Pharmacy Website
Clinic Website
TabletWise.com TabletWise.com
 
थवाइट्स ग्लेशियर के पिघलने से वैश्विक समुद्र तल 13 फीट बढ़ सकता है।

वैज्ञानिकों ने पिघलते ग्लेशियर की ओर कदम बढ़ाये

लेखक   •  
शेयर
वैज्ञानिकों ने पिघलते ग्लेशियर की ओर कदम बढ़ाये
Read in English

अगली गर्मियों में, वैज्ञानिक अंटार्कटिका के थवाइट्स ग्लेशियरों की तरफ यात्रा शुरू करेंगे। हाल के वर्षों में थवाइट्स ग्लेशियर जलवायु में परिवर्तन के कारण, बड़ी तेज़ी से पिघल रहे हैं। फ्लोरिडा या ब्रिटेन के आकार के समान इस ग्लेशियर में बर्फ के कई विशाल पिंड मौजूद हैं और इनके तेज़ी से पिंघलने के कारण यह वैज्ञानिकों के लिए अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

यह अनुसंधान सहयोग अमेरिकी राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान (NSF) और यूनाइटेड किंगडम के प्राकृतिक पर्यावरण अनुसंधान परिषद (NERC) के बीच है। इस परियोजना का बजट $25 मिलियन (लगभग 175 करोड़ रुपए) है। दुनिया भर के 100 से अधिक ध्रुवीय वैज्ञानिक इस अध्ययन का हिस्सा होंगे। इस सहयोग को इंटरनेशनल थ्वाइट्स ग्लेशियर सहयोग (ITGC) का नाम दिया गया है।

कुल आठ टीमें हैं जो थ्वाइट्स ग्लेशियरों, इनके आसपास की जलवायु, और इसके नीचे के पानी और किनारों पर अध्ययन और काम करेंगी। इस परियोजना के अक्टूबर 2018 में शुरू होने के साथ साथ पांच साल लगने की उम्मीद है।

ये पिघलते ग्लेशियर वैश्विक समुद्र-स्तर में चार प्रतिशत की वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं। मिशन वेबसाइट के अनुसार, पिछले 30 वर्षों में, इस 120 किलोमीटर के क्षेत्र में बहने वाली बर्फ की मात्रा लगभग दोगुनी हो गई है। अमुंडसेन सागर में बर्फ के नीचे बहने वाले गर्म पानी की वजह से , यह ग्लेशियर पिघल रहा है। इसके परिणामस्वरूप इस प्रवाह के कारण बर्फ टूट रही है जिससे पिघलने की गति और भी तेज हो रही है।

ब्रिटेन के विज्ञान मंत्री सैम गिइमाह के अनुसार, ''समुद्र के बढ़ते जल स्तर विश्व स्तर पर एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जिसे एक देश अकेले नहीं संभाल सकता। थवाइट्स ग्लेशियर पहले से ही समुद्र के बढ़ते जल स्तर के लिए जिम्मेदार है और आने वाली शताब्दी में इसके संभावित पतन को समझना महत्वपूर्ण हो गया है।”

थवाइट्स ग्लेशियरों का अध्ययन करने से वैज्ञानिकों को समुद्र के जल स्तर में तेजी से वृद्धि का कारण खोजने में मदद मिल सकती है और यह भी संकेत मिल सकता है कि समस्या पहले से कितनी गंभीर है। वैज्ञानिक समुद्री तलछट और महासागर का अध्ययन और अन्वेषण करेंगे। वे गहरे समुद्र में बहने वाली तरंगों का अध्ययन और माप भी करेंगे और फिर नीचे से ग्लेशियर के खिंचने, झुकने और दबने की जांच करेंगे।

यह अध्ययन मुश्किल होगी क्योंकि यह दूरदराज के क्षेत्रों में से एक में स्थित है। अनुसंधान की जगह थ्वाइट्स ग्लेशियरों से 1609 किलोमीटर दूर है। मौसम की स्थिति के कारण अनुसंधान की समय सीमा बहुत कम है।

ऐसा माना जाता है कि यदि संपूर्ण थ्वाइट्स ग्लेशियर ढह जाते हैं, तो इसके परिणामस्वरूप समुद्र तल में 13 फीट की वृद्धि हो सकती है।

ताज़ा खबर

TabletWise.com
Home
Saved

साइन अप