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अध्ययन के अनुसार, मोटापे से संबंधित कैंसर खतरनाक दर से बढ़ रहे हैं, खासकर युवा वयस्कों में।

वयस्कों में मोटापा कैंसर का कारण बन सकता है

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वयस्कों में मोटापा कैंसर का कारण बन सकता है
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लैंसेट पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार मोटापे के रोगियों में कैंसर बढ़ रहा है। यह अध्ययन 3 फरवरी 2019 को प्रकाशित हुआ था।

यह अध्ययन अमेरिका में 12 मोटापे से संबंधित कैंसर सहित 30 सामान्य कैंसर से संबंधित आयु-विशिष्ट, संबंधित घटनाओं पर किया गया था। अध्ययन में शामिल लोगों की आयु 25-84 वर्ष थी और यह अध्ययन वर्ष 1995 से 2014 तक किया गया था।

लेखकों ने नॉर्थ अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ सेंट्रल कैंसर रेजिस्टरीज़ से जानकारी एकत्र की। मिली जानकारी में अमेरिका की 67% आबादी शामिल थी। लेखकों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधि जनसंख्या-आधारित जानकारी वाले वयस्कों में 18 सामान्य कैंसर और 12 मोटापे से संबंधित कैंसर की जांच करने वाला यह पहला अध्ययन है।

अध्ययन के 20 साल की समय अवधि के दौरान, 30 कैंसरों के 14.7 मिलियन (1.47 करोड़) नए मामले दर्ज किए गए। धूम्रपान और एचआईवी से संबंधित कैंसर में कमी आई है। लेकिन 12 में से 6 मोटापे से संबंधित कैंसर के लिए, दरों में वृद्धि हुई, खासकर युवा वयस्कों में।

6 मोटापे से संबंधित कैंसर में गुर्दे, अग्न्याशय, पित्ताशय, कोलोरेक्टल, मल्टीपल मायलोमा और गर्भाशय कॉर्पस शामिल थे। ल्यूकेमिया और गैस्ट्रिक गैर-कार्डिया कैंसर की घटनाओं में युवा वयस्कों में वृद्धि हुई है और धूम्रपान और एचआईवी संक्रमण वाले कैंसर से संबंधित 18 कैंसरों में से 8 में कमी आई है।

अग्नाशय के कैंसर के रोगियों जिनकी आयु 45-49 वर्ष के बीच थी उनमें प्रत्येक वर्ष 4.3% की वृद्धि थी। जबकि गुर्दे के कैंसर वाले 25-29 वर्ष की आयु के रोगियों में 6.23% और 45-49 वर्ष की आयु के रोगियों में लगभग 3% की वृद्धि हुई है।

अध्ययन के अनुसार, मोटापे से संबंधित कैंसर जिस तरह से बढ़ रहा है वह चिंताजनक है। यह विशेष रूप से युवा वयस्कों में हो रहा है।

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और अमेरिकन कैंसर सोसाइटी में सर्विलेंस एंड हेल्थ सर्विसेज रिसर्च के वैज्ञानिक उपाध्यक्ष डॉ. अहमदिन जेमल ने कहा, "यह भविष्य में बूढ़े वयस्कों में मोटापे से संबंधित कैंसर के बढ़ते बोझ का संकेत देता है और इस बोझ को कम करने के लिए कदम उठाने की ज़रूरत है।"

जेमल ने यह भी कहा, "प्राथमिक देखभाल करने वाले आधे से भी कम चिकित्सक नियमित रूप से राष्ट्रीय स्क्रीनिंग करवाने की सलाह देने के बावजूद बॉडी मास इंडेक्स का आंकलन करते हैं। साथ ही केवल एक तिहाई रोगी निदान और वजन घटाने के परामर्श प्राप्त करने की रिपोर्ट करते हैं।"

पेंसिल्वेनिया के पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय में एक हैल्थी लाइफस्टाइल इंस्टिट्यूट के प्रोफेसर और निदेशक जॉन जेकिसिक कहते हैं, "कैंसर-मोटापा समस्या वास्तव में एक महत्वपूर्ण विषय है क्योंकि हमारे यहां कई दशकों से मोटापे से संबंधित विवाद चल रहे हैं।"

जेकिसिक ने यह भी कहा, "कैंसर की रोकथाम में उन सब चीज़ों की रोकथाम शामिल होगी जिनके कारण कैंसर बढ़ सकता है। और जब तक हम यह नहीं जानते कि मोटापा कैंसर के दर को कैसे बढ़ा सकता है, तब तक दोनों के बीच संबंध दिखाने वाले अवलोकन संबंधी अध्ययनों को देखना "गंभीर रूप से महत्वपूर्ण" है। "

अहमदिन जेमल के अनुसार, अस्वास्थ्य भोजन से संबंधित विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाना मोटापे को कम करने में मदद कर सकता है। उनका यह भी मानना है कि एक स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने के लिए अधिक सार्वजनिक अभियान किए जाने चाहिए।

यह अध्ययन एक विशिष्ट आयु वर्ग पर किया गया था जिस वजह से इसका परिणाम सिमित है और सभी पर लागू नहीं हो सकता।

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