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मस्तिष्क को खाने वाले अमीबा जिन्हें नेगेलेरिया फाउलेरी के नाम से जाना जाता है।

चांदी के नैनोकण मस्तिष्क को खाने वाले अमीबा को मार सकते हैं

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चांदी के नैनोकण मस्तिष्क को खाने वाले अमीबा को मार सकते हैं
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मलेशिया के सनवे विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने एक शोध के दौरान चांदी के नैनोकणों पर दौरों के लिए उपयोग की जाने वाली दवाओं के लेप का उपयोग करके मस्तिष्क को खाने वाले अमीबा को मारने का एक नया तरीका खोज निकाला है।

यह शोध 15 अक्टूबर, 2018 को केमिकल न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया था। अध्ययन के अनुसार, मस्तिष्क खाने वाले अमीबा जिन्हें नेगेलेरिया फाउलेरी के नाम से भी जाना जाता है, उन्हें चांदी के नैनोकणों के इस्तेमाल से मारा जा सकता है। यह बताया गया है कि यह उपचार मानव मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित नहीं करेगा।

अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता, अयाज़ अनवर और उनके सहयोगी अमीबा पर दौरों के लिए उपयोग की जाने वाली तीन दवाओं - डायजेपाम, फेनोबार्बिटोन और फेनिटॉइन के प्रभाव के बारे में अनिश्चित थे। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने पहले ही इन दवाओं को मंजूरी दे दी है।

शोध के दौरान, दौरों के लिए उपयोग की जाने वाली इन तीन दवाओं को चांदी के नैनोकणों के साथ जोड़ा गया। इस संयोजन की क्षमता की जांच करते समय, यह विश्लेषण किया गया कि सभी दवाओं ने चांदी के नैनोकणों के साथ बेहतर काम किया।

शोधकर्ताओं द्वारा यह प्रस्तावित किया गया है कि चांदी के साथ इन तीनों दवाओं को मिलाकर अमीबा को ख़त्म किया जा सकता है। एक जीव के एकल-कोशिका पर्दे पर प्रोटीन रिसेप्टर्स या आयन चैनल द्वारा आक्रमण किया जा सकता है।

डॉ अयाज़ अनवर ने मलेशिया के सनवे विश्वविद्यालय में इस नए अध्ययन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी चुनौती उस दवा को खोजना है जो वास्तव में मस्तिष्क के सही क्षेत्र तक पहुंच सकती है।"

उन्होंने आगे कहा, "हमें एक ऐसी दवा की आवश्यकता है जो शरीर को उसके माध्यम से छल में डाल सके - और हम जानते हैं कि दौरों के लिए उपयोग की जाने वाली दवाएं उस बाधा को दूर कर सकती हैं।"

मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल के ग्लोबल इंफेक्शियस डिसीसेस डिवीज़न के निदेशक डॉ एडवर्ड टी रयान ने कहा, "यहां एक बुरा, अक्सर विनाशकारी संक्रमण है जिसके लिए हमारे पास कोई अच्छे उपचार उपलब्ध नहीं हैं। यह कार्य स्पष्ट रूप से प्रारंभिक चरण में है, लेकिन यह एक दिलचस्प कदम है।”

नेगलेरिया फाउलेरी एक अमीबा है, यह एक अनोखी प्रजाति है जो लोगों को संक्रमित करती है। यह एकल-कोशिका वाले जीवित जीव नदियों, झीलों, गंदे गर्म झरनों और मिट्टी जैसे गर्म ताज़े पानी वाली जगहों पर पाए जाते हैं।

आमतौर पर, यह तैरते समय या ताजे पानी के स्थानों पर गोता लगाने के दौरान नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं। वहां से यह मस्तिष्क तक जाते हैं और मस्तिष्क के ऊतकों को प्रभावित करते हैं। मस्तिष्क खाने वाले अमीबा के संक्रमण कभी-कभी होते हैं, लेकिन ये घातक होते हैं।

ऐसे घातक बैक्टीरिया से खुद को बचाने के लिए, आपको इसके खतरे को कम करना चाहिए। आप ताज़े पानी या गंदे स्थानों पर स्नान करने से बच सकते हैं। उसी समय, यह भी सुनिश्चित करें कि आपके आस-पास के स्थानों में ऐसी स्थितियां ना हो जहाँ यह बैक्टीरिया अपना घर बना सके।

आजकल, मस्तिष्क खाने वाले अमीबा से संक्रमित रोगियों का इलाज करते समय, रोगाणुरोधी दवाओं को आमतौर पर बहुत अधिक मात्रा में निर्धारित किया जाता है। हालांकि यह मस्तिष्क में इस संक्रमण के विकास को रोकने में मददगार है, परन्तु यह उपचार शरीर में कई दुष्प्रभाव लाता है।

जब अमीबा मस्तिष्क को खाने लगता है, यह मस्तिष्क के ऊतकों में सूजन लाता है। रिकॉर्ड के अनुसार, अक्सर इस संक्रमण का गलत निदान किया जाता है।

इस संक्रमण के ऐसे अप्रभावी उपचार की वजह से यह अध्ययन किया गया था। प्रयोगशाला में दवाओं के परीक्षण के दौरान, यह देखा गया कि सभी तीन दवाओं और चांदी के संयोजन ने अमीबा की कोशिकाओं को कम कर दिया। जबकि डायजेपाम दवा ने चांदी के साथ मिलकर कई बेहतर प्रभाव दिखाए।

डॉ अनवर ने अब जानवरों के प्रतिकृतियों जैसे चूहों, झींगुर या कॉकरोच पर अपने शोध की जांच करने के लिए योजना बनाई है।

मस्तिष्क खाने वाले अमीबा के संक्रमण से जीवन को खतरा होता है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के अनुसार, साल 1962 में, 143 रोगियों में से केवल 4 रोगी ही बच पाए थे।

अध्ययन से निकाले गए निष्कर्ष को अभी अंतिम रूप देना बाकी है क्योंकि इसके प्रभाव का विश्लेषण करने के लिए और भी कई परीक्षण किए जाएंगे। लेकिन यह शोध भविष्य में इस घातक बीमारी के इलाज के लिए पहला कदम साबित हुआ है।

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