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वैज्ञानिक इस उपकरण द्वारा मस्तिष्क की तंत्रिका गतिविधि का पता लगाने में सक्षम होंगे।

नया एमआरआई सेंसर मस्तिष्क की गतिविधि का पता लगा सकता है

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नया एमआरआई सेंसर मस्तिष्क की गतिविधि का पता लगा सकता है
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एमआईटी के शोधकर्ताओं की टीम ने एक उपकरण विकसित किया है जो उन्हें जीवित जानवरों के मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं में अधिक गहराई से देखने में मदद करता है।

वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इस तकनीक की मदद से वे तंत्रिका गतिविधि का पता लगा सकते हैं और विशेष रूप से इसके साथ जुड़े व्यवहारों का अध्ययन करने में सक्षम हो सकते हैं। यह शोध 22 फरवरी 2019 को नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ था।

मानव शरीर में, कैल्शियम तंत्रिका कोशिकाओं को अणु के संकेत देने के लिए जिम्मेदार होता है। हमारे पास जो तकनीक है वह केवल मस्तिष्क में कुछ मिलीमीटर तक का ही निदान कर सकती है, हालांकि, इस नए उपकरण की मदद से ये पता चल सकता है कि तंत्रिका कोशिकाएँ एक दूसरे पर कैसे परस्पर प्रभाव डालती हैं।

दल के शोधकर्ताओं ने बाह्य कैल्शियम सांद्रता को मापने के लिए चुम्बकीय अनुनाद प्रतिबिम्बन (एमआरआई) सेंसर तकनीक का उपयोग किया है। उन नैनोकणों की बाधा को दूर करने के लिए, जो कोशिकाओं में प्रवेश करने के लिए बहुत बड़े होते हैं, शोधकर्ताओं ने निर्माण खंडों का उपयोग किया है जो पतली कोशिका झिल्ली में घुस सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने मैंगनीज के रूप में कंट्रास्ट एजेंट का उपयोग किया है जो चुंबकीय क्षेत्र के साथ बुरी तरह से संपर्क करता है ताकि यह अपने कार्बनिक यौगिक के माध्यम से कोशिका झिल्ली में आसानी से प्रवेश कर सके। इस उपकरण में एक कैल्शियम-बाइंडिंग भुजा भी होती है, जिसे किलेटर कहा जाता है।

रिपोर्टों के अनुसार, यह पता चला कि यदि कैल्शियम का स्तर कम पाया जाए, तो कैल्शियम किलेटर में मैंगनीज परमाणु की पकड़ ढीली हो जाती है। इसके कारण एमआरआई जांच के समय मैंगनीज का पता नहीं चल पाता।

फिर भी, किलेटर के कैल्शियम और मैंगनीज के साथ बढ़ने की तुलना में यदि कैल्शियम कोशिका में आसानी से बहता है तो कंट्रास्ट एजेंट एमआरआई छवि में उज्जवल दिखाई देता है।

एलन जैसनॉफ, एमआईटी के की प्राध्यापक और एमआईटी के मैकगवर्न इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन रिसर्च के एक सहयोगी सदस्य, ने कहा, “ इन उपकरणों के साथ अद्भुत चीजें की जा रही हैं, लेकिन हम कुछ ऐसा चाहते थे जो कोशकीय-स्तर संकेतन में खुद को और दूसरों को गहराई से देख सके।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा, "जब तंत्रिका कोशिकाएं, या अन्य मस्तिष्क कोशिकाएं जिन्हें ग्लिया कहा जाता है, उत्तेजित हो जाती हैं, तो वे अक्सर कैल्शियम एकाग्रता में दस गुना से अधिक वृद्धि का अनुभव करती हैं। हमारा सेंसर उन परिवर्तनों का पता लगा सकता है।”

यह प्रयोग चूहों पर स्ट्रेटम की तंत्रिका कोशिकाओं में विद्युत गतिविधि को उत्तेजित करने के लिए पोटेशियम आयनों को सुई द्वारा डालकर करके किया गया था। यह क्षेत्र नए व्यवहार सीखने और गतिविधियों का नियोजन करने के लिए जिम्मेदार है। शोधकर्ता उन कोशिकाओं में कैल्शियम की प्रतिक्रिया का पता लगाने में सक्षम रहे हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, तकनीक के उपयोग के साथ तंत्रिका कोशिकाओं के छोटे समूहों का पता लगाना आसान होगा जो विशेष रूप से व्यक्तियों के कार्यों और व्यवहारों में शामिल होती हैं।

पहले मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को मापने के लिए एमआरआई का उपयोग किया जाता था, लेकिन, यह नई तकनीक तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधि के समय और स्थान के बारे में हर बारीक जांच विवरण प्रदान कर सकती है। अधिक शोध कार्य के साथ, वैज्ञानिक उन सभी अंगों की इमेजिंग का निदान करने में सक्षम होंगे जो कैल्शियम पर निर्भर करते हैं जैसे की हृदय।

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