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भारत में, प्रति वर्ष स्ट्रोक 100,000 में से 105 से 152 लोगों को प्रभावित करता है।

दिल के दौरे के दौरान मस्तिष्क की क्षति को कम करने के लिए नई विधि की खोज

लेखक हर्षिता  •  
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दिल के दौरे के दौरान मस्तिष्क की क्षति को कम करने के लिए नई विधि की खोज
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शोधकर्ताओं ने एक नई विधि की खोज की है जो दिल के दौरे के कारण होने वाली मस्तिष्क की क्षति को सफलतापूर्वक कम करने में सक्षम है।

यह नया अध्ययन 14 मार्च 2019 को जर्नल ऑफ़ एक्सपेरिमेंटल मेडिसिन में प्रकाशित हुआ था।

दिल के दौरे के दौरान मस्तिष्क की क्षति को कम करने पर केंद्रित इस नई विधि को एक चूहे के नमूने पर संचालित किया गया था। यह विधि शरीर के अंदर के हेमिचैनल को लक्षित करके काम करती है। हेमिचैनल वे मार्ग हैं जो शरीर में रासायनिक आयन और छोटे अणुओं के प्रवाह को आसान बनाते हैं।

यह तारिकाकोशिका के माध्यम से व्यक्त किए जाते हैं। तारिकाकोशिका एक तरह की कोशिकाएं होती हैं जो मस्तिष्क के अंदर मौजूद स्नायु की रक्षा करती हैं।

दिल का दौरा एक चिकित्सा स्थिति है जिसके दौरान मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बंद हो जाता है और विषैले अणुओं को छोड़ने के लिए हेमिचैनल खुलते हैं। जैसे ही ये अणु तारिकाकोशिका के बाहर पहुंचते है, ये मस्तिष्क के अंदर सूजन पैदा करते हैं और वहां के स्नायु को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इस अध्ययन का संचालन करने के लिए, शोधकर्ताओं ने प्रमुख रूप से इस्केमिक दिल के दौरे पर ध्यान दिया। इस्केमिक दिल के दौरे के दौरान, मस्तिष्क की धमनियां संकुचित या अवरुद्ध हो जाती हैं और मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह बड़ी मात्रा में कम हो जाता है।

शोधकर्ताओं द्वारा संचालित की गई यह विधि जो दिल के दौरे के दौरान मस्तिष्क को होने वाले नुकसान को कम करने में सक्षम है, इसमें कोनेक्सिन नामक चैनल प्रोटीन में कुछ बदलाव करना शामिल था। ये बदलाव हेमिचैनेल के गठन को रोक कर किए गए थे।

फिर हेमिचैनल की इस अनुपस्थिति के कारण, यह तारिकाकोशिकाएं मस्तिष्क के अंदर स्नायु की रक्षा करने के लिए पर्याप्त रूप से कुशल हो जाती हैं। यह प्रक्रिया बदले में, दिल के दौरे के कारण होने वाले दर्द को कम करने में मदद करती है।

इसी नमूने पर किये गए एक अन्य अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने गैप 19 नामक एक अणु का उपयोग करके पहले वाली ही प्रक्रिया दोहराई, यानी हेमिचैनेल के गठन को रोका। इससे भी दिल के दौरे के दौरान मस्तिष्क को कम नुकसान हुआ।

इससे पता चलता है कि कोनेक्सिन हेमिचैनेल अवरोधक दिल के दौरे के खिलाफ मस्तिष्क के अंदर स्नायु की रक्षा करने में मददगार हो सकते हैं। बेहतर परिणामों के लिए, शोधकर्ताओं ने "वास्तविक जीवन" वाली दिल के दौरे की स्थितियों की नक़ल करने की कोशिश की, जैसे कि उन्होंने दौरा पड़ने के बाद मरीज़ को दवा देने में दो घंटे का अंतर रखा।

द ओटवा हॉस्पिटल रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक शोधकर्ता और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक मोइसेस फ्रीटास-एंड्रेड ने कहा, "यह अध्ययन दिल के दौरे के उपचार के लिए एक अलग तरीका है। पुराने बहुत सारे शोध मस्तिष्क के अंदर के स्नायु की रक्षा करने की कोशिश पर केंद्रित हैं। लेकिन यहां हमने दिल के दौरे के दौरान मस्तिष्क के स्नायु की रक्षा करने के लिए तारिकाकोशिका की क्षमता को बढ़ाने का एक तरीका खोजा है।"

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक क्रिश्चियन नौस ने कहा, "हमारे लिए यह बहुत ही ज़रूरी था कि हम उपचार के लिए एक नैदानिक ​​रूप से यथार्थवादी विधि का उपयोग करें, खासकर तब जब हम एक ऐसी दवा का परीक्षण कर रहे हैं जो संभवतः एक दिन इलाज के लिए इस्तेमाल की जाएगी।"

नौस ने आगे कहा, "दिल का दौरा पड़ने के बाद जब तक चिकित्सा-सहायक आते हैं और मरीज़ को अस्पताल लेकर जाया जाता है और उसका इलाज शुरू होता है तब तक व्यक्ति के दो घंटे आसानी से बीत जाते हैं। यह एक संयुक्त दृष्टिकोण के लिए चरण निर्धारित करता है जहां न केवल सीधे दौरे के दौरान में स्नायु का इलाज किया जा सकता है, बल्कि इसी स्थिति में स्नायु की रक्षा करने के लिए तारिकाकोशिका की क्षमता को भी बढ़ाया जा सकता है।"

NCBI के अनुसार, दिल का दौरा भारत में एक बहुत ही सामान्य चिकित्सा स्थिति है और यह प्रति वर्ष देश के विभिन्न भागों में 1,00,000 व्यक्तियों में से 105 से 152 को प्रभावित करती है।

इस अध्ययन के निष्कर्ष मस्तिष्क के अंदर स्नायु की क्षति करने वाली अन्य बीमारियों या समस्याओं के इलाज में सहायक हो सकते हैं। इनमें दर्दनाक मस्तिष्क की चोटें और अल्जाइमर रोग भी शामिल हैं।

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