के प्रतिरोध और जीवाणु कोशिकाओं की दीवार घटकों के विन्यास में परिवर्तन के कारण यह प्रकाश बिखर गया।

वैज्ञानिक और शैक्षिक केंद्र (IKBFU) के एक वरिष्ठ शोध सहयोगी एंड्रे ज़ियूबिन ने कहा, “हमारे द्वारा प्रकाशित आंकड़ों में माइकोबैक्टीरियम टीबी के विभिन्न उपभेदों के लिए वर्णक्रमीय की जानकारी शामिल है। प्रयोग के परिणामों के अनुसार, रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी टीबी के कारणों में दवा प्रतिरोध के स्तर को निर्धारित करने के लिए एक उपयोगी उपकरण हो सकता है।"

टीबी सबसे अधिक जानलेवा बीमारियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 2017 में यह दुनिया भर में एचआईवी नकारात्मक लोगों के बीच 1.3 मिलियन (13 लाख) से अधिक मौतों का कारण बना और एचआईवी सकारात्मक लोगों में लगभग 300,000 मौतें हुई। हर साल, यह संख्या 10 मिलियन (1 करोड़) के दर से बढ़ रही है।

टीबी फैक्ट्स के अनुसार, 2016 में सिर्फ टीबी के कारण भारत में 4,35,000 मौतें हुईं।

रमन स्कैटरिंग स्पेक्ट्रोग्राफी के उपयोग से पहले तक, मानक जैविक और रासायनिक तरीकों का उपयोग जीवाणु प्रतिरोध के स्तर को निर्धारित करने के लिए किया जाता था। जैसा कि रिपोर्ट में कहा गया है, सेंट-पीटर्सबर्ग स्टेट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ थाइसिओपुलमनोलॉजी द्वारा इस अध्ययन के लिए सामग्री प्रदान की गई थी।

यह अध्ययन IKBFU की प्रमुख प्रगतियों में से एक है क्योंकि यह लाखों प्राणियों को टीबी नामक इस घातक बीमारी से लड़ने में मदद करेगा।

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