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एनएसएआईडी (NSAID) आम दर्द निवारक दवाएं होती हैं जो बुखार और रक्त के थक्कों के जमने को कम करने में मदद करती हैं।

दर्द निवारक दवाएं सिर और गर्दन के कैंसर में जीवित रहने में मदद कर सकती हैं

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दर्द निवारक दवाएं सिर और गर्दन के कैंसर में जीवित रहने में मदद कर सकती हैं
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कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि सिर और गर्दन के कैंसर से पीड़ित रोगियों में नॉनस्टेरॉइडल एन्टी इन्फ़्लामेटरी औषधियां (NSAIDs) जीवित रहने में मदद कर सकती हैं। यह अध्ययन 25 जनवरी, 2019 को जर्नल एक्सपेरिमेंटल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ था।

एनएसएआईडी (NSAID) आम दर्द निवारक दवाएं होती हैं जो बुखार और रक्त के थक्कों के जमने को कम करने में मदद करती हैं। सबसे आम नॉनस्टेरॉइडल एन्टी इन्फ़्लामेटरी औषधि (NSAIDs) दवाइयाँ नेपरोक्सन, एस्पिरिन और इबुप्रोफेन हैं।

अध्ययन के अनुसार, उन रोगियों में जीवित रहने की दर में सुधार होता है, जिनके कैंसर में एक परिवर्तित जीन होता है जिसे PIK3CA कहा जाता है। जिन रोगियों में PIK3CA जीन नहीं था, उनपर एनएसएआईडी के उपयोग का कोई प्रभाव नहीं पड़ा था।

PIK3CA सिर और गर्दन स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (HNSCC) में पाए जाने वाला सबसे अधिक परिवर्तित जीन है। एचएनएससीसी (HNSCC) सिर और गर्दन का एक कैंसर होता है जो स्क्वैमस सेल से उत्पन्न होता है। हर साल सिर और गर्दन के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा की लगभग 600,000 घटनाएं सामने आती हैं।

एचएनएससीसी ज्यादातर पुरुषों में पाया जाता है। इस कैंसर का मुख्य कारण भारी शराब का सेवन, धूम्रपान और तंबाकू का सेवन है। पिछले अध्ययनों से पता चला है कि एस्पिरिन का नियमित उपयोग एचएनएससीसी के खिलाफ सुरक्षा के रूप में कार्य करता है।

इस अध्ययन के दौरान, लेखकों द्वारा पिट्सबर्ग मेडिकल सेंटर विश्वविद्यालय के 266 रोगियों की जांच की गई। जिन मरीजों के ट्यूमर को सर्जरी के द्वारा निकला गया, वे इस अध्ययन का हिस्सा थे।

67% रोगियों ने सर्जरी के बाद रेडियोथेरेपी और/या कीमोथेरेपी प्राप्त की। अध्ययन के 28% रोगियों में PIK3CA जीन का सक्रिय परिवर्तन था।

अध्ययन के दौरान, लेखकों ने जाना एनएसएआईडी का उपयोग न करने वाले रोगियों की तुलना में एनएसएआईडी का कम से कम छह महीने तक "स्पष्ट रूप से लंबे समय तक" नियमित उपयोग वाले रोगियों में सुधार हुआ।

लेखकों के अनुसार, अध्ययन की कुछ बाधाएँ थीं। इन बाधाओं में एनएसएआईडी लेने का समय, खुराक और अध्ययन में शामिल लोगों के समूह का आकार शामिल था।

जेनिफर ग्रांडिस, एमडी, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक ने कहा कि "सहायक एनएसएआईडी का उपयोग कई PIK3CA परिवर्तित कैंसरों के परिणामों में काफी सुधार कर सकता है। हमारी खोज का निष्कर्ष मानव स्वास्थ्य पर एक बड़ा प्रभाव डाल सकता है।”

लेखकों के अनुसार, "वर्तमान का अध्ययन नियमित एनएसएआईडी लेने वाले एचएनएससीसी के रोगियों में विशिष्ट रोग में ज़िंदा रहने और पूर्ण रूप से स्वस्थ रहने के महत्वपूर्ण लाभों को प्रदर्शित करने वाला सबसे पहला अध्ययन है जो एक दैहिक PIK3CA के परिवर्तन की उपस्थिति पर निर्भर है।"

लेखकों ने इस अध्ययन में आने वाली बाधाओं को संबोधित करने के लिए आगामी नैदानिक परीक्षण करने की योजना बनाई है।

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