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पेड़-पौधों पर आधारित आहार पोषण प्रदान करने के साथ साथ आपको रोग मुक्त रखता है।

पेड़-पौधों पर आधारित आहार: स्वास्थ्य और ग्रह दोनों के लिए अच्छा है

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पेड़-पौधों पर आधारित आहार: स्वास्थ्य और ग्रह दोनों के लिए अच्छा है
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हाल ही के अध्ययनों से पता चला है कि अगर मनुष्य बाहर का खाना खाने के बजाय पेड़-पौधों पर आधारित आहार लेना शुरू करते हैं, तो न केवल मानव शरीर बल्कि ग्रह पृथ्वी को भी इसका लाभ मिलेगा।

जहां मनुष्य बाहर का खाना खाने के शौकीन हैं, वहीं ग्रह पृथ्वी को कठिन परिणामों का सामना करना पड़ रहा है। फास्ट फूड के बढ़ते सेवन ने न केवल मानव शरीर को बुरी तरह प्रभावित किया है, बल्कि इसने पृथ्वी के लिए पर्यावरणीय परिवर्तनों से लड़ना कठिन बना दिया है।

एक अंतरराष्ट्रीय टीम ईएटी-लैंसेट कमीशन (EAT-Lancet Commission) ने एक नया आहार तैयार किया है। इस आहार का उद्देश्य पृथ्वी पर जंक फ़ूड के अति-उत्पादन और सेवन से होने वाले जलवायु परिवर्तनों के खिलाफ रक्षा करना है। इस आहार को "प्लेनेटरी हेल्थ डाइट" कहा जाता है।

यह आहार मानव शरीर को पोषण प्रदान करता है। साथ ही, यह व्यक्ति के रक्तचाप, और कोलेस्ट्रॉल जैसी चिकित्सा स्थितियों को ठीक करने में मदद करता है। इन आहार परिवर्तनों को अपनाने से प्रति वर्ष 11 मिलियन (1.1 करोड़) मौतों को रोकने में मदद मिल सकती है।

पेड़-पौधों पर आधारित आहार का सेवन करने का दूसरा लाभ यह है कि इससे देश में खेती और पशुधन पालन की भूमिका बढ़ सकती है। इस वजह से कृषि सहित अर्थव्यवस्था के गरीब क्षेत्रों में सुधार होगा।

इन हाल ही के वर्षों में पर्यावरण एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, हमें एक एक कदम कर के पेड़-पौधों पर आधारित आहार की तरफ चलने की जरूरत है। इसमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ रणनीतियां बनाना शामिल है।

इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए सबसे पहले उपभोक्ता अटल होना चाहिए। कृषि क्षेत्र को भी भोजन की मात्रा पर ध्यान देने की बजाए अधिक स्वस्थ भोजन के उत्पादन को प्राथमिकता देने की जरूरत है।

साथ ही, भोजन का पर्याप्त रूप से उत्पादन करना आवश्यक होगा। इसके अतिरिक्त, उत्पादन को बनाए रखने के लिए भूमि और महासागरों को भी पर्याप्त रूप से कुशल बनाने की आवश्यकता है। दूसरे शब्दों में, उपलब्ध साधनों को ग्रह की पूरी आबादी द्वारा इस्तेमाल करने के लिए उचित रूप से उपयोग किया जाना चाहिए।

उत्पादन या सेवन के किसी भी स्तर पर हानि से बचने के लिए उचित उपाय खोजे जाने चाहिए।

हार्वर्ड टी.एच. चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफ़ेसर वाल्टर विललेट ने कहा, "फलों, सब्जियों, मेवों और फलियों के सेवन को वैश्विक स्तर पर दोगुना करना होगा, और रेड मीट और चीनी जैसे खाद्य पदार्थों के सेवन को 50% से अधिक कम करना होगा"।

“वैश्विक खाद्य उत्पादन से जलवायु स्थिरता को खतरा है। वैश्विक खाद्य प्रणाली में परिवर्तन की तत्काल आवश्यकता है ”, पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च एंड स्टॉकहोम रेजिलिएंस सेंटर के प्रोफ़ेसर जोहान रॉकस्ट्रॉम ने कहा।

मनुष्यों की मौजूदा खाद्य तरीके पर्यावरण के लिए कई समस्याओं का कारण बन रहे हैं। उत्पादन के स्तर पर, वैज्ञानिकी खाद और कीटनाशकों के उपयोग ने जलवायु परिवर्तन को बुरी तरह से प्रभावित किया है।

सेवन के स्तर पर, इसने लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया है जिससे विभिन प्रकार की बीमारियां बढ़ी हैं। मोटापा और रक्तचाप के विकार इन बीमारियों में से कुछ हैं।

साथ ही, बढ़ती आबादी के साथ, पर्यावरण में अनचाहे बदलावों का खतरा भी बढ़ रहा है। इसमें ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, पृथ्वी का बढ़ता तापमान और बहुत कुछ शामिल है।

इस प्रकार, आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी पृथ्वी को बचाने के लिए एक बेहतर और स्थायी साधन को अपनाने की सख्त आवश्यकता है।

यह पेड़-पौधों पर आधारित ऐसे ही साधनों में से एक है। अन्य पर्यावरण संरक्षण के उपाय अधिक से अधिक पेड़ लगाना और प्राकृतिक संसाधनों को बचाना भी हो सकते हैं।

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