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धूम्रपान से सीओपीडी का खतरा बढ़ जाता है।

फेफड़ों की पुरानी बीमारी के विकास का कारण पता चला

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फेफड़ों की पुरानी बीमारी के विकास का कारण पता चला
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लीसेस्टर और नॉटिंघम के विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं द्वारा धूम्रपान करने वालों और धूम्रपान न करने वालों में फेफड़ों की पुरानी बीमारी के विकास के खतरों को जानने के लिए एक अध्ययन किया गया है। यह अध्ययन 25 फरवरी, 2019 को नेचर जेनेटिक्स जर्नल में प्रकाशित किया गया था।

इस अध्ययन के अनुसार, चिरकारी अवरोधी फुप्फुस रोग (सीओपीडी) के विकास के कारणों को समझाने में हमारे आनुवंशिक अंतर मदद कर सकते हैं। नए शोध में इस बात की जांच की गयी है कि धूम्रपान नहीं करने वालों और नियमित धूम्रपान करने वालों को अन्य लोगों की तुलना में इस बीमारी के विकास का खतरा अधिक कैसे है।

यह अध्ययन लगभग दो साल से किया जा रहा है। इस शोध के तहत, लगभग 400,000 लोगों ने भाग लिया और शोधकर्ताओं ने उन सब के डीएनए में 20 मिलियन (2 करोड़) अंतर को मापा है। इस अध्ययन में प्रतिभागियों के फेफड़ों के कार्य की तुलना इन परिणामों से की गई है। फेफड़ों के कार्यों की जांच श्वास परीक्षण के माध्यम से की गई है।

इस विश्लेषण के परिणामों में, 139 नए आनुवंशिक अंतर का पता चला है जो हमारे फेफड़ों के स्वास्थ्य के साथ-साथ सीओपीडी को भी प्रभावित करते हैं।

लुईस वेन, ब्रिटिश लंग फाउंडेशन के एक प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख लेखक ने कहा, "यह अच्छे से प्रमाणित है कि धूम्रपान सीओपीडी का एक प्रमुख कारण है, फिर भी धूम्रपान करने वालों और धूम्रपान न करने वालों के बीच सीओपीडी के समान रूप से विकास के तंत्र की समझ अभी कम है।"

प्रोफेसर वेन ने यह भी कहा, "हमारा अध्ययन इसके बारे में महत्वपूर्ण सुराग प्रदान करता है कि क्यों कुछ लोगों में सीओपीडी विकसित होता है और अन्य में नहीं होता, और हमारा यह नया ज्ञान सीओपीडी के रोगियों में उनके फेफड़ों के कार्य में गिरावट को कम करने के लिए नए उपचार विकसित करने में मदद करेगा।"

इस अध्ययन के सह-प्रमुख लेखक प्रोफ़ेसर, मार्टिन टॉबिन ने कहा, "हम उन लोगों में इस स्थिति के आनुवांशिक कारणों को समझने के बेहद करीब हैं, जिन्होंने कभी धूम्रपान ही नहीं किया है। जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें भी आनुवंशिक खतरे वाले कारणों के समान प्रतिरूप दिखाई देते हैं। यह अब साबित हो चुका है कि तम्बाकू धूम्रपान का खतरा बढ़ा देता है। इस शोध के निष्कर्ष नए उपचार विकसित करने में मदद कर सकते हैं जो सभी के लिए लाभदायक होंगे।"

सीओपीडी फेफड़ों की एक गंभीर बीमारी है जो लोगों में सांस लेने में तकलीफ का कारण बनती है। यह बिमारी हमारे जीवन के लिए खतरा बन सकती है। यह मरीज के वायुमार्ग में क्षति के कारण होती है। शोधकर्ताओं द्वारा यह बताया गया है कि धूम्रपान से सीओपीडी का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन इस बात की भी पुष्टि की गयी है कि सीओपीडी के 5 मरीज़ो में से 1 धूम्रपान न करने वाला होता है।

अध्ययन के दौरान, प्रतिभागियों को 10 अलग-अलग आनुवंशिक खतरे के समूहों में बांटा गया था। इस अध्ययन में यह पाया गया कि 10 में से 8 धूम्रपान करने वालों में उच्चतम आनुवंशिक खतरे के समूह में सीओपीडी का विकास हुआ। हालांकि धूम्रपान न करने वालों में इसका खतरा कम था, लगभग 2 से 10 धूम्रपान न करने वालों में फिर भी सीओपीडी का विकास हुआ।

इस जाँच में कुल मिलाकर 279 डीएनए अंतर पाए गए जो हमारे फेफड़ों के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं और सीओपीडी के जोखिम को बढ़ा देते हैं। इस शोध में शोधकर्ताओं ने उस आनुवंशिक अंतर की पहचान की जो सीओपीडी के खतरे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इस बिमारी की वजह से सालाना लगभग 250 मिलियन (25 करोड़) लोग प्रभावित होते हैं और वैश्विक स्तर पर इससे लगभग 3.1 मिलियन (31 लाख) मौतें होती हैं। इस अध्ययन के बाद हुए कई आनुवंशिक मतभेदों की पहचान हमें वैश्विक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कई नए उपचार विकसित करने में मदद कर सकती है।

सीओपीडी के खतरे को रोकने के लिए, धूम्रपान से बचना बेहद आवश्यक है। यदि हम वायु प्रदूषण से दूर रहते हैं, तो इससे हमें अनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इस अध्ययन के शोधकर्ताओं में से एक ने यह कहा है कि सीओपीडी के मरीज अब बेहतर उपचार की तलाश में हैं और यह शोध इसकी ओर एक बेहतर कदम साबित होगा।

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