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भारत में वर्ष 2018 में तम्बाकू से लगभग 1 मिलियन (10 लाख) लोग मारे गए।

धूम्रपान से दृष्टि विकार हो सकते हैं

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धूम्रपान से दृष्टि विकार हो सकते हैं
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एक नए अध्ययन में पाया गया है कि एक दिन में 20 से अधिक सिगरेट पीने वाले लोगों को दृष्टि संबंधी विकार हो सकते हैं। धूम्रपान करने वालों की दृष्टि पर तंबाकू के प्रभाव के ऊपर एक अध्ययन जनवरी 2019 में जर्नल साइकियाट्री रिसर्च में प्रकाशित हुआ था।

अध्ययन के सह-लेखक और रटगर्स के शोधकर्ता, स्टीवन सिल्वरस्टीन बताते हैं कि अत्यधिक धूम्रपान करने वालों को दृष्टि हानि का खतरा अधिक हो सकता है। यह अध्ययन विभिन्न लोगों के दो समूहों पर किया गया था। पहला समूह 71 स्वस्थ लोगों का था जिन्होंने अपने पूरे जीवन में 15 से कम सिगरेट का सेवन किया है। दूसरा समूह 63 धूम्रपान करने वालों का था, जो एक दिन में 20 से अधिक सिगरेट का सेवन करते हैं।

इस दूसरे समूह में भारी धूम्रपान करने वाले लोग शामिल थे जिन्होंने अपने जीवन में धूम्रपान छोड़ने के लिए कोई प्रयास नहीं किए। साथ ही, दोनों समूहों में 25-45 आयु वर्ग के लोग शामिल थे। जैसा कि मानक दृश्य तीक्ष्णता चार्ट द्वारा मापा गया, प्रतिभागियों की दृष्टि सामान्य या सामान्य करने के लिए सुधारी गई थी।

शोधकर्ताओं ने 19 इंच के कैथोड-रे ट्यूब मॉनीटर को स्थापित किया और अध्ययन का संचालन करने के लिए प्रतिभागियों को इससे कम से कम 59 इंच दूर बैठाया। मॉनिटर पर उत्तेजनाओं को प्रदर्शित किया गया और शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि प्रतिभागियों ने विपरीत स्तरों के बीच कैसे भेदभाव किया।

इसके परिणामों ने धूम्रपान करने वाले लोगों में लाल-हरे और नीले-पीले रंग की दृष्टि में बड़े बदलावों का संकेत दिया। इससे शोधकर्ताओं ने यह अनुमान लगाया कि सिगरेट में पाए जाने वाले न्यूरोटॉक्सिक रसायन अंधापन या दृष्टि संबंधी विकार पैदा कर सकते हैं। एक अन्य खोज से पता चला है कि पहले समूह की तुलना में दूसरे समूह के लोगों में विपरीत रंगों के बीच भेदभाव करने की क्षमता कम थी।

अध्ययन के सह-लेखक, स्टीवन सिल्वरस्टीन, ने कहा, "सिगरेट के धुएं में कई यौगिक होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं, और यह मस्तिष्क की परतों की मोटाई में कमी और मस्तिष्क घावों से जुड़े हुए होते हैं, जिसमें मस्तिष्क की ललाट पालि जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जो स्वैच्छिक गतिविधि और सोच के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और दृष्टि को संसाधित करने वाले मस्तिष्क के क्षेत्र की गतिविधि में कमी लाते हैं।"

उन्होंने यह भी कहा, "पिछले अध्ययनों ने अत्यधिक धूम्रपान करने को उम्र से संबंधित आंखों के धब्‍बेदार विकार के जोखिम को दोगुना करने और आँखों के लेंस का पीला होने और उसमें जलन होने से संबंधित बताया था।"

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित फैक्ट शीट 2018 इंडिया के अनुसार, भारत में वर्ष 2018 में लगभग 1 मिलियन लोगों (10 लाख) की तम्बाकू के कारण मौत हुई। यह भारत में होने वाली कुल मौतों का लगभग 9.5% था। इसके अलावा, भारत में लोगों की धूम्रपान शुरू करने की औसत आयु 18.7 वर्ष है।

सिल्वरस्टीन ने सुझाव दिया कि इस संबंध में आगे के अध्ययनों में सिज़ोफ्रेनिया या अन्य दृश्य विकार वाले लोग शामिल होंगे। इस श्रेणी के तहत धूम्रपान करने वालों (उनकी धूम्रपान दर के साथ) और गैर-धूम्रपान करने वालों का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

हालांकि इस अध्ययन ने पाठकों को निष्कर्षों के लिए एक शारीरिक स्पष्टीकरण नहीं दिया, लेकिन सिल्वरस्टीन ने कहा कि निकोटीन और धूम्रपान निश्चित रूप से आंख के दृष्टिपटल में रक्त वाहिकाओं और तंत्रिकाकोशिकाओं को प्रभावित करता है क्योंकि इसका प्रभाव पहले से ही इंसान की संवहनी प्रणाली पर पड़ता आ रहा है।

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